भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास दुस्तलिक | India-Uzbekistan joint military exercise Dustlik

संदर्भ:
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘दुस्तलिक’ के 7वें संस्करण का आयोजन 12 से 25 अप्रैल, 2026 तक उज़्बेकिस्तान के नमनगन स्थित पूर्वी सैन्य जिले के ‘गुरुमसरॉय फील्ड ट्रेनिंग एरिया’ में किया जा रहा है।
भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘दुस्तलिक’ (DUSTLIK):
- परिचय: ‘दुस्तलिक’ (Uzbek भाषा में अर्थ: ‘मित्रता’) भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित होने वाला एक वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है।
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विकासक्रम: यह अभ्यास बारी-बारी से भारत और उज्बेकिस्तान में आयोजित किया जाता है:
- प्रथम संस्करण (2019): नवंबर 2019 में उज्बेकिस्तान के चिरचिक प्रशिक्षण क्षेत्र में आयोजित किया गया।
- द्वितीय संस्करण (2021): मार्च 2021 में रानीखेत (उत्तराखंड), भारत में संपन्न हुआ।
- तृतीय संस्करण (2022): मार्च 2022 में उज्बेकिस्तान के यांगियारिक प्रशिक्षण क्षेत्र में आयोजित हुआ।
- चतुर्थ संस्करण (2023): फरवरी 2023 में पिथौरागढ़ (उत्तराखंड), भारत में ‘गढ़वाल राइफल्स’ की भागीदारी के साथ हुआ।
- पंचम संस्करण (2024): अप्रैल 2024 में उज्बेकिस्तान के टर्मेज़ (Termez) में आयोजित किया गया, जिसमें ‘जाट रेजिमेंट’ और भारतीय वायु सेना (IAF) ने भाग लिया।
- छठा संस्करण (2025): 16 से 28 अप्रैल 2025 तक पुणे (महाराष्ट्र) के फॉरेन ट्रेनिंग नोड (Aundh) में आयोजित हुआ।
प्रमुख सैन्य पक्ष और संरचना:
- प्रतिभागी दल: प्रत्येक संस्करण में सामान्यतः दोनों देशों के लगभग 60-60 जवान शामिल होते हैं। 2026 के संस्करण में भारतीय दल में मुख्य रूप से महार रेजिमेंट (MAHAR Regiment) के 45 जवान और भारतीय वायु सेना के 15 कर्मी शामिल हैं।
- परिचालन क्षेत्र: यह अभ्यास मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र (UN) के जनादेश के तहत अर्द्ध-शहरी और पहाड़ी/पर्वतीय इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों पर केंद्रित होता है।
- बहु-क्षेत्रीय संचालन: हालिया संस्करणों में यह अभ्यास ‘बहु-क्षेत्रीय उप-पारंपरिक संचालन’ (Multi-Domain Sub-Conventional Operations) के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें थल सेना और वायु सेना के बीच समन्वय को प्राथमिकता दी गई है।
प्रशिक्षण की विशेषताएं:
- रणनीतिक तालमेल: इसका मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच अंतः-परिचालन क्षमता (Interoperability) को बढ़ाना और सैन्य संबंधों को मजबूत करना है।
- सामरिक ड्रिल: इसमें शत्रु के ठिकानों पर हमला, भूमि नेविगेशन, संयुक्त अभियान केंद्र की स्थापना और आबादी नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण सामरिक अभ्यासों का आदान-प्रदान होता है।
- तकनीकी समावेश: आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए, इसमें ड्रोन संचालन (Drones), काउंटर-यूएएस (Counter-UAS) उपाय और नई पीढ़ी के हथियारों का कौशल साझा किया जाता है।
- सत्यापन चरण: प्रत्येक अभ्यास का समापन 48 घंटे के गहन ‘सत्यापन अभ्यास’ (Validation Phase) के साथ होता है, जहाँ संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाकर अवैध सशस्त्र समूहों को बेअसर करने की क्षमता का परीक्षण किया जाता है।
रणनीतिक महत्व:
- मध्य एशिया में सुरक्षा: उज्बेकिस्तान भारत के लिए मध्य एशिया में सुरक्षा और कनेक्टिविटी (जैसे ईरान और चाबहार बंदरगाह के माध्यम से) के लिए एक प्रवेश द्वार की तरह है।
- आतंकवाद के विरुद्ध साझा मंच: अफगानिस्तान में अस्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए, यह अभ्यास आतंकवाद के विरुद्ध दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- लिंक वेस्ट और मध्य एशिया नीति: यह अभ्यास भारत की मध्य एशिया नीति के तहत द्विपक्षीय संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित न रखकर रक्षा और सुरक्षा तक विस्तारित करने का प्रमाण है।