कर्नाटक मासिक धर्म अवकाश नीति | Karnataka Menstrual Leave Policy

हाल ही में, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सभी क्षेत्रों में मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) नीति को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने एक होटल कर्मचारी की याचिका पर दिया।
नीति के मुख्य पहलू:
- सवैतनिक अवकाश (Paid Leave): प्रत्येक महिला कर्मचारी को प्रति माह 1 दिन का सवैतनिक अवकाश मिलेगा, जो वर्ष में अधिकतम 12 दिन होगा।
- पात्रता: यह नीति 18 से 52 वर्ष की आयु के बीच की सभी स्थायी, संविदात्मक (contractual) और आउटसोर्स महिला कर्मचारियों पर लागू है।
- व्याप्ति (Scope): कर्नाटक इस नीति को सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों (IT, MNCs, गारमेंट फैक्ट्रियां आदि) में अनिवार्य रूप से लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह असंगठित क्षेत्रों पर भी लागू होता है।
- शर्तें:
- अवकाश के लिए किसी मेडिकल सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है।
- यह अवकाश कैरी फॉरवर्ड (जमा) नहीं किया जा सकता; इसका उपयोग उसी महीने में करना अनिवार्य है।
- कुछ प्रावधानों के अनुसार, महिलाएं सुविधा अनुसार इसे संचित (accumulated) रूप में भी ले सकती हैं, लेकिन यह नियोक्ताओं के लिए अनिवार्य मासिक दिशा-निर्देशों के अधीन है।
कानूनी और विधायी स्थिति:
- न्यायालय का रुख: कोर्ट ने इसे अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन) के तहत महिलाओं का अधिकार माना है। अनुच्छेद 14 (समानता) के तहत कोर्ट ने कहा कि जैविक भिन्नताओं को स्वीकार करना समानता का उल्लंघन नहीं, बल्कि उसे “सार्थक” बनाना है।
- विधेयक (Bill): ‘कर्नाटक मासिक धर्म अवकाश और स्वच्छता विधेयक, 2025’ अभी प्रक्रिया में है। जब तक यह कानून नहीं बन जाता, तब तक नवंबर 2025 की सरकारी अधिसूचना (GO No. KAI 466 LET 2023) संबंधी नीति प्रभावी रहेगी।
पक्ष और विपक्ष में तर्क:
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पक्ष |
विपक्ष |
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जैविक वास्तविकता: 90% महिलाएं दर्द (dysmenorrhea) का अनुभव करती हैं, जिससे कार्यक्षमता प्रभावित होती है। |
रोजगार में भेदभाव: अनिवार्य अवकाश से नियोक्ता महिलाओं को काम पर रखने से बच सकते हैं (Hiring Bias)। |
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समावेशिता: यह नीति कार्यस्थल को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित और संवेदनशील बनाती है। |
रूढ़िवादिता: इससे यह धारणा पुख्ता हो सकती है कि महिलाएं जैविक रूप से पुरुषों से “कम सक्षम” हैं। |
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स्टिग्मा कम करना: मासिक धर्म को सामान्य स्वास्थ्य मुद्दे के रूप में पहचान दिलाना। |
कार्यान्वयन की चुनौती: विशेषकर MSMEs और असंगठित क्षेत्र के लिए आर्थिक बोझ। |
अन्य राज्यों में स्थिति:
- बिहार: बिहार भारत का पहला राज्य था जिसने 1992 में लालू प्रसाद यादव की सरकार के दौरान इस नीति को लागू किया। यहाँ सरकारी महिला कर्मचारियों को प्रति माह 2 दिन का विशेष सवैतनिक अवकाश मिलता है। यह अवकाश बिना किसी मेडिकल सर्टिफिकेट के लिया जा सकता है।
- केरल: केरल सरकार ने 2023 में अपने उच्च शिक्षा विभाग के तहत सभी राज्य विश्वविद्यालयों की छात्राओं के लिए मासिक धर्म अवकाश की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, छात्राओं के लिए अनिवार्य अटेंडेंस (Attendance) की सीमा को 75% से घटाकर 73% कर दिया गया है।
- ओडिशा: अगस्त 2024 में ओडिशा सरकार ने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की महिला कर्मचारियों के लिए 1 दिन का सवैतनिक अवकाश देने की नीति लागू की है। कर्मचारी इसे मासिक धर्म के पहले या दूसरे दिन अपनी सुविधा अनुसार ले सकती हैं।