स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम TARA

संदर्भ:
हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना (IAF) ने ओडिशा के तट पर भारत के पहले स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम TARA (Tactical Advanced Range Augmentation) का सफलतापूर्वक पहला उड़ान परीक्षण (Maiden Flight Trial) किया।
TARA ग्लाइड वेपन सिस्टम के बारे में:
- परिभाषा (Concept): TARA एक मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट है। यह हवाई जहाज से गिराए जाने वाले पारंपरिक ‘अनगाइडेड’ (बिना दिशा-निर्देश वाले) बमों को अत्यधिक सटीक ‘प्रिसिजन गाइडेड’ हथियारों में बदल देता है।
- विकासकर्ता: इसे मुख्य रूप से हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) द्वारा अन्य DRDO प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित किया गया है।
- प्रिसिजन और गाइडिंग: इसमें GPS-इनेबल्ड इनर्शियल नेविगेशन और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल टारगेटिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है। यह लगभग 3 मीटर के सर्कुलर एरर प्रोबेबिलिटी (CEP) के साथ लक्ष्य को भेदने में सक्षम है, जो इसे इजरायली SPICE सिस्टम के समान प्रभावी बनाता है।
- मारक क्षमता और रेंज: विशेषज्ञों के अनुसार, यह बमों की रेंज को 50 से 70 किलोमीटर तक बढ़ा देता है, जिससे लड़ाकू विमान दुश्मन की एयर डिफेंस रेंज से बाहर (Stand-off Distance) रहकर हमला कर सकते हैं। कुछ उन्नत परीक्षणों में इसकी रेंज 150-180 किलोमीटर तक होने का अनुमान है।
- लागत प्रभावशीलता: यह प्रणाली अत्याधुनिक होते हुए भी “लो-कॉस्ट” तकनीक पर आधारित है, जिससे बड़े पैमाने पर पारंपरिक स्टॉक को आधुनिक बनाना किफायती हो जाता है।
- प्लेटफॉर्म एकीकरण: इसे सुखोई Su-30 MKI, जगुआर, मिराज 2000 और स्वदेशी तेजस जैसे प्रमुख लड़ाकू विमानों के साथ एकीकृत किया जा सकता है।
महत्व:
- स्टैंड-ऑफ क्षमता: TARA के उपयोग से पायलट को दुश्मन के इलाके में प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे विमान और पायलट की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- पुराने शस्त्रागार का आधुनिकीकरण: भारत के पास मौजूद हजारों टन ‘डंब बम’ (Dumb Bombs) को इस किट की मदद से स्मार्ट बमों में बदला जा सकता है, जो संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग है।
- स्वदेशी विनिर्माण (Atmanirbhar Bharat): इस परियोजना में निजी क्षेत्र के DcPP (Development-cum-Production Partners) की भागीदारी भारत के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करती है।
- प्रतिस्पर्धा: इस तकनीक में सफलता प्राप्त करके भारत उन गिनी चुने देशों की श्रेणी में शामिल हो चुका है जिनके पास स्वदेशी ग्लाइड बम तकनीक है।