मेघालय की आधिकारिक राज्य भाषाएं खासी और गारो | Khasi and Garo official state languages of Meghalaya

संदर्भ:
हाल ही में मेघालय कैबिनेट ने ‘मेघालय आधिकारिक भाषा अध्यादेश, 2026’ को मंजूरी दी, जिससे अब, अंग्रेजी के साथ-साथ खासी (Khasi) और गारो (Garo) को राज्य की आधिकारिक भाषाओं का दर्जा प्राप्त हो गया है। मेघालय की इन दो प्रमुख स्वदेशी जनजातियों (खासी और गारो) की लंबी मांग के बाद यह फैसला आया है।
मेघालय आधिकारिक भाषा अध्यादेश, 2026 के मुख्य बिंदु:
- त्रिभाषी व्यवस्था: अब से खासी (Khasi) और गारो (Garo) भाषाओं को अंग्रेजी के साथ राज्य की आधिकारिक भाषाओं के रूप में मान्यता दी गई है। यह अध्यादेश इन दोनों स्वदेशी भाषाओं को प्रशासनिक और सरकारी कामकाज में अंग्रेजी के समान स्तर पर लाता है।
- 2005 के अधिनियम का निरसन: इस अध्यादेश के माध्यम से ‘मेघालय राज्य भाषा अधिनियम, 2005’ को पूरी तरह से निरस्त (Repeal) कर दिया गया है।
- विधायिका अधिनियम में संशोधन: ‘मेघालय राज्य विधायिका (अंग्रेजी भाषा की निरंतरता) अधिनियम, 1980’ में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे ताकि विधायक विधानसभा सत्रों के दौरान खासी और गारो में बोल और बहस कर सकें।
- डिजिटल एकीकरण: डिजिटल इंडिया ‘भाषणी’ (Bhashini) डिवीजन के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं ताकि इन भाषाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जा सके।
- कार्यान्वयन प्रक्रिया: हालांकि अध्यादेश स्वीकृत हो गया है, लेकिन इसका पूर्ण कार्यान्वयन क्रमिक रूप से होगा क्योंकि इसके लिए तकनीकी शब्दावली और अनुवादकों जैसे बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी।
प्रभाव:
- सरकारी संचार: अब सरकारी सूचनाएं, राजपत्र (Gazette) और आधिकारिक आदेश अंग्रेजी के साथ-साथ खासी और गारो में भी जारी किए जाएंगे।
- प्रतियोगी परीक्षाएं: यह निर्णय राज्य स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी खासी और गारो भाषाओं के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे।
- आठवीं अनुसूची हेतु दबाव: मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य द्वारा इन भाषाओं को आधिकारिक दर्जा देना केंद्र सरकार को एक मजबूत संदेश भेजेगा ताकि इन्हें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को मजबूती मिले।
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मेघालय की प्रमुख स्वदेशी भाषाएँ:
गारो भाषा (Garo Language):
तुलना:
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