Apni Pathshala

National Institute of Ocean Technology – परिचय, संरचना, शक्तियां और सहयोग

National Institute of Ocean Technology – परिचय, संरचना, शक्तियां और सहयोग

National Institute of Ocean Technology

संदर्भ:

हाल ही में राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (National Institute of Ocean Technology – NIOT) ने 3 अगस्त 2026 को गहरे समुद्र में खनन (Deep Sea Mining) और टिकाऊ संसाधन दोहन से जुड़ी स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय टेक्नोथॉन (National Technothon) की शुरुआत की।

National Institute of Ocean Technology – NIOT क्या हैं?

  • परिचय: एनआईओटी (NIOT) भारतीय समुद्री सुरक्षा, नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) और गहरे समुद्र में अनुसंधान के क्षेत्र में देश की अग्रणी विनियामक और इंजीनियरिंग शाखा है। 
  • स्थापना: इस प्रमुख शोध संस्थान की स्थापना नवंबर 1993 में की गई थी।
  • मुख्यालय: इसका केंद्रीय मुख्यालय चेन्नई (तमिलनाडु) में स्थित है। 
  • कानूनी आधार: यह कोई वैधानिक (Statutory) निकाय नहीं है, बल्कि सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत एक स्वायत्त शासी संस्था (Autonomous Society) है। 
  • नोडल मंत्रालय: यह भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences – MoES) के प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण के अंतर्गत कार्य करता है। 
  • संरचना:
    • शासी परिषद (Governing Council): संस्थान का शीर्ष प्रबंधन एक उच्च स्तरीय शासी परिषद द्वारा संचालित होता है। इसके अध्यक्ष (Chairman) अनिवार्य रूप से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव होते हैं।
    • संस्थान का प्रमुख: एनआईओटी का प्रशासनिक और तकनीकी नेतृत्व इसके निदेशक (Director) द्वारा किया जाता है, जो संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होते हैं।
    • सदस्य: शासी परिषद में वैज्ञानिक समुदाय, भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और नीति आयोग के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसमें आंतरिक कोर टीम में लगभग 200 से 500 तक विशेषज्ञ वैज्ञानिक और तकनीशियन कार्यरत हैं।
  • चयन: संस्थान के वैज्ञानिकों और निदेशक का चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) या पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा गठित एक स्वतंत्र उच्च-स्तरीय खोज-सह-चयन समिति (Search-cum-Selection Committee) द्वारा योग्यता और विशेषज्ञता के आधार पर पारदर्शी तरीके से किया जाता है।
  • कार्य एवं शक्तियां:
    • स्वदेशी इंजीनियरिंग का विकास: भारत के विशाल अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone – EEZ) में सजीव और निर्जीव संसाधनों के सतत दोहन के लिए टिकाऊ प्रौद्योगिकियों का निर्माण करना।
    • महासागर अवलोकन (Ocean Observation): सुनामी प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और जलवायु पूर्वानुमान के लिए गहरे समुद्र में डेटा एकत्र करने वाले प्लवकों (Buoys) के नेटवर्क का संचालन करना।
    • समुद्री परामर्श: अन्य सरकारी विभागों, निजी उद्योगों और रक्षा एजेंसियों को अपतटीय संरचनाओं (Offshore Structures) और तटीय इंजीनियरिंग मॉडल के निर्माण के लिए तकनीकी सेवाएं प्रदान करना। 
  • योजनाएं एवं सहयोग:
    • राष्ट्रीय टेक्नोथॉन 2026 (National Technothon): 3 अगस्त 2026 को शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य स्टार्टअप्स, एमएसएमई (MSMEs) और शोधकर्ताओं को आकर्षित कर गहरे समुद्र से पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स (Polymetallic Nodules) को निकालने के लिए प्रभाव-मुक्त और पर्यावरण-अनुकूल खनन प्रणालियों का विकास करना है।
    • मत्स्य-6000 और समुद्रयान (Matsya-6000 & Samudrayaan): एनआईओटी भारत के पहले मानवयुक्त गहरे समुद्र मिशन ‘समुद्रयान’ के तहत मत्स्य-6000 (MATSYA-6000) नामक सबमर्सिबल वाहन का विकास कर रहा है, जो तीन वैज्ञानिकों को 6,000 मीटर की गहराई तक ले जाने में सक्षम होगा। इसके लिए एनआईओटी ने इसरो (ISRO) के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के साथ टाइटेनियम हल (Titanium Hull) निर्माण के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग किया है।
    • अलवणीकरण तकनीक (Desalination Technology): संस्थान ने लक्षद्वीप द्वीपों में कम तापमान वाले थर्मल डिसेलिनेशन (LTTD) संयंत्र स्थापित किए हैं, जो समुद्र के पानी को सुरक्षित पीने योग्य पानी में बदलते हैं।
    • गहरे समुद्र में खनन प्रणाली (Deep Sea Mining System): केंद्रीय हिंद महासागर बेसिन में 6,000 मीटर की गहराई पर चलने वाले क्रॉलर आधारित माइनिंग मशीन का सफल परीक्षण कर भारत को चुनिंदा वैश्विक क्लब में शामिल किया है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: National Institute of Ocean Technology (NIOT) क्या है?

उत्तर: यह भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अधीन एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है, जो महासागरीय इंजीनियरिंग और स्वदेशी तकनीकों का विकास करता है।

प्रश्न 2: हाल ही में लॉन्च किए गए राष्ट्रीय टेक्नोथॉन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका उद्देश्य 4,500 से 6,000 मीटर की गहराई पर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना पॉलीमेटैलिक नोड्यूल्स के संग्रहण के लिए नवीन स्वदेशी तकनीकों को विकसित करना है। 

प्रश्न 3: समुद्रयान परियोजना में NIOT की क्या भूमिका है?

उत्तर: एनआईओटी इस परियोजना के मुख्य कार्यान्वयनकर्ता के रूप में मत्स्य-6000 (MATSYA-6000) नामक भारत का पहला मानवयुक्त गहरे समुद्र अनुसंधान पोत विकसित कर रहा है।

प्रश्न 4: NIOT का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

उत्तर: एनआईओटी का मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में है और इसके प्रशासनिक व तकनीकी मामलों का नेतृत्व इसके निदेशक (Director) द्वारा किया जाता है।otection Act 1972 – Schedule I) के तहत शामिल कर देश में सर्वोच्च विधिक सुरक्षा प्रदान की गई है।त्यापन कार्य सरल हो जाएगा.

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top