बिहार की प्रसिद्ध “Mithila Makhana”
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने पहली बार बिहार से 18 मीट्रिक टन जीआई-टैग प्राप्त मिथिला मखाना (Mithila Makhana) का समुद्री मार्ग के जरिए ऑस्ट्रेलिया को सफल निर्यात किया।
मिथिला मखाना (Mithila Makhana) के बारे में:
- परिचय: यह बिहार के मिथिला क्षेत्र में उगाया जाने वाला कांटेदार जल लिली (Euryale Ferox) का एक अत्यंत पौष्टिक जलीय बीज (Fox Nuts) है।
- यह कांटेदार कमल (Prickly Water Lily) के पौधे का एक सूखा खाद्य बीज है, जिसे अंग्रेजी में फॉक्स नट्स (Fox Nuts) या ‘लोटस सीड’ (Lotus Seed) कहा जाता है।
- इसके काले और भूरे रंग के छोटे बीजों को विशेष प्रसंस्करण द्वारा सफेद मखाने में बदला जाता है, जिसके कारण इसे ‘ब्लैक डायमंड’ (Black Diamond) भी कहा जाता है।
- वैज्ञानिक नाम: इसका आधिकारिक वानस्पतिक नाम यूरिएल फेरॉक्स (Euryale Ferox) है। यह मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जलवायु वाले शांत व स्थिर जल निकायों (Stagnant Water Bodies) में उगाया जाता है।
- जीआई टैग: अगस्त 2022 में भारत सरकार द्वारा ‘मिथिलांचल मखाना उत्पादक संघ’ के नाम पर मखाना जीआई टैग (Makhana GI Tag) पंजीकृत किया गया था।
- खासियत: यह एक सुपरफूड (Superfood) है जो प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फास्फोरस, आयरन और कैल्शियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) से भरपूर होता है।
- इसमें कोलेस्ट्रॉल, वसा और सोडियम की मात्रा बहुत कम होती है, जो इसे हृदय रोग और मधुमेह के रोगियों के लिए अत्यधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाती है।
- मुख्य उत्पादक क्षेत्र: बिहार भारत के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्पादित करता है।
- बिहार के मिथिला क्षेत्र (Mithila Region) के अंतर्गत दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, कटिहार और पूर्णिया इसके प्रमुख केंद्र हैं।
- ऑस्ट्रेलिया निर्यात:
- मात्रा और पैकेजिंग: इस ऐतिहासिक खेप में कुल 18 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाला मखाना शामिल था, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 7 विशेष कंटेनरों में पैक किया गया था।
- स्रोतीकरण (Sourcing): इस प्रीमियम गुणवत्ता वाले कच्चे मखाने को सीधे दरभंगा जिले के स्थानीय किसानों से अधिप्राप्त (Procure) किया गया था।
- प्रसंस्करण अवसंरचना (Processing Infrastructure): इस खेप को पटना के पास स्थित बिहटा (Bihta) औद्योगिक क्षेत्र के एकीकृत विकिरण सह पैकहाउस इकाई (Integrated Unit of Irradiation-cum-Packhouse) से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
- परिवहन मार्ग (Logistics Route): इस कार्गो को पहले बिहटा अंतर्देशीय शुष्क बंदरगाह (Inland Dry Port) से रेल द्वारा कोलकाता बंदरगाह भेजा गया, और वहां से समुद्री मार्ग द्वारा ऑस्ट्रेलिया भेजा गया।
- नोडल संस्थाएं:
- एपेडा (APEDA): केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने इस निर्यात के लिए प्रशासनिक और रसद सहायता प्रदान की।
- बिहार सरकार: बिहार के कृषि विभाग और बागवानी निदेशालय ने स्थानीय स्टार्टअप (जैसे NIAD Green) के साथ मिलकर मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ किया है।
- समर्पित एचएस कोड (HS Code): वाणिज्य मंत्रालय ने व्यापार डेटा की सटीक ट्रैकिंग और पारदर्शिता के लिए जुलाई 2025 से मखाना उत्पादों के लिए एक अलग ‘हार्मोनाइज्ड सिस्टम’ (HS) कोड लागू किया है, जिससे वैश्विक सुगम हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: मिथिला मखाना क्या है?
उत्तर: यह बिहार के मिथिला क्षेत्र में उगाया जाने वाला कांटेदार जल लिली (Euryale Ferox) का एक अत्यंत पौष्टिक जलीय बीज (Fox Nuts) है।
प्रश्न 2: मिथिला मखाना किस राज्य से संबंधित है?
उत्तर: यह मुख्य रूप से बिहार राज्य (Bihar Famous Makhana) से संबंधित है, जो भारत के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 85% हिस्सा उत्पादित करता है।
प्रश्न 3: मिथिला मखाना को GI Tag कब मिला?
उत्तर: भारत सरकार के भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा मिथिला मखाना को वर्ष 2022 में आधिकारिक तौर पर जीआई टैग (GI Tag) प्रदान किया गया था।
प्रश्न 4: मखाना को अंग्रेजी में क्या कहा जाता है?
उत्तर: मखाना को अंग्रेजी भाषा में मुख्य रूप से फॉक्स नट्स (Fox Nuts) या ‘लोटस सीड्स’ (Lotus Seeds) के नाम से जाना जाता है।
प्रश्न 5: मिथिला मखाना की खासियत क्या है?
उत्तर: यह औषधीय गुणों से भरपूर एक सुपरफूड है, जिसमें उच्च प्रोटीन, प्रचुर मात्रा में फाइबर, कम वसा तथा मैग्नीशियम व कैल्शियम जैसे आवश्यक खनिज पाए जाते हैं।प से आम जनता द्वारा स्वतःस्फूर्त और युवा भूमिगत नेताओं द्वारा संचालित किया गया था।
