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जानिए India-Uzbekistan Bilateral Relations के बारे में, नया व्यापारिक लक्ष्य

जानिए India-Uzbekistan Bilateral Relations के बारे में, नया व्यापारिक लक्ष्य

India-Uzbekistan Bilateral Relations

संदर्भ:

हाल ही में भारत के विदेश मंत्री ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। 

  • इस बैठक में दोनों देशों ने आपसी आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अगले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर $3 बिलियन (3 अरब डॉलर) तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी व्यापारिक लक्ष्य (Bilateral Trade Target) निर्धारित किया।
उज्बेकिस्तान मध्य एशिया में स्थित एक स्थल-रुद्ध (चारों ओर जमीन से घिरा) देश है। 1991 में यह सोवियत संघ से स्वतंत्र हुआ था। इसकी सीमाएं उत्तर में कजाकिस्तान, पूर्व में ताजिकिस्तान, दक्षिण में तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान से लगती है।

भारत-उज्बेकिस्तान द्विपक्षीय संबंध (India-Uzbekistan Bilateral Relations):

  • ऐतिहासिक संबंध: भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंध सदियों पुराने हैं। दोनों प्राचीन रेशम मार्ग (Silk Road) के माध्यम से संस्कृति, बौद्ध धर्म, कला और व्यापार से जुड़े हुए थे।
    • भारत के मुगल साम्राज्य की जड़ें उज्बेकिस्तान के फरगाना घाटी से जुड़ी हैं।
    • भारत-पाकिस्तान 1965 के युद्ध के बाद शांति स्थापित करने के लिए ऐतिहासिक ताशकंद समझौता (1966) उज्बेकिस्तान की राजधानी में ही हस्ताक्षरित हुआ था, जहाँ भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन हुआ था।
    • सोवियत संघ के विघटन के बाद, भारत उज्बेकिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में से एक था और 18 मार्च 1992 को दोनों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए। 
  • रणनीतिक भागीदारी: दोनों देशों ने वर्ष 2011 में अपने संबंधों को एक ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया था।
    • हालिया बैठक में डॉ. एस. जयशंकर ने विधायी सहयोग बढ़ाने के लिए ‘भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह’ (Parliamentary Friendship Group) की स्थापना की घोषणा की। 
  • व्यापारिक संबंध: वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग $1 बिलियन से $1.3 बिलियन के बीच है।
    • भारत-उज्बेकिस्तान बिजनेस फोरम 2026 में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापारिक बाधाओं को हटाकर अगले 3 साल में इसे $3 बिलियन करने का लक्ष्य रखा। 
    • दोनों देश एक संभावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं।
    • भारत मुख्य रूप से फार्मास्युटिकल उत्पाद (दवाइयाँ), यांत्रिक उपकरण, वाहनों के पुर्जे, फ्रोजन भैंस का मांस और मोबाइल फोन निर्यात करता है।
    • भारत उज्बेकिस्तान से फल, सब्जियां, उर्वरक (Fertilizers), जूस और लुब्रिकेंट्स का आयात करता है।
  • निवेश (Investment): वर्तमान में उज्बेकिस्तान में लगभग 400 भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं।
    • दोनों देशों के बीच निवेश सुरक्षा बढ़ाने के लिए हाल ही में द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty – BIT) को अंतिम रूप दिया गया है, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा। 
  • रक्षा एवं आतंकवाद विरोधी सहयोग (Defence and Counter-Terrorism): दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित रूप से ‘दस्तलिक’ (Dustlik) नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किया जाता है, जो सैन्य समन्वय को मजबूत करता है।
    • दोनों देश सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism), कट्टरपंथ और मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति साझा करते हैं।
  • कनेक्टिविटी परियोजनाएं: उज्बेकिस्तान एक लैंडलॉक (Landlocked) देश है। भारत उसे समुद्र तक पहुंच देने के लिए ईरान के चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।
  • खनन एवं खनिज (Mining Sector): अगस्त 2026 की वार्ता में दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Minerals) के खनन और प्रसंस्करण में तकनीकी अनुसंधान सहयोग बढ़ाने पर विशेष सहमति जताई है।
  • शिक्षा, संस्कृति और भारतीय डायस्पोरा (Education, Culture & Diaspora): शिक्षा के क्षेत्र में उज्बेकिस्तान एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।
    • वर्तमान में 16,000 से अधिक भारतीय छात्र (मुख्य रूप से मेडिकल की पढ़ाई के लिए) उज्बेकिस्तान के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं।
    • भारत के ITEC प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत अब तक उज्बेकिस्तान के 3,000 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
    • ताशंकद में स्थित ‘लाल बहादुर शास्त्री भारतीय सांस्कृतिक केंद्र’ भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (International Cooperation): दोनों देश शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और ‘भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन’ के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
    • उज्बेकिस्तान ने भारत की वर्ष 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Presidency 2026) का समर्थन किया है, जबकि भारत ने वर्ष 2027-2029 के लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) की अध्यक्षता हेतु उज्बेकिस्तान की उम्मीदवारी का समर्थन किया है।
  • उज्बेकिस्तान का भारत के लिए रणनीतिक महत्व:
  • सेंट्रल एशिया पॉलिसी: भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया पॉलिसी’ (Connect Central Asia Policy) की सफलता के लिए उज्बेकिस्तान भू-राजनीतिक धुरी है।
  • यूरेनियम आपूर्ति: भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए उज्बेकिस्तान यूरेनियम का एक महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता देश है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भारत और उज्बेकिस्तान ने वर्ष 2026 में क्या नया व्यापारिक लक्ष्य निर्धारित किया है?

उत्तर: दोनों देशों ने अगस्त 2026 की बैठक में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके अगले तीन वर्षों में $3 बिलियन (3 अरब डॉलर) तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

प्रश्न 2: भारत-उज्बेकिस्तान के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास का क्या नाम है?

उत्तर: दोनों देशों की सेनाओं के बीच रक्षा सहयोग (Defence Cooperation) को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष ‘दस्तलिक’ (Dustlik) नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किया जाता है।

प्रश्न 3: वर्तमान में कितने भारतीय छात्र उज्बेकिस्तान में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं?

उत्तर: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 16,000 से अधिक भारतीय छात्र उज्बेकिस्तान के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा (विशेषकर चिकित्सा) प्राप्त कर रहे हैं। [15]

प्रश्न 4: उज्बेकिस्तान की भू-राजनीतिक स्थिति भारत के लिए क्यों चुनौतीपूर्ण है?

उत्तर: उज्बेकिस्तान दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो दोहरे लैंडलॉक्ड (Doubly Landlocked) हैं, जिसके कारण भारत चाबहार बंदरगाह के माध्यम से कनेक्टिविटी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। शामिल कर देश में सर्वोच्च विधिक सुरक्षा प्रदान की गई है।त्यापन कार्य सरल हो जाएगा.

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