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सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन नियम 2026 (Information Technology Amendment Rules 2026) | UPSC Preparation

Information Technology Amendment Rules 2026

Information Technology Amendment Rules 2026

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जो 20 फरवरी 2026 से प्रभावित होंगे। ये नियम मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए बनाए गए हैं।

आईटी संशोधन नियम, 2026 की प्रमुख विशेषताएं:

  • सिंथेटिक कंटेंट’ (Synthetic Content) की कानूनी परिभाषा: ​पहली बार भारतीय कानून में “सिंथेटिकली जनरेटेड इन्फॉर्मेशन” (SGI) को परिभाषित किया गया है।

  • ​इसमें ऐसी ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल सामग्री शामिल है जो एल्गोरिदम या एआई के माध्यम से बनाई या बदली गई है और जो देखने में बिल्कुल असली या प्रामाणिक लगती है।
  • अपवाद: सामान्य एडिटिंग, रंग सुधार (Color Correction), शैक्षिक कार्य और सही इरादे से किए गए शोध कार्यों को इस परिभाषा से बाहर रखा गया है।
  •  सामग्री हटाने की समयसीमा में कटौती: ​सरकार ने ‘कंटेंट टेकडाउन’ की समयसीमा को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है:

  • अदालती या सरकारी आदेश: पहले 36 घंटे की सीमा थी, जिसे घटाकर अब मात्र 3 घंटे कर दिया गया है।
  • गैर-सहमति वाली अश्लील सामग्री (NCII) और डीपफेक: ऐसी सामग्री को शिकायत मिलने के 2 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा (पहले 24 घंटे)।
  • अन्य शिकायतें: मानहानि या अन्य कानूनी उल्लंघन की शिकायतों का निपटारा अब 72 घंटे के बजाय 36 घंटे में करना होगा।
  • ​अनिवार्य लेबलिंग और मेटाडेटा (Labelling & Metadata): ​पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘डिजिटल फिंगरप्रिंट’ अनिवार्य किए गए हैं:

  • प्रमुखता से लेबलिंग: एआई द्वारा बनाई गई हर सामग्री पर स्पष्ट लेबल होना चाहिए ताकि उपयोगकर्ता पहचान सके कि यह असली नहीं है।
  • स्थायी मेटाडेटा: प्लेटफॉर्म को सामग्री के साथ ‘प्रोवेनेंस’ (Provenance) डेटा जोड़ना होगा, जिससे यह पता चल सके कि इसे किस टूल से बनाया गया है। इसे हटाया या छुपाया नहीं जा सकेगा।

महत्व:

  • मध्यवर्ती जवाबदेही: इन नियमों के तहत, यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि) 3 घंटे के भीतर अवैध सामग्री नहीं हटाता या एआई लेबलिंग में विफल रहता है, तो वह ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) संरक्षण खो देगा। यानी उस प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ता द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कंपनी को कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।  
  • डिजिटल नागरिक के अधिकारों की रक्षा: (अनुच्छेद 21) डीपफेक और निजी जानकारी के तेजी से प्रसार को रोककर यह नियम नागरिकों की निजता और गरिमा के मौलिक अधिकार को मजबूत करते हैं।  
  • नए कानूनों के साथ सामंजस्य: इन नियमों में भारतीय दंड संहिता (IPC) के संदर्भों को बदलकर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के साथ जोड़ा गया है। यह डिजिटल अपराधों की जाँच और सजा की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है।
  • वैश्विक एआई शासन: इन संशोधनों के साथ भारत अब यूरोपीय संघ (EU AI Act) और चीन जैसे देशों के सामन एआई के जोखिमों को विनियमित करने के लिए सक्रिय कानून बना रहे हैं। यह ‘ग्लोबल साउथ’ में एआई गवर्नेंस के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

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