लद्दाख के सभी सात जिलों में स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद के गठन का निर्णय
संदर्भ:
हाल ही में लद्दाख प्रशासन ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को सशक्त करने हेतु केंद्र शासित प्रदेश के सभी सात जिलों में ‘स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद’ [Ladakh Hill Development Council] के गठन का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
निर्णय के मुख्य बिंदु:
- प्रशासनिक ढाँचे का पूर्ण विस्तार: यह ऐतिहासिक निर्णय अप्रैल 2026 में घोषित पाँच नए जिलों—नुब्रा, चांगथांग, शाम, ज़ांस्कर और द्रास के निर्माण के बाद लिया गया है।
- अब पुराने दो जिलों (लेह और कारगिल) के साथ-साथ सभी सात जिलों में पूर्ण निर्वाचित परिषदें कार्य करेंगी।
- संवैधानिक सुरक्षा (Article 371 Framework): स्थानीय जनजातीय संस्कृति, भूमि और रोजगार की सुरक्षा के लिए सरकार संविधान के अनुच्छेद 371 के अंतर्गत एक विशेष ‘सुई जेनेरिस’ (Sui Generis) विशिष्ट मॉडल लागू करने पर विचार कर रही है।
- त्रि-स्तरीय शासी संरचना (Three-Tier Body): लद्दाख के सातों जिलों की स्थानीय स्वायत्त परिषदों [Autonomous Council Ladakh] के ऊपर एक शीर्ष ‘केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय निकाय’ (UT-Level Body) स्थापित करने का प्रस्ताव है। इस शीर्ष निकाय के पास विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां होंगी।
- स्थानीय सुदृढ़ीकरण (Local Governance): नई व्यवस्था के तहत लद्दाख में 17 नई तहसीलें बनाई गई हैं, जिससे कुल तहसीलों की संख्या 15 से बढ़कर 32 हो गई है।
- साथ ही लोक निर्माण (PWD) और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHE) के नए प्रभाग स्थापित किए गए हैं।
- पंचायती राज के साथ सह-अस्तित्व: यह निर्णय पारंपरिक त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को समाप्त नहीं करेगा, बल्कि यह दोनों प्रणालियाँ समानांतर रूप से ग्राम और जिला स्तर पर काम करेंगी।
स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (Ladakh Hill Development Council) के बारे में:
- कानूनी आधार (Legal Framework): यह परिषद लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (LAHDC) अधिनियम के तहत जिला स्तर पर गठित एक कानूनी और निर्वाचित निकाय है।
- ऐतिहासिक निरंतरता: इस मॉडल की शुरुआत सबसे पहले वर्ष 1995 में लेह और वर्ष 2003 में कारगिल में हुई थी, जिसका अब पूरे केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख [Union Territory Ladakh] में विस्तार किया जा रहा है।
- भूमि हस्तांतरण अधिकार (Land Allotment): परिषद को अपने भौगोलिक अधिकार क्षेत्र के भीतर भूमि के स्वामित्व, उपयोग और आवंटन को विनियमित करने का सीधा संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
- स्थानीय रोजगार पर नियंत्रण: जिला कैडर के तहत सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं की भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों के निर्धारण का अधिकार परिषद के पास सुरक्षित रहेगा।
- वित्तीय संप्रभुता (Financial Autonomy): प्रत्येक जिले की अपनी पृथक ‘परिषद निधि’ (Council Fund) होगी। परिषदों को स्थानीय स्तर पर कर (Taxes) और शुल्क लगाने का अधिकार होगा।
- योजना निर्माण की स्वतंत्रता (Regional Development): विकास कार्यों के लिए अब इन जिलों को लेह या कारगिल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा; वे अपनी वार्षिक बजट योजनाएं खुद तैयार करेंगे।
- सामाजिक-सांस्कृतिक संरक्षण: परिषद के मुख्य कार्यों में लद्दाख की विशिष्ट जनजातीय पहचान, भाषाओं, बौद्ध-शिया सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरण का संरक्षण करना शामिल है।
- नागरिक सेवाओं का प्रबंधन: प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य केंद्र, पर्यटन अवसंरचना, स्थानीय बाजार और कृषि-बागवानी का वास्तविक प्रशासनिक नियंत्रण परिषद के अधीन होता है।
- रणनीतिक महत्व (Geopolitical Importance): चीन और पाकिस्तान की सीमाओं (LAC & LOC) से सटे इन दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों [Ladakh News] में सशक्त स्थानीय स्वशासन देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को मजबूत करता है।
FAQs:
Q1. लद्दाख में स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद क्या है?
Ans: यह लद्दाख में जिला स्तर की निर्वाचित स्थानीय शासी निकाय [Hill Council] है, जो विकासात्मक अधिकार संभालती है।
Q2. सभी सात जिलों में परिषद बनाने का उद्देश्य क्या है?
Ans: इसका मुख्य उद्देश्य दूरस्थ हिमालयी क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और जमीनी शासन को सुदृढ़ करना है।
Q3. इससे स्थानीय प्रशासन को क्या लाभ होगा?
Ans: इससे प्रशासनिक सुविधा बढ़ेगी, सरकारी सेवाएँ सीधे जनता तक पहुँचेंगी और क्षेत्रीय विकास संतुलित होगा।
Q4. परिषद के क्या अधिकार होंगे?
Ans: परिषद के पास जिला स्तर पर भूमि आवंटन, बजट निर्माण, स्थानीय टैक्स और नौकरियों में भर्ती के अधिकार होंगे।
Q5. यह निर्णय क्यों लिया गया?
Ans: पाँच नए जिलों के निर्माण और स्थानीय जनता की कूटनीतिक-सांस्कृतिक सुरक्षा की माँगों के कारण यह निर्णय लिया गया।
