India UK Free Trade Agreement हुआ प्रभावी, जानिए भारत के लिए इसके क्या लाभ हैं?
संदर्भ:
15 जुलाई 2026 को भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच ऐतिहासिक भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (India UK Free Trade Agreement) और ‘दोहरा अंशदान अभिसमय’ (Double Contribution Convention) आधिकारिक रूप से प्रभावी हो गए हैं।
India UK Free Trade Agreement के मुख्य बिंदु:
- व्यापार लक्ष्य (Trade Projection): इस ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) का प्राथमिक लक्ष्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान 60 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 100 से 120 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक दोगुना करना है।
- ब्रिटेन द्वारा तत्काल शुल्क उन्मूलन: समझौते के तहत ब्रिटेन ने तत्परता दिखाते हुए अपनी 96.8% टैरिफ लाइनों पर आयात शुल्क (Import Duty) को तुरंत शून्य कर दिया है, जो भारत के कुल निर्यात मूल्य का 97.7% हिस्सा कवर करता है।
- ब्रिटेन का दीर्घकालिक कवरेज (UK India Commerce): कोटा व्यवस्था को मिलाकर ब्रिटेन अंततः अपनी 98.8% टैरिफ लाइनों पर शुल्कों को पूरी तरह समाप्त या बेहद कम कर देगा, जिससे 99.5% भारतीय निर्यात मूल्य प्रभावित होगा।
- भारत की चरणबद्ध रियायतें: भारत ने तुरंत अपनी 30.3% व्यापार मूल्य लाइनों पर शुल्क समाप्त किया है, जबकि अन्य 47% व्यापार मूल्य पर अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से (Phased Manner) सीमा शुल्क हटाया जाएगा।
- व्हिस्की और कारों पर भारी रियायत: भारत ने ब्रिटेन से आयात होने वाली प्रसिद्ध स्कॉच व्हिस्की पर तत्काल सीमा शुल्क को 150% से घटाकर 75% किया है, जिसे अगले 10 वर्षों में 40% तक लाया जाएगा। इसी तरह, एक निश्चित कोटा सीमा के भीतर ब्रिटिश कारों पर आयात शुल्क 100% से घटकर सीधे 10% हो गया है।
- दोहरा सामाजिक सुरक्षा अंशदान समाप्त (DCC Benefit): समझौते के साथ लागू ‘दोहरा अंशदान अभिसमय’ (Double Contribution Convention) सेवा क्षेत्र के लिए गेमचेंजर है।
- इसके तहत यूके में काम करने वाले अस्थाई भारतीय पेशेवरों को अगले 5 वर्षों तक वहां के राष्ट्रीय बीमा तंत्र में अपनी सैलरी का 25% हिस्सा नहीं देना होगा, बशर्ते वे भारत में ईपीएफओ अंशदान दे रहे हों।
- इससे सालाना 75,000 से अधिक भारतीय श्रमिकों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।
- श्रम-प्रधान क्षेत्रों को संजीवनी: भारत के वस्त्र (Textiles), परिधान, चमड़ा, फुटवियर, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में शून्य-शुल्क पहुंच (Zero-duty Access) मिली है। इससे भारत को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर बढ़त मिलेगी।
- संवेदनशील क्षेत्रों को पूर्ण सुरक्षा: भारतीय किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी उत्पाद (Dairy), अनाज, दालें, सब्जियां, स्मार्टफोन और संवेदनशील पॉलिमर को इस समझौते [India UK FTA] के दायरे से पूरी तरह बाहर (Excluded) रखा गया है।
भारत के लिए इसका महत्व:
- निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि: यूके के बाजार में भारतीय वस्तुओं को शून्य-शुल्क प्रवेश मिलने से देश के निर्यात और घरेलू विनिर्माण (Manufacturing) को जबरदस्त कूटनीतिक प्रोत्साहन मिलेगा।
- विदेशी निवेश (FDI) का प्रवाह: ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन भारत को एशिया में अपना मुख्य आर्थिक भागीदार मान रहा है, जिससे भारत के बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में ब्रिटिश निवेश तेजी से बढ़ेगा।
- कुशल श्रम गतिशीलता (Mobility for Talent): आईटी (IT), स्वास्थ्य सेवा, इंजीनियरिंग और वित्तीय सेवाओं में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए यूके के वीज़ा नियमों में ढील मिलेगी।
- लागत में कमी: भारतीय विनिर्माण उद्योगों के लिए यूके से आयात होने वाले उच्च तकनीकी मशीनरी पार्ट्स और चिकित्सा उपकरण सस्ते होंगे, जिससे उत्पादन लागत कम होगी।
- वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) में एकीकरण: यूरोपीय संघ (EU) से अलग होने के बाद ब्रिटेन के साथ यह स्वतंत्र समझौता भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक प्रमुख विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
- आर्थिक विकास और रोजगार सृजन (Youth Employment): श्रम-गहन उद्योगों में शुल्क हटने से देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- US के लिए कूटनीतिक मिसाल: यूके के साथ यह सफल “गोल्ड स्टैंडर्ड” समझौता भविष्य में अमेरिका के साथ भारत की लंबित मुक्त व्यापार वार्ताओं के लिए एक मजबूत ब्लूप्रिंट (Precedent) का कार्य करेगा।
FAQs:
Q1. भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता क्या है?
Ans: यह दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम करने और आर्थिक निवेश बढ़ाने के लिए हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक एवं व्यापारिक समझौता है।
Q2. यह समझौता कब से प्रभावी हुआ?
Ans: दोनों देशों के कूटनीतिक अनुसमर्थन के बाद यह समझौता आधिकारिक रूप से 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया है।
Q3. इससे भारत को क्या लाभ होगा?
Ans: भारतीय वस्तुओं को ब्रिटिश बाजार में कर-मुक्त पहुंच मिलेगी तथा पेशेवरों का दोहरा सामाजिक सुरक्षा टैक्स खर्च बच जाएगा।
Q4. किन क्षेत्रों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा?
Ans: भारत के कपड़ा, चमड़ा, सूचना प्रौद्योगिकी, पेशेवर व्यापार सेवाएं और रत्न-आभूषण उद्योगों को सबसे अधिक लाभ प्राप्त होगा।
Q5. क्या इससे आयातित वस्तुएं सस्ती होंगी?
Ans: हाँ, भारत में यूके से आने वाली कारें, स्कॉच व्हिस्की और उच्च-तकनीकी विनिर्माण मशीनें शुल्क कटौती से सस्ती हो जाएंगी।
