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राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस | National Panchayati Raj Day

National Panchayati Raj Day

संदर्भ:

भारत में 24 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (NPRD) मनाया गया, जो 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 के लागू होने की 33वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। 

2026 की मुख्य विशेषताएं:

  • विषय (Theme): वर्ष 2026 के समारोह का आधिकारिक विषय (Theme) “सशक्त पंचायत, सर्वांगीण विकास” (Empowered Panchayats, Holistic Development) है।
  • पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0: इस अवसर पर मंत्रालय द्वारा पंचायतों की प्रगति मापने के लिए PAI-2.0 रिपोर्ट जारी की गई।
  • ‘मेरी पंचायत मेरी धरोहर’ पहल: ग्रामीण विरासत को सहेजने हेतु त्रिपुरा, तिरुपति और उत्तरकाशी पर आधारित तीन सचित्र पुस्तकों का विमोचन किया गया।
  • राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2026: सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को ₹50 लाख से ₹5 करोड़ तक के वित्तीय प्रोत्साहन के साथ सम्मानित किया गया। प्रमुख श्रेणियों में ‘कार्बन न्यूट्रल’ और ‘100% डिजिटल साक्षरता’ वाले गाँव शामिल हैं। 

संवैधानिक ढांचा:

  • संवैधानिक स्थिति: 73वें संशोधन (1992) द्वारा संविधान में भाग IX और 11वीं अनुसूची जोड़ी गई।
  • त्रि-स्तरीय संरचना: ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर), पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर), और जिला परिषद (जिला स्तर)।
  • अनिवार्य प्रावधान:
    • आरक्षण: महिलाओं के लिए न्यूनतम 33% आरक्षण (21 राज्यों में अब 50% है) और SC/ST के लिए जनसंख्या अनुसार आरक्षण।
    • कार्यकाल: निश्चित 5 वर्ष का कार्यकाल; विघटन की स्थिति में 6 माह के भीतर चुनाव अनिवार्य।
    • राज्य चुनाव और वित्त आयोग: स्वतंत्र निकायों द्वारा निष्पक्ष चुनाव और वित्तीय अनुशंसाएं। 

डिजिटल शासन और आधुनिक पहल:

  • e-Gram Swaraj: वास्तविक समय में लेखांकन और कार्य निगरानी के लिए उपयोग किया जा रहा है।
  • SVAMITVA 2.0: ड्रोन-मैपिंग के माध्यम से ग्रामीण संपत्ति कार्ड वितरण ‘सैचुरेशन’ मोड में है, जिससे संपत्ति विवाद कम हुए हैं।
  • Gram Urja Swaraj: पंचायतों को नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर। 

चुनौतियां:

  • वित्तीय स्वायत्तता (Funds): पंचायतों का 80% राजस्व केंद्र सरकार के अनुदान पर निर्भर है, उनका अपना राजस्व स्रोत (OSR) केवल 1% के आसपास है।
  • कार्य और कार्यकर्ता (Functions & Functionaries): 11वीं अनुसूची के सभी 29 विषयों का पूर्ण हस्तांतरण अभी भी कई राज्यों में अधूरा है और प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।
  • सामाजिक मुद्दे: ‘पंचायत पति’ जैसे छद्म प्रतिनिधित्व को समाप्त करने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों (जैसे ‘पंचायत’ वेब सीरीज के साथ साझेदारी) को विस्तारित किया गया है।

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