Mons Mouton region of the Moon
संदर्भ:
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने महत्वाकांक्षी चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) मिशन के लिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित मॉन्स मूटन (Mons Mouton) के पास एक सुरक्षित लैंडिंग स्थल की पहचान कर ली है।
मॉन्स माउटन (Mons Mouton) का चयन:
इसरो के ‘स्पेस एप्लीकेशन सेंटर’ (SAC) के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर हाई रेजोल्यूशन कैमरा (OHRC) से प्राप्त 32 सेमी प्रति पिक्सेल वाली तस्वीरों का विश्लेषण किया। अध्ययन में मॉन्स माउटन क्षेत्र के चार स्थलों (MM-1, MM-3, MM-4, और MM-5) की तुलना की गई, जिसमें MM-4 को सबसे उपयुक्त पाया गया।
MM-4 साइट की भौगोलिक विशेषताएं:
- अवस्थिति: यह साइट 84.289° दक्षिण अक्षांश और 32.808° पूर्व देशांतर पर स्थित है।
- ऊंचाई और ढाल: मॉन्स माउटन लगभग 6,000 मीटर ऊंचा एक पहाड़ है, जिसकी चोटी अपेक्षाकृत सपाट है। MM-4 क्षेत्र में औसत ढलान (Slope) मात्र 5 डिग्री है, जो लैंडर के स्थायित्व के लिए आदर्श है।
- सुरक्षित ग्रिड: वैज्ञानिकों ने यहाँ 24 मीटर × 24 मीटर के 568 सुरक्षित ग्रिड की पहचान की है, जहां बड़े बोल्डर (पत्थर) और गहरे क्रेटर (गड्ढे) कम हैं।
- प्रकाश और संचार: इस क्षेत्र में सूर्य की रोशनी लंबे समय तक उपलब्ध रहती है (सौर पैनलों के लिए) और पृथ्वी के साथ निर्बाध रेडियो संचार (Communication) संभव है।
- जल-बर्फ (Water Ice): यह क्षेत्र ‘स्थायी रूप से छायांकित क्षेत्रों’ (PSRs) के करीब है, जहाँ प्रचुर मात्रा में जल-बर्फ और वाष्पशील पदार्थों के मिलने की संभावना है।
चंद्रयान-4 मिशन का परिचय:
- उद्देश्य: चंद्रयान-4 भारत का पहला ‘लूनर सैंपल रिटर्न मिशन’ है। इसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करना, वहां से मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र करना और उन्हें सुरक्षित रूप से वापस पृथ्वी पर लाना है।
- मिशन की जटिलता: यह मिशन चंद्रयान-3 से कहीं अधिक जटिल है क्योंकि इसमें अंतरिक्ष में डॉकिंग (Docking), अन-डॉकिंग और पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश (Re-entry) जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं।
- रॉकेट: इस मिशन के लिए दो अलग-अलग लॉन्च (LVM-3 और PSLV) का उपयोग किया जाएगा क्योंकि पेलोड का कुल वजन बहुत अधिक होगा।
- बजट और समयसीमा: केंद्र सरकार ने इसके लिए ₹2,104 करोड़ की मंजूरी दी है और इसे वर्ष 2028 तक लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
- मॉड्यूल: चंद्रयान-4 एक बहु-मॉड्यूल मिशन है, जिसमें कुल पांच मॉड्यूल शामिल होंगे। इस मिशन को दो अलग-अलग लॉन्च (LVM-3 और PSLV) के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है:
- प्रोपल्शन मॉड्यूल (Propulsion Module): मिशन को चंद्रमा की कक्षा तक ले जाएगा।
- डिसेंडर मॉड्यूल (Descender Module): यह चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा (चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर की तरह)।
- असेंडर मॉड्यूल (Ascender Module): नमूने एकत्र करने के बाद, यह मॉड्यूल चंद्रमा की सतह से उड़ान भरेगा और कक्षा में मौजूद मॉड्यूल से जुड़ेगा।
- ट्रांसफर मॉड्यूल (Transfer Module): यह नमूनों को असेंडर मॉड्यूल से लेकर पृथ्वी की ओर यात्रा शुरू करेगा।
- री-एंट्री मॉड्यूल (Re-entry Module): यह कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और नमूनों को सुरक्षित रूप से भारतीय भूमि पर उतारेगा।
महत्व:
- भविष्य के मानव मिशन: चंद्रयान-4 की सफलता 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय मानव को भेजने के विजन के लिए ‘प्रौद्योगिकी प्रदर्शक’ (Technology Demonstrator) का कार्य करेगी।
- वैश्विक प्रभुत्व: इस मिशन की सफलता भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद चंद्रमा से नमूने लाने वाला दुनिया का चौथा देश बना देगी।

