नक्सल मुक्त भारत
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संदर्भ:
भारत सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक अभूतपूर्व और युगांतकारी सफलता अर्जित करते हुए 31 मार्च 2026 को भारत को पूर्णतः नक्सल मुक्त भारत (Naxal Free India) घोषित किया।
- लगभग छह दशकों (1967 से) तक देश के बड़े हिस्से को प्रभावित करने वाले वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) का केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों के एकीकृत विकास कूटनीति के चलते प्रभावी रूप से अंत हुआ।
नक्सल मुक्त भारत (Naxal Free India) अभियान की पृष्ठभूमि और क्रमिक विकास:
- उद्भव (1967): नक्सल की शुरुआत पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के ‘नक्सलबाड़ी’ गांव से एक सशस्त्र किसान विद्रोह के रूप में हुई थी। माओवादी विचारधारा से प्रेरित होकर यह ‘बंदूक की नोक से सत्ता’ हथियाने की कसम के साथ आगे बढ़ा।
- रेड कॉरिडोर का विस्तार (2004): वर्ष 2004 में विभिन्न चरमपंथी संगठनों के विलय से ‘भाकपा (माओवादी)’ का गठन हुआ। इसके बाद भारत का एक बहुत बड़ा भौगोलिक हिस्सा (पशुपति से तिरुपति तक) जिसे ‘रेड कॉरिडोर’ कहा जाता था, उग्रवाद की चपेट में आ गया।
- हिंसा का चरम (2010): वर्ष 2004 से 2014 का दशक सबसे हिंसक था। अकेले 2010 में रिकॉर्ड 1,936 हिंसक घटनाएं हुईं, जिनमें 720 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। वर्ष 2009 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसे देश की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती स्वीकार किया था।
- रणनीतिक बदलाव (2014-2026): वर्ष 2014 में वर्तमान सरकार के आने के बाद पुरानी खंडित नीतियों को बदलकर एक एकीकृत राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना (2015) को मंजूरी दी गई। 24 अगस्त 2024 को गृह मंत्रालय ने 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सल मुक्त करने का संकल्प लिया था, जिसे समय-सीमा के भीतर हासिल कर लिया गया।
उग्रवाद के सफाए हेतु सरकार की बहु-आयामी रणनीति:
गृह मंत्रालय (Home Ministry) के नेतृत्व में इस लड़ाई को केवल बंदूकों से नहीं, बल्कि तीन मुख्य स्तंभों — ‘विश्वास, निर्माण और जनकल्याण’ के माध्यम से लड़ा गया:
1. सुरक्षा ग्रिड और सामरिक प्रभुत्व (Vishwaas – Security Grid):
- सुरक्षा बलों (Security Forces) की भारी तैनाती: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और राज्य पुलिस की विशेष इकाइयों (जैसे छत्तीसगढ़ की डीआरजी, आंध्र प्रदेश के ग्रेहाउंड्स) के बीच अभूतपूर्व समन्वय स्थापित किया गया।
- फॉरवर्ड बेस का निर्माण: सुरक्षा के शून्य को भरने के लिए सुदूर जंगलों में 408 से अधिक नए सुरक्षा शिविर (Security Camps) स्थापित किए गए।
- फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन: पिछले एक दशक में 597 फोर्टिफाइड (मजबूत किलेबंदी वाले) पुलिस थानों का निर्माण किया गया, जिसके कारण हिंसा रिपोर्ट करने वाले थानों की संख्या 333 से घटकर लगभग शून्य पर आ गई।
- शीर्ष नेतृत्व का सफाया: ‘ट्रेस, टारगेट, न्यूट्रलाइज’ दृष्टिकोण के तहत बड़े नक्सली कमांडरों (जैसे हिदमा, बसवराजू) को ढेर या गिरफ्तार किया गया। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने टेरर फंडिंग और उनकी वित्तीय रीढ़ को पूरी तरह तोड़ दिया।
2. कनेक्टिविटी और भौतिक विकास (Nirman – Infrastructure):
- सड़कों का जाल: अलग-थलग पड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एलडब्ल्यूई प्रभावित क्षेत्रों (LWE Affected Areas) में 12,000 किलोमीटर से अधिक बारहमासी सड़कों का निर्माण किया गया।
- डिजिटल कनेक्टिविटी: नक्सलियों के संचार ब्लैकआउट वाले गढ़ों को भेदने के लिए जंगलों में 1,300 से अधिक मोबाइल टावर लगाए गए।
- आपातकालीन बुनियादी ढांचा: घायल सैनिकों की त्वरित निकासी और त्वरित सैन्य अभियानों के लिए सुदूर जंगलों में 68 नाइट-लैंडिंग हेलिपैड बनाए गए।
3. आत्मसमर्पण और समावेशी जनकल्याण (Jan Kalyan – Rehabilitation):
- पुनर्वास नीति: सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन, मुफ्त शिक्षा और रोजगार से सुसज्जित एक बेहद आकर्षक पुनर्वास नीति पेश की। इसके तहत पिछले एक दशक में 8,000 से अधिक नक्सलियों ने मुख्यधारा को चुना।
- नागरिक सेवा केंद्र: कई पूर्व सुरक्षा शिविरों को अब स्वास्थ्य, बैंकिंग, राशन वितरण और डाक सेवाओं जैसे नागरिक केंद्रों में बदल दिया गया है।
- सांस्कृतिक समावेशन: जनजातीय अस्मिता को सम्मान देने के लिए ‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे सांस्कृतिक आयोजन किए गए, जिससे राज्य के प्रति युवाओं का भरोसा बहाल हुआ।
आंकड़ों में ऐतिहासिक बदलाव:
| मानदंड | वर्ष 2010 / 2014 | वर्ष 2026 (वर्तमान स्थिति) |
| प्रभावित जिलों की संख्या | 126 जिले (2014) | शून्य (प्रभावी रूप से समाप्त) |
| तीव्र हिंसा वाले अति-प्रभावित जिले | 35 जिले | 0 जिले (बस्तर और अबूझमाड़ भी मुक्त) |
| वार्षिक हिंसक घटनाएं | 1,936 घटनाएं (2010) | 88% से अधिक की भारी गिरावट |
| नागरिक एवं सुरक्षा बल हताहत | 1,005 मौतें (2010) | 90% तक की ऐतिहासिक कमी |
नक्सल मुक्त भारत अभियान का महत्व:
- लोकतंत्र और संविधान की विजय: यह मील का पत्थर साबित करता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा के बल पर, चुनी हुई सरकार को चुनौती नहीं दी जा सकती।
- आर्थिक और औद्योगिक प्रगति: उग्रवाद के सफाए से अब खनिज समृद्ध क्षेत्रों (जैसे छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा) में सुरक्षित और निर्बाध औद्योगिक निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।
- जनजातीय अधिकारों की बहाली: दशकों से नक्सलियों के डर से वंचित रहे आदिवासी समुदायों को अब शिक्षा, स्वास्थ्य और पीएम-जनमन (PM-JANMAN) जैसी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी बाधा के मिल रहा है।
FAQs:
प्र.1: नक्सल मुक्त भारत अभियान क्या है?
यह भारत सरकार का एक एकीकृत सुरक्षा और विकास अभियान है, जिसने 31 मार्च 2026 की समय-सीमा में वामपंथी उग्रवाद को देश से समाप्त किया है।
प्र.2: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य देश से सशस्त्र माओवादी हिंसा को जड़ से मिटाना, प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी तंत्र को बहाल करना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।
प्र.3: भारत में नक्सल प्रभावित राज्य कौन-कौन से थे?
पूर्व में छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई जिले उग्रवाद के मुख्य केंद्र थे।
प्र.4: सरकार ने भारत में नक्सलवाद को कैसे समाप्त किया?
सरकार ने ‘विश्वास, निर्माण और जनकल्याण’ नीति के तहत सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई, सड़कों के जाल और आत्मसमर्पण नीति से इसे खत्म किया।
प्र.5: नक्सल मुक्त भारत अभियान का क्या महत्व है?
यह छह दशक की हिंसा को समाप्त कर सुदूर आदिवासियों को विकास की मुख्यधारा में लाता है और भारत की संप्रभुता को मजबूत करता है।
