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NDMA की आपदा पीड़ित पहचान और प्रबंधन संबंधी दिशा-निर्देश जारी (NDMA issues guidelines on disaster victim identification and management) | Apni Pathshala

NDMA issues guidelines on disaster victim identification and management

NDMA issues guidelines on disaster victim identification and management

संदर्भ:

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने हाल ही में “आपदा पीड़ित पहचान और प्रबंधन (Disaster Victim Identification – DVI)” पर भारत के पहले व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 

NDMA के DVI दिशानिर्देश:

  • आपदा पीड़ित पहचान (DVI) की चार-चरणीय प्रक्रिया: NDMA ने इंटरपोल (Interpol) के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक चार-चरणीय वैज्ञानिक प्रोटोकॉल निर्धारित किया है:
    • व्यवस्थित पुनर्प्राप्ति (Systematic Recovery): आपदा स्थल से मानव अवशेषों को सावधानीपूर्वक प्राप्त करना, उनकी मैपिंग करना और टैगिंग करना।
    • शव-परीक्षा डेटा संग्रह (Post-Mortem Data): मृतकों से फिंगरप्रिंट, डीएनए (DNA), दंत रिकॉर्ड (Dental Records) और शारीरिक निशानों (जैसे टैटू, चोट) का डेटा एकत्र करना।
    • पूर्व-मृत्यु डेटा संग्रह (Ante-Mortem Data): परिवारों से लापता व्यक्ति के चिकित्सा रिकॉर्ड, दंत इतिहास, और शारीरिक विवरण एकत्र करना।
    • मिलान और सामंजस्य (Reconciliation): वैज्ञानिक रूप से ‘शव-परीक्षा डेटा’ और ‘पूर्व-मृत्यु डेटा’ का मिलान करके पहचान की पुष्टि करना और अवशेषों को परिवार को सौंपना।
  • प्रमुख सिफारिशें: दिशानिर्देशों में कुछ क्रांतिकारी बदलाव और नई तकनीकों का सुझाव दिया गया है:
    • नेशनल डेंटल डेटा रजिस्ट्री (National Dental Data Registry): चूंकि दांत और जबड़े आग, विस्फोट और सड़न में भी सुरक्षित रहते हैं, इसलिए एक केंद्रीकृत डेटाबेस बनाने का प्रस्ताव है ताकि दंत रिकॉर्ड के माध्यम से पहचान आसान हो सके।
    • फॉरेंसिक पुरातत्व (Forensic Archaeology): भूस्खलन या ऐसी आपदाएं जहां शव महीनों या वर्षों तक दबे रह सकते हैं, वहां वैज्ञानिक उत्खनन और मिट्टी की परतों के अध्ययन के माध्यम से अवशेषों को खोजने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
    • ‘नो मास ऑटोप्सी’ (No Mass Autopsies): सामूहिक मृत्यु की स्थिति में हर शव का भौतिक पोस्टमार्टम आवश्यक नहीं है, यदि पहचान अन्य वैज्ञानिक तरीकों से संभव हो। यह प्रक्रिया मानवीय संवेदनशीलता और समय की बचत के लिए है।
    • मानवीय फॉरेंसिक (Humanitarian Forensics): प्रक्रिया को केवल कागजी न रखकर प्रभावित परिवारों को भावनात्मक समर्थन और परामर्श (Counselling) प्रदान करने पर जोर दिया गया है।

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