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12 साल बाद दिखी दुर्लभ इंडियन Giant Flying Squirrel 

12 साल बाद दिखी दुर्लभ इंडियन Giant Flying Squirrel 

Indian Giant Flying Squirrel

संदर्भ: 

हाल ही में उत्तराखंड के रामनगर वन प्रभाग (Ramnagar Forest Division) के टेडा गांव में लगभग 12 साल के लंबे अंतराल के बाद दुर्लभ ‘इंडियन जायंट फ्लाइंग गिलहरी’ (Giant Flying Squirrel) का रेस्क्यू कर दस्तावेजीकरण किया गया।

इंडियन जायंट फ्लाइंग गिलहरी (Indian Giant Flying Squirrel) के बारे मे:

  • वैज्ञानिक नाम व परिवार: इस विशिष्ट स्तनधारी जीव का वैज्ञानिक नाम पेटौरिस्टा फिलिपेंसिस (Petaurista philippensis) है, जो ‘स्कियुरिडी’ (Sciuridae) परिवार के अंतर्गत आता है। 
  • नाम का भ्रम: नाम में ‘फ्लाइंग’ (उड़ने वाली) शब्द होने के बावजूद, यह पक्षियों की तरह वास्तविक उड़ान नहीं भर सकती, बल्कि यह केवल हवा में तैर (Glide) सकती है।
  • आकार और रंग: इसकी लंबाई लगभग 43 से 45 सेमी होती है और इसकी घनी, लंबी पूंछ 50 से 60 सेमी तक हो सकती है। इनका शरीर आमतौर पर गहरा लाल, भूरा या मलाईदार रंग का होता है। इनकी आंखें बड़ी और गोल होती हैं।
    • इसकी पूंछ इसके शरीर से लंबी और घनी होती है, जो हवा में तैरते समय पतवार (Rudder) की तरह काम करती है और इसे संतुलन बनाने में मदद करती है।
  • पैटैजियम झिल्ली (Patagium): इसके आगे और पीछे के पैरों के बीच त्वचा की एक विशेष कूटनीतिक लचीली झिल्ली होती है, जिसे ‘पैटैजियम’ कहा जाता है।
    • जब यह ऊंचे पेड़ों से छलांग लगाती है, तो यह झिल्ली एक पैराशूट की तरह फैल जाती है, जिससे यह 60 से 80 मीटर तक की दूरी आसानी से तय कर लेती है। 
  • आवास: यह मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती तथा सदाबहार वनों (Dry Deciduous and Evergreen Forests) में रहना पसंद करती है।
    • यह अपना पूरा जीवन ऊंचे पेड़ों की शाखाओं और उनकी कैनोपी (Canopy Cover) पर बिताती है और जमीन पर बहुत कम उतरती है। 
    • पेड़ों के प्राकृतिक खोखले तने (Tree Cavities) इसके सबसे सुरक्षित घोंसले होते हैं। 
  • व्यवहार: यह पूरी तरह से एक रात्रिचर (Nocturnal) जीव है, जो दिन के समय पेड़ों के कोटरों में सोती है और सूर्यास्त के बाद भोजन की तलाश में सक्रिय होती है। 
  • आहार सम्बन्धी आदतें: ये मुख्य रूप से पेड़ों की पत्तियां, जंगली फल (जैसे अंजीर), मेवे, छाल, और कीड़े-मकोड़े खाते हैं। यह वनों में बीजों के प्रसार (Seed Dispersal) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 
  • IUCN रेड लिस्ट: इसे वर्तमान में ‘कम चिंताजनक’ (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: यह भारत में कानूनी रूप से अनुसूची-2 (Schedule II) के तहत अत्यधिक संरक्षित जीवों में शामिल है। 
  • खतरा: मानव हस्तक्षेप, अंधाधुंध पेड़ों की कटाई और शिकार इसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़े खतरे हैं।

भारत में पाई जाने वाली गिलहरी की अन्य प्रमुख प्रजातियां:

  • भारतीय विशाल गिलहरी (Indian Giant Squirrel): इसे मालाबार जायंट स्क्विरल (Ratufa indica) भी कहा जाता है, जो अपने चमकीले बहु-रंगीन फर के लिए प्रसिद्ध है और महाराष्ट्र का राजकीय पशु है।
  • ऊनी उड़ने वाली गिलहरी (Woolly Flying Squirrel): वैज्ञानिक रूप से Eupetaurus cinereus के नाम से जानी जाने वाली यह प्रजाति दुनिया की सबसे भारी उड़ने वाली गिलहरी है, जिसे उत्तराखंड के गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में देखा गया है।
  • नामदफा उड़ने वाली गिलहरी (Namdapha Flying Squirrel): यह केवल अरुणाचल प्रदेश के नामदफा क्षेत्र में पाई जाने वाली एक ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ (Critically Endangered) प्रजाति है।
  • रेड जायंट फ्लाइंग गिलहरी (Red Giant Flying Squirrel): यह प्रजाति (Petaurista petaurista) मुख्य रूप से हिमालयी बेल्ट में उच्च ऊंचाई (1,800 मीटर से ऊपर) वाले जंगलों में पाई जाती है।

FAQs:

Q1. इंडियन जायंट फ्लाइंग गिलहरी क्या है?

Ans: यह पैरों के बीच मौजूद पेटागियम त्वचा की झिल्ली से हवा में ग्लाइड करने वाली भारत की एक अनूठी स्तनधारी रात्रिचर गिलहरी है।

Q2. यह दुर्लभ प्रजाति कहां देखी गई?

Ans: यह दुर्लभ प्रजाति हाल ही में उत्तराखंड राज्य के कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे रामनगर वन क्षेत्र के एक ग्रामीण के घर में देखी गई है। 

Q3. 12 साल बाद इसके दिखने का क्या महत्व है?

Ans: इसका पुनः दिखाई देना रामनगर के वनों की स्वस्थ कैनोपी, समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के अनुकूल सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण का वैज्ञानिक प्रमाण है। 

Q4. यह प्रजाति किन क्षेत्रों में पाई जाती है?

Ans: यह मुख्य रूप से दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया के शुष्क पर्णपाती, अर्ध-सदाबहार और उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों के उच्च पर्वतीय वृक्ष क्षेत्रों में पाई जाती है।

Q5. इसके संरक्षण के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

Ans: वन विभाग द्वारा इसके प्राकृतिक हैबिटेट संरक्षण, पेड़ों की कटाई पर रोक, स्वास्थ्य परीक्षण आधारित सुरक्षित पुनर्वास और आधिकारिक कूटनीतिक दस्तावेजीकरण किया जा रहा है।।

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