Member of Parliament Local Area Development Scheme
संदर्भ:
हाल ही में राजस्थान के तीन सांसदों पर अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर अन्य राज्यों (हरियाणा) में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के आवंटित निधि का उपयोग करने के आरोप लगाए गए हैं।
MPLADS योजना के बारे मे:
- योजना: सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) भारत सरकार की एक केंद्रीय योजना है। इसके तहत प्रत्येक सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों (पेयजल, शिक्षा, स्वच्छता, आदि) के लिए प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपये का बजट अनुशंसित करने का अधिकार है।
- उद्देश्य: स्थानीय स्तर पर महसूस की गई जरूरतों के आधार पर टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों (जैसे- सड़कें, पुल, स्कूल भवन) का निर्माण करना।
- प्रारंभ: 23 दिसंबर 1993 को पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार द्वारा।
- नोडल मंत्रालय: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)।
- निधि: प्रत्येक सांसद को वार्षिक ₹5 करोड़ मिलते हैं, जो ₹2.5 करोड़ की दो किस्तों में सीधे जिला अधिकारियों को जारी किए जाते हैं।
- प्रकृति: यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, इसकी निधि गैर-व्यपगत (Non-lapsable) होती है।
- अनिवार्य आवंटन: कुल निधि का 15% अनुसूचित जाति (SC) और 7.5% अनुसूचित जनजाति (ST) बहुल क्षेत्रों के लिए अनिवार्य है।
- संवैधानिक वैधता (Bhim Singh Case, 2010): सर्वोच्च न्यायालय ने ‘भीम सिंह बनाम भारत संघ’ मामले में योजना को वैध माना है।
योजना के संदर्भ में आलोचनात्मक मुद्दे:
- शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) का उल्लंघन: भारतीय संविधान के तहत कानून बनाना विधायिका का काम है और उन्हें लागू करना कार्यपालिका का। आलोचकों और द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) का तर्क है कि सांसदों को कार्यकारी कार्यों (परियोजना चयन) में शामिल करना इस सिद्धांत को कमजोर करता है।
- संघवाद (Federalism) की चुनौती: स्थानीय निकाय (पंचायतें/नगर पालिकाएं) राज्य सूची के विषय हैं। MPLADS के माध्यम से केंद्र का हस्तक्षेप स्थानीय स्वशासन की स्वायत्तता पर अतिक्रमण माना जाता है।
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की टिप्पणियाँ: CAG ने अपनी विभिन्न रिपोर्टों में वित्तीय कुप्रबंधन, उपयोग न की गई भारी राशि, और निजी ट्रस्टों को धन के अवैध हस्तांतरण जैसे गंभीर दोष पाए हैं।
- जवाबदेही का अभाव: अक्सर यह देखा गया है कि धन का उपयोग चुनावी लाभ के लिए ‘ठेकेदार-सांसद’ गठजोड़ को लाभ पहुंचाने हेतु किया जाता है।

