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कलमकारी पेंटिंग

कलमकारी पेंटिंग

Kalamkari Painting

संदर्भ:

हाल ही में, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान वहां के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को आंध्र प्रदेश की पारंपरिक हस्तनिर्मित कलमकारी पेंटिंग (Kalamkari Painting) उपहार में भेंट की। 

कलमकारी पेंटिंग (Kalamkari Painting) के बारे में:

  • परिचय: ‘कलमकारी’ शब्द की उत्पत्ति दो फारसी शब्दों से हुई है: ‘कलम’ (अर्थात पेन) और ‘कारी’ (अर्थात शिल्प कौशल या काम)। सूती या रेशमी कपड़े पर बांस या मोम की विशेष कलम का उपयोग करके प्राकृतिक रंगों से की जाने वाली चित्रकारी को ही कलमकारी पेंटिंग (Kalamkari Painting) कहा जाता है।
    • यह एक विख्यात हस्तनिर्मित वस्त्र कला (Hand Painted Textile Art) है, जिसमें किसी भी प्रकार के सिंथेटिक या रासायनिक रंगों का प्रयोग वर्जित होता है।
  • शुरुआत (Origin): इस पारंपरिक भारतीय कला (Traditional Indian Art) की मुख्य जड़ें भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में गहराई से जुड़ी हैं, जिसके कारण इसे आंध्र प्रदेश कला (Andhra Pradesh Art) के रूप में भी जाना जाता है।
    • प्राचीन काल में, इस लोक कला (Folk Art) का विकास उन संगीतकारों, गायकों और चित्रकारों के माध्यम से हुआ जो एक गांव से दूसरे गांव घूमकर महाकाव्यों की कहानियां सुनाते थे। उन्होंने अपनी कथाओं को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए कपड़े पर बड़े-बड़े चित्र बनाना शुरू किया। 
    • बाद में, मध्यकाल में गोलकुंडा के सुल्तानों और विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने इस कलमकारी शिल्प (Kalamkari Craft) को राजकीय संरक्षण प्रदान किया, जिससे इसका रूप अत्यधिक परिष्कृत हुआ। 
    • कलमकारी महाभारत और रामायण स्क्रॉल इसके सबसे बड़े उदाहरण आंध्र प्रदेश के मंदिरों में लटकने वाले विशाल पर्दे (Temple Hangings) हैं, जिनमें महाकाव्यों के दृश्यों को बेहद बारीकी से दर्शाया गया है।

उपयोग होने वाली तकनीकें:

भारत में मुख्य रूप से कलमकारी की दो विशिष्ट तकनीकी शैलियां प्रचलित हैं, जो कपड़ा तैयार करने की विभिन्न विधाओं पर काम करती हैं: 

  • श्रीकालहस्ती शैली (Srikalahasti Style): इस तकनीक में किसी ब्लॉक का उपयोग नहीं होता है। कलाकार सीधे बांस की बनी कलम (Kalam) का उपयोग करके मुक्तहस्त से डिजाइन की रूपरेखा तैयार करते हैं और फिर उनमें रंग भरते हैं। यह शैली पूरी तरह से मंदिरों के प्रभाव में विकसित हुई, इसलिए इसमें धार्मिक विषयों को तरजीह दी जाती है।
  • मछलीपटनम शैली (Machilipatnam Style): इसे पेडाना कलमकारी भी कहा जाता है। इस तकनीक में कलाकृतियों की मुख्य रूपरेखा और जटिल बारीक डिज़ाइनों को लकड़ी के हाथ से तराशे गए ब्लॉकों (Wooden Blocks) के माध्यम से कपड़े पर मुद्रित (ब्लॉक प्रिंट) किया जाता है। बाद में इसके विवरणों को कलम से पूरा किया जाता है।

प्रमुख सामग्रियां:

  • आधार सामग्री: केवल शुद्ध सूती (कॉटन) या रेशमी (सिल्क) कपड़ा।
  • प्राकृतिक रंग (Natural Dyes): काले रंग के लिए गुड़ और लोहे के टुकड़ों का मिश्रण; पीले रंग के लिए अनार के छिलके और हल्दी; नीले रंग के लिए इंडिगो (नील); और लाल रंग के लिए मजीठ (मडैडर) की जड़ का उपयोग किया जाता है।
  • ट्रीटमेंट सामग्री: कपड़े को ब्लीच करने और रंगों को स्थायी (Mordanting) बनाने के लिए भैंस के दूध, माईरोबालन (हरड़) के फल के रस और फिटकरी का घोल उपयोग में लाया जाता है।
  • उपकरण: बांस की लकड़ी को नुकीला काटकर और उसके ऊपर ऊन या धागा लपेटकर बनाई गई विशेष पारंपरिक कलम। 

प्रमुख विशेषताएं:

  • पर्यावरण अनुकूल: इस प्राकृतिक डाई पेंटिंग (Natural Dye Painting) की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें कपड़ा तैयार करने से लेकर अंतिम रूप देने तक 23 कठिन प्राकृतिक चरणों का पालन किया जाता है।
    • इसमें ब्लीचिंग, नदी के बहते पानी में बार-बार धुलाई और धूप में सुखाना शामिल है। 
  • समय के साथ चमक बढ़ना: रासायनिक पेंटिंग्स के विपरीत, असली कलमकारी की यह विशेषता है कि जैसे-जैसे यह पुरानी होती जाती है, इसके प्राकृतिक रंगों की सघनता और चमक और अधिक निखर कर सामने आती है।
  • कथानक डिज़ाइन: इन चित्रों में केवल मुख्य पात्र ही नहीं, बल्कि पूरी पृष्ठभूमि को बहुत बारीक बेल-बूटियों, मोरों, और फूलों के आकर्षक नमूनों से ढका जाता है, जिससे कोई भी स्थान रिक्त नहीं बचता।
  • संबंधित कलाएं: गुजरात की ‘माता नी पछेड़ी’ कला भी कलमकारी से काफी मिलती-जुलती है, जिसे गुजरात की कलमकारी कहा जाता है। इसके अलावा, राजस्थान की ‘फड़ पेंटिंग’ और ओडिशा की ‘पट्टचित्र’ कला भी कपड़े पर पौराणिक कथाओं को उकेरने की समकालीन और संबंधित भारतीय हस्तशिल्प (Indian Handicrafts) विधाएं हैं।

FAQs:

प्रश्न 1: कलमकारी पेंटिंग क्या है?

उत्तर: यह सूती या रेशमी कपड़े पर बांस की कलम और प्राकृतिक वनस्पतियों से बने रंगों द्वारा की जाने वाली एक हस्तनिर्मित कला है। 

प्रश्न 2: कलमकारी कला की शुरुआत कहाँ हुई?

उत्तर: इस प्राचीन लोक कला की शुरुआत मुख्य रूप से भारत के आंध्र प्रदेश राज्य के श्रीकालहस्ती और मछलीपटनम क्षेत्रों में हुई थी। 

प्रश्न 3: इसमें कौन-कौन सी तकनीकें उपयोग होती हैं?

उत्तर: इसमें मुख्य रूप से दो तकनीकें उपयोग होती हैं—मुक्तहस्त हस्तचित्रण (श्रीकालहस्ती शैली) और लकड़ी के ठप्पों से छपाई (मछलीपटनम शैली)।

प्रश्न 4: कलमकारी पेंटिंग क्यों प्रसिद्ध है?

उत्तर: यह अपनी जटिल हस्तशिल्प कलात्मकता, पूर्णतः जैविक व प्राकृतिक रंगों के उपयोग तथा हिंदू महाकाव्यों के सजीव चित्रण के लिए प्रसिद्ध है। 

प्रश्न 5: इसका सांस्कृतिक महत्व क्या है?

उत्तर: यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है तथा सदियों पुरानी ऐतिहासिक कथाओं एवं ग्रामीण शिल्प कौशल को जीवंत बनाए रखती है।टाबेस से मिलान कर परिणाम दिखाता है।है।

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