(National Household Survey 2024 Report) राष्ट्रीय घरेलू सर्वेक्षण 2024 रिपोर्ट

संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय कपड़ा मंत्री द्वारा “Market for Textiles & Clothing: National Household Survey 2024” नामक रिपोर्ट जारी की गई है। यह रिपोर्ट कपड़ा समिति (Textiles Committee) द्वारा तैयार की गई है और नीति निर्माताओं व उद्योग जगत के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज़ है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:
- बाजार का आकार और विकास: भारत के कपड़ा बाजार का कुल आकार 2010 के ₹4.89 लाख करोड़ से बढ़कर 2024 में ₹14.95 लाख करोड़ हो गया है, जो 8.3% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है।
- इसमें से घरेलू बाजार का हिस्सा ₹12.02 लाख करोड़ है, जिसमें घरेलू मांग (Household Demand) का योगदान ₹8.77 लाख करोड़ है।
- प्रति व्यक्ति मांग में वृद्धि: प्रति व्यक्ति कपड़ा मांग 2010 के ₹2,119 से बढ़कर 2024 में ₹6,066 हो गई है। यह भारतीयों की बढ़ती आय और बदलती जीवनशैली का परिचायक है。
- फाइबर के आधार पर मांग का वितरण:
- मैन-मेड फाइबर (MMF) और मिश्रित फाइबर: 52.2% हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे हैं।
- कपास (Cotton): 41.2% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है।
- रेशम और ऊन: क्रमशः 5.2% और 1.3% का योगदान देते हैं।
- महिला उपभोक्ताओं का दबदबा: कुल कपड़ा खरीद में महिलाओं का योगदान 55.5% है, जबकि पुरुषों का योगदान 44.5% है। साड़ियाँ, सलवार कमीज और लेगिंग्स महिलाओं के पसंदीदा उत्पाद रहे हैं।
- सतत वस्त्र (Sustainable Textiles) और चक्रीय अर्थव्यवस्था: रिपोर्ट के अनुसार, टिकाऊ वस्त्रों की मांग बढ़कर ₹37,000 करोड़ हो गई है। इसमें से 58% मांग ‘पुन: उपयोग’ (Reused/Retailored) कपड़ों की है, जो भारत में सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
- तकनीकी वस्त्र (Technical Textiles): मास्क, सेनेटरी नैपकिन और मेडिकल डिस्पोजेबल्स जैसे तकनीकी वस्त्रों की मांग में भारी वृद्धि हुई है। विशेष रूप से, ग्रामीण परिवार तकनीकी वस्त्रों की कुल खपत का 58% हिस्सा उपभोग कर रहे हैं।
- क्षेत्रीय विकास: ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मांग का पैटर्न संतुलित हो रहा है, जो समावेशी विकास (Inclusive Growth) के लिए सकारात्मक संकेत है।
भारत का वस्त्र एवं परिधान बाजार परिदृश्य:
- अर्थव्यवस्था में योगदान: भारत का कपड़ा बाजार लगभग $165 बिलियन का है। यह जीडीपी में 2% और औद्योगिक उत्पादन (IIP) में 7% का योगदान देता है।
- रोजगार: यह कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है, जो 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है।
- निर्यात: वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4% है। वर्ष 2023-24 में कपड़ा और परिधान का निर्यात करीब $35 बिलियन रहा।
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प्रमुख सरकारी पहलें: सरकार ने 2030 तक $350 बिलियन के बाजार और $100 बिलियन के निर्यात का लक्ष्य रखा है। इसे प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित योजनाएं सक्रिय हैं:
- PM MITRA पार्क: सात राज्यों में एकीकृत ‘मेगा टेक्सटाइल पार्क’ स्थापित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य लॉजिस्टिक लागत को कम करना और विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा प्रदान करना है।
- PLI स्कीम (उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन): मैन-मेड फाइबर (MMF) और तकनीकी वस्त्रों (Technical Textiles) के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹10,683 करोड़ का आवंटन किया गया है।
- SAMARTH योजना: कपड़ा क्षेत्र में कौशल विकास के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम, जिसके तहत लाखों कारीगरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
- राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM): अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत को तकनीकी वस्त्रों (जैसे मेडिकल, जियो, और एग्रो-टेक्स्टाइल्स) में वैश्विक लीडर बनाना।
- कपास अर्थव्यवस्था (Kasturi Cotton): भारतीय कपास को एक वैश्विक ब्रांड ‘कस्तूरी कॉटन इंडिया’ के रूप में स्थापित करना ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर मूल्य मिल सके।