भारत-दक्षिण कोरिया आर्थिक साझेदारी | India-South Korea Economic Partnership

संदर्भ:
हाल ही में भारत और दक्षिण कोरिया ने अपनी ‘विशेष सामरिक साझेदारी’ (Special Strategic Partnership) के अन्तर्गत एक व्यापक आर्थिक रोडमैप का जारी किया। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई इस द्विपक्षीय बैठक में 25 प्रमुख परिणामों की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और औद्योगिक सहयोग को विस्तारित करना है।
भारत-दक्षिण कोरिया आर्थिक साझेदारी रोडमैप:
- व्यापार लक्ष्य (Trade Target): दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान $27 बिलियन से बढ़ाकर $50 बिलियन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
- CEPA का उन्नयन (Upgrade of CEPA): वर्ष 2010 से प्रभावी ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (CEPA) को एक वर्ष के भीतर अपग्रेड करने पर सहमति बनी है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार असंतुलन को कम करना और भारतीय निर्यातकों के लिए कोरियाई बाजार में बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है।
- कोरियाई औद्योगिक टाउनशिप (Korean Industrial Township): भारत में कोरियाई कंपनियों, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्योगों (SMEs) को आकर्षित करने के लिए समर्पित औद्योगिक टाउनशिप विकसित की जाएगी, जो ‘प्लग-एंड-प्ले’ बुनियादी ढांचे से लैस होगी।
- डिजिटल पेमेंट लिंक (Digital Payments): दोनों देशों ने अपने डिजिटल भुगतान प्रणालियों (UPI और कोरियाई समकक्ष) को जोड़ने की घोषणा की है, जिससे लेनदेन सुगम हो सके।
- शिपबिल्डिंग और समुद्री रसद: ‘शिपबिल्डिंग, शिपिंग और मैरीटाइम लॉजिस्टिक्स’ के लिए एक व्यापक ढांचे पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें दक्षिण भारत में एक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड विकसित करना शामिल है।
रणनीतिक एवं तकनीकी सहयोग:
- चिप्स और सेमीकंडक्टर: ‘इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज’ के माध्यम से AI, सेमीकंडक्टर और IT क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत बनाया गया है।
- रक्षा सहयोग (KIND-X): सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन के लिए ‘कोरिया-इंडिया डिफेंस एक्सीलरेटर’ (KIND-X) लॉन्च किया गया है। K9 वज्र आर्टिलरी गन की सफलता के बाद अब एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
- ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण: दक्षिण कोरिया आधिकारिक तौर पर अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में शामिल हो गया है। दोनों देशों ने ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ और स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाने के लिए एक ‘आर्थिक सुरक्षा वार्ता’ (Economic Security Dialogue) शुरू की है।
महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते (MoUs):
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क्षेत्र |
मुख्य विशेषता |
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औद्योगिक सहयोग |
एक ‘मंत्रालयी स्तर की औद्योगिक सहयोग समिति’ का गठन |
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स्टील सप्लाई चेन |
ओडिशा में लगभग $6 बिलियन के निवेश से स्टील प्लांट का विकास |
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सांस्कृतिक आदान-प्रदान |
वर्ष 2028-29 को ‘भारत-कोरिया मित्रता वर्ष’ के रूप में मनाना |
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जलवायु परिवर्तन |
पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत कार्बन उत्सर्जन कम करने हेतु MoU |