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Semicon 2.0 Scheme India- सरकार ने ₹1.27 लाख करोड़ की सेमीकॉन 2.0 योजना अधिसूचित की, चिप मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा

Semicon 2.0 Scheme India- सरकार ने ₹1.27 लाख करोड़ की सेमीकॉन 2.0 योजना अधिसूचित की, चिप मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा

Semicon 2.0 Scheme India

संदर्भ:

हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा देश भर में चिप विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Chip Manufacturing Ecosystem) को मजबूत करने के लिए ₹1,27,500 करोड़ की वित्तीय लागत वाले सेमीकॉन 2.0 योजना (Semicon 2.0 Scheme India) को अधिसूचित किया गया।

सेमीकॉन 2.0 योजना (Semicon 2.0 Scheme) के बारे में:

  • परिचय: यह भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जो देश में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Semiconductor Fabrication), असेंबली, परीक्षण, चिप डिजाइन और कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को एक साथ जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करता है.
    • यह योजना पूर्ववर्ती सेमीकॉन 1.0 (जिसका बजट ₹76,000 करोड़ था) की सफलताओं को आगे बढ़ाते हुए भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का एक अनिवार्य हिस्सा बनाने पर केंद्रित है.
  • कैबिनेट मंजूरी: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस योजना को 15 जुलाई 2026 को मंजूरी दी गई थी.
  • आधिकारिक अधिसूचना: नीतिगत रूपरेखा को 31 अगस्त 2026 को अधिसूचित किया गया.
  • आवेदन खिड़की: कंपनियों के लिए आवेदन करने की प्रारंभिक अवधि 3 वर्ष तय की गई है.
  • परियोजना अवधि: इसके तहत स्वीकृत परियोजनाओं के कार्यान्वयन और परिचालन की अवधि 6 वर्ष तक होगी. 
  • वित्तीय आवंटन: इस योजना के लिए कुल समर्पित राजकोषीय आवंटन ₹1,27,500 करोड़ (₹1.27 Lakh Crore) निर्धारित किया गया है.
  • मंत्रालय: यह योजना इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित है.
  • नोडल एजेंसी: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission – ISM) इसकी मुख्य कार्यान्वयन और निगरानी संस्था है.
  • तकनीकी सहयोगी: उन्नत चिप डिजाइन और तैनाती श्रेणियों के क्रियान्वयन में प्रगत संगणन विकास केंद्र (C-DAC) सहायता प्रदान करेगा. 
  • मुख्य स्तंभ: सेमीकॉन 2.0 को व्यापक विकास के लिए 6 प्रमुख स्तंभों और 10 उप-श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
  • चिप डिजाइन (Chip Design): भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देकर घरेलू बौद्धिक संपदा (IP) निर्माण को प्राथमिकता देना.
  • सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Semiconductor Fabs): वाणिज्यिक सिलिकॉन-आधारित फैब्रिकेशन प्लांट स्थापित करने वाली वैश्विक और घरेलू फर्मों को सब्सिडी. 
  • उन्नत पैकेजिंग (Advanced Packaging/OSAT): असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग सुविधाओं का नेटवर्क बढ़ाना. 
  • उपकरण और सामग्री (Equipment and Materials): सेमीकंडक्टर निर्माण में प्रयुक्त होने वाली गैसों, रसायनों और विशेष मशीनरी के घरेलू उत्पादन को सब्सिडी देना. 
  • अनुसंधान एवं विकास (Research & Development): अत्याधुनिक तकनीकों पर अकादमिक और औद्योगिक अनुसंधान को बढ़ावा.
  • प्रतिभा विकास (Talent Development): भारतीय कार्यबल को सेमीकंडक्टर क्षेत्र के अनुकूल उच्च कौशल से लैस करना. 
  • वित्तीय प्रोत्साहन: पात्र विनिर्माण परियोजनाओं को उनकी स्वीकृत परियोजना लागत का 50% तक राजकोषीय समर्थन (Fiscal Support) प्रदान किया जाएगा.
  • पात्रता का दायरा: पूर्ववर्ती योजना के विपरीत, सेमीकॉन 2.0 में पात्रता का विस्तार करते हुए स्टार्टअप्स, एमएसएमई (MSMEs), उपकरण निर्माताओं, अनुसंधान निकायों और प्रशिक्षण संस्थानों को भी शामिल किया गया है.
  • वाणिज्यिक डिजाइन पात्रता: डिजाइन ट्रैक के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए स्टार्टअप्स या कंपनियों का स्वामित्व अनिवार्य रूप से भारतीय नागरिकों या ओसीआई (OCI) कार्डधारकों के पास होना चाहिए. 

भारत के लिए सेमीकॉन 2.0 का महत्व:

  • आर्थिक संप्रभुता और आयात निर्भरता में कमी: भारत वर्तमान में अपनी जरूरत के लगभग सभी सेमीकंडक्टर आयात करता है. घरेलू स्तर पर चिप विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Chip Manufacturing Ecosystem) विकसित होने से विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी और देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा.
  • वैश्विक मूल्य श्रृंखला में हिस्सेदारी: इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले वर्षों में वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में भारत की हिस्सेदारी 10% तक पहुँचने की उम्मीद है, जिससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक प्रमुख केंद्र बन जाएगा.
  • रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा: आधुनिक फाइटर जेट, रक्षा प्रणालियों, दूरसंचार नेटवर्क (5G/6G) और ऑटोमोबाइल में चिप्स का उपयोग होता है. भू-राजनीतिक तनावों के बीच सुरक्षित और स्वतंत्र घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य है.
  • उच्च तकनीक वाले रोजगार का सृजन: मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, इस योजना से देश में 50,000 से 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार (Direct Jobs) और इससे कई गुना अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन होगा.
  • घरेलू नवाचार और बौद्धिक संपदा: तीन स्तंभों को विशेष रूप से चिप डिजाइन के लिए समर्पित करके, यह योजना भारत को केवल असेंबली हब बनाने के बजाय अपनी खुद की ‘भारतीय चिप्स और आईपी’ विकसित करने के योग्य बनाएगी.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Semicon 2.0 Scheme क्या है?

उत्तर: यह भारत सरकार का दूसरा चरणबद्ध कार्यक्रम (Semicon India Programme) है, जो देश के भीतर चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग, उपकरण और कच्चे माल के उत्पादन को राजकोषीय सहायता प्रदान करता है.

प्रश्न 2: सरकार ने Semicon 2.0 के लिए कितने करोड़ रुपये मंजूर किए हैं?

उत्तर: केंद्र सरकार ने इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए कुल ₹1,27,500 करोड़ का विशाल बजट स्वीकृत किया है.

प्रश्न 3: ₹1.27 लाख करोड़ की Semicon 2.0 योजना का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में भारत की निर्भरता कम करना, घरेलू नवाचार को बढ़ावा देना और भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है. 

प्रश्न 4: Semicon 2.0 से भारत के Chip Manufacturing Ecosystem को कैसे बढ़ावा मिलेगा?

उत्तर: यह योजना विनिर्माण इकाइयों को 50% वित्तीय सब्सिडी देने के साथ-साथ एमएसएमई, स्टार्टअप्स और उपकरण निर्माताओं को शामिल कर मूल्य श्रृंखला के सभी 10 क्षेत्रों को मजबूत करेगी. 

प्रश्न 5: India Semiconductor Mission 2.0 के तहत किन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा?

उत्तर: इसके तहत सिलिकॉन फैब्स, डिस्प्ले फैब्स, चिप डिजाइनिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स, उन्नत पैकेजिंग (OSAT), और आवश्यक विनिर्माण उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन पर ध्यान दिया जाएगा. 

प्रश्न 6: Semiconductor Manufacturing भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने, उच्च तकनीक रोजगार पैदा करने और राष्ट्रीय साइबर-रणनीतिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक है.करेगा।।

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