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NASA का Nancy Grace Roman Space Telescope, अंतरिक्ष में खोजेगा ‘दूसरी दुनिया’

NASA का Nancy Grace Roman Space Telescope, अंतरिक्ष में खोजेगा ‘दूसरी दुनिया’

NASA Nancy Grace Roman Space Telescope

संदर्भ:

हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने अंतरिक्ष में ‘दूसरी दुनिया’ की खोज करने के लिए नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप (Nancy Grace Roman Space Telescope) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया।

Nancy Grace Roman Space Telescope के बारे में:

  • परिचय: नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप नासा की अगली पीढ़ी की अत्याधुनिक अवरक्त अंतरिक्ष दूरबीन (Infrared Space Telescope) है। पूर्व में इसे ‘वाइड-फील्ड इन्फ्रारेड सर्वे टेलीस्कोप’ (WFIRST) के नाम से जाना जाता था। 
  • नामकरण: इस टेलीस्कोप का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री डॉ. नैंसी ग्रेस रोमन के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें ‘हबल स्पेस टेलीस्कोप की जननी’ (Mother of the Hubble Space Telescope) कहा जाता है। 
  • पृष्ठभूमि: इस वेधशाला का मुख्य ढांचा (Mirror Assembly) मूल रूप से अमेरिकी खुफिया समुदाय (NRO) द्वारा एक शक्तिशाली जासूसी उपग्रह (Spy Satellite) के लिए बनाया गया था। उस जासूसी कार्यक्रम के बंद होने के बाद, वर्ष 2012 में इसे नासा को दान कर दिया गया, जिसे वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांडीय खोज के लिए पुनर्चक्रित (Repurposed) किया। 
  • निर्माणकर्ता: इसे नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर (Goddard Space Flight Center) द्वारा प्रमुख रूप से विकसित किया गया है।
  • सहयोग: इस ऐतिहासिक मिशन में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थान महत्वपूर्ण तकनीकी भागीदार हैं।
  • लागत और समय: इस भव्य वेधशाला को तैयार करने में लगभग $4 बिलियन (लगभग 33,500 करोड़ रुपये) की भारी वित्तीय लागत आई है। इसे डिजाइन और निर्मित करने में वैज्ञानिकों को एक दशक से अधिक का समय लगा है। 
  • NASA Roman Telescope Launch:
    • लॉन्च तिथि: इस ऐतिहासिक वेधशाला को 30 अगस्त 2026 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। 
    • प्रक्षेपण स्थल: फ्लोरिडा (USA) में स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर का लॉन्च कॉम्प्लेक्स-39A। 
    • प्रक्षेपण यान (Rocket): इसे निजी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) के शक्तिशाली रॉकेट फाल्कन हैवी (Falcon Heavy) के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा गया। 
    • गंतव्य कक्षा (Target Orbit): यह पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर सूर्य-पृथ्वी के लारेंज प्वाइंट-2 (L2) कक्षा की ओर अग्रसर है, जहाँ पहले से जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) कार्यरत है। यहाँ पहुँचने में इसे 90 दिन का समय लगेगा। 
  • विशेषताएं:
  • विशाल दृश्य क्षेत्र (Wide Field of View): इस टेलीस्कोप का प्राथमिक दर्पण (Primary Mirror) 2.4 मीटर चौड़ा है (हबल के समान)। लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका दृश्य क्षेत्र हबल टेलीस्कोप से 100 गुना अधिक विशाल है। यह हबल की तुलना में 1,000 गुना तेजी से आकाश का सर्वेक्षण कर सकता है। 
  • प्रमुख उपकरण (Scientific Payloads):
    • वाइड फील्ड इंस्ट्रूमेंट (WFI): यह 300-मेगापिक्सल का एक विशाल नियर-इन्फ्रारेड कैमरा है, जो एक ही शॉट में अरबों सितारों और आकाशगंगाओं के विस्तृत पैनोरमा चित्र खींचने में सक्षम है।
    • कोरोनोग्राफ इंस्ट्रूमेंट (CGI): यह एक अत्यधिक उन्नत प्रकाश-अवरोधक उपकरण है, जो चमकीले तारों की चकाचौंध को रोककर उनके पीछे छिपे धुंधले ग्रहों को सीधे देखने (Direct Imaging) में मदद करता है। 

प्रमुख लक्ष्य:

नैंसी ग्रेस रोमन स्पेस टेलीस्कोप मिशन (Roman Space Telescope Mission) के तीन मुख्य वैज्ञानिक लक्ष्य हैं, जो खगोल भौतिकी की समझ को पूरी तरह बदल देंगे:

  • ‘दूसरी दुनिया’ (Second Earth & Exoplanets) की खोज: यह टेलीस्कोप हमारी आकाशगंगा (Milky Way) में हजारों नए बाह्यग्रहों (Exoplanets) की खोज करेगा। इसके लिए यह मुख्य रूप से दो तकनीकों का उपयोग करेगा:
    • गुरुत्वाकर्षण माइक्रोलेंसिंग (Gravitational Microlensing): जब कोई ग्रह किसी दूरस्थ तारे के सामने से गुजरता है, तो उसका गुरुत्वाकर्षण प्रकाश को मोड़ देता है। रोमन टेलीस्कोप इस सूक्ष्म झुकाव को पकड़कर ऐसे पथरीले ग्रहों को खोजेगा जो अपने तारे के ‘रहने योग्य क्षेत्र’ (Habitable Zone) में हैं, जिन्हें ‘दूसरा अर्थ’ (Second Earth) कहा जा सके।
    • सीधी इमेजिंग (Direct Imaging): अपने कोरोनोग्राफ के जरिए यह ग्रहों के वायुमंडल का विश्लेषण करेगा ताकि वहाँ जीवन के अनुकूल गैसों (जैसे ऑक्सीजन, जल वाष्प) की उपस्थिति का पता लगाया जा सके।
  • डार्क एनर्जी पर अनुसंधान (Research on Dark Energy): ब्रह्मांड का लगभग 68% हिस्सा डार्क एनर्जी से बना है, जो इसके त्वरित विस्तार (Accelerating Expansion) के लिए जिम्मेदार है। रोमन टेलीस्कोप अंतरिक्ष के विशाल त्रिविमीय (3D) नक्शे तैयार करेगा और अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित सुपरनोवा (Supernovae) का अध्ययन करके यह मापेगा कि समय के साथ ब्रह्मांड के फैलने की गति कैसे बदली है।
  • डार्क मैटर को समझना (Understanding Dark Matter): ब्रह्मांड का लगभग 27% हिस्सा अदृश्य डार्क मैटर से बना है, जिसे सीधे देखा नहीं जा सकता। यह टेलीस्कोप ‘कमजोर गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग’ (Weak Gravitational Lensing) का उपयोग करेगा। जब दूर की आकाशगंगाओं का प्रकाश डार्क मैटर के अदृश्य बादलों से होकर गुजरेगा, तो उसमें आने वाली सूक्ष्म विकृतियों का अध्ययन करके वैज्ञानिक डार्क मैटर के वितरण का सटीक नक्शा बना सकेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Nancy Grace Roman Space Telescope क्या है?

उत्तर: यह नासा द्वारा लॉन्च की गई अगली पीढ़ी की अवरक्त वेधशाला (NASA Space Telescope) है, जो ब्रह्मांड का व्यापक और तीव्र सर्वेक्षण करेगी।

प्रश्न 2: NASA का Roman Space Telescope कब Launch हुआ?

उत्तर: इस अत्याधुनिक टेलीस्कोप को 30 अगस्त 2026 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया है।

प्रश्न 3: Nancy Grace Roman Telescope को किस वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है?

उत्तर: यह नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री डॉ. नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर है, जिन्हें ‘हबल टेलीस्कोप की जननी’ कहा जाता है।

प्रश्न 4: Roman Space Telescope का मुख्य Mission क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य मिशन डार्क एनर्जी, डार्क मैटर के रहस्यों को सुलझाना और सौरमंडल के बाहर हजारों नए ग्रहों (Exoplanets) की खोज करना है।

प्रश्न 5: क्या Roman Space Telescope ‘Second Earth’ की खोज कर सकता है?

उत्तर: हाँ, अपने उन्नत कोरोनोग्राफ के जरिए यह पृथ्वी जैसे रहने योग्य बाह्यग्रहों की खोज और उनके वायुमंडल का सीधा विश्लेषण करने में सक्षम है।

प्रश्न 6: Roman Telescope Exoplanets की खोज कैसे करेगा?

उत्तर: यह तारों के प्रकाश में आने वाले गुरुत्वाकर्षण विक्षेपण (माइक्रोलेंसिंग) और कोरोनोग्राफ तकनीक द्वारा तारों की चकाचौंध को रोककर ग्रहों की खोज करेगा। 

प्रश्न 7: NASA Roman Space Telescope Dark Energy पर Research कैसे करेगा?

उत्तर: यह अरबों आकाशगंगाओं और सुपरनोवा की दूरी तथा गति का सटीक मापन करके ब्रह्मांड के त्वरित विस्तार की दर की गणना करेगा।

प्रश्न 8: Roman Space Telescope Dark Matter को समझने में कैसे मदद करेगा?

उत्तर: यह अदृश्य डार्क मैटर के कारण सुदूर आकाशगंगाओं से आने वाले प्रकाश में होने वाले गुरुत्वाकर्षण झुकाव (लेंसिंग) का 3D मानचित्र तैयार करेगा।।

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