New orchid species named Diplocentrum papillosum discovered in Kerala
संदर्भ:
हाल ही में केरल के इडुक्की जिले में डिप्लोसेंट्रम पपिलोसम (Diplocentrum papillosum) नामक ऑर्किड की एक नई प्रजाति खोजी गई है। यह नई प्रजाति कांतल्लूर और मरायूर के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में पाई गई है।
डिप्लोसेंट्रम पपिलोसम के बारे में:
- नामकरण: इसका वैज्ञानिक नामकरण फूल की सतह पर मौजूद ‘पपिलोसे’ (छोटे उभारों जैसी बनावट) के कारण ‘पपिलोसम’ रखा गया है।
- वंश (Genus): यह Diplocentrum वंश से संबंधित है।
- स्थानिकता (Endemism): यह वंश विशेष रूप से दक्षिणी पश्चिमी घाट का स्थानिक है।
- पुष्प संरचना: इस ऑर्किड में बिना शाखाओं वाले फूलों के गुच्छे (unbranched flower clusters) होते हैं। इसके फूल गुलाबी और सफेद रंग के होते हैं।
- आवास अनुकूलन: यह प्रजाति लिथोफाइटिक (चट्टानों पर उगने वाली) और एपिफाइटिक (पेड़ों की शाखाओं पर उगने वाली) दोनों प्रकार की होती है।
- जड़ें: इसकी जड़ें बहुत मजबूत और विकसित होती हैं, जो इसे उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चलने वाली तेज हवाओं का सामना करने में मदद करती हैं।
- संकेतक प्रजाति: ऑर्किड को अक्सर ‘पारिस्थितिक स्वास्थ्य’ का संकेतक माना जाता है। इनकी उपस्थिति एक स्वस्थ और संतुलित वन पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक है।
संरक्षण की चुनौतियाँ:
- आवास विखंडन: कृषि विस्तार और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।
- जलवायु परिवर्तन: तापमान में बदलाव और वर्षा के पैटर्न में अनिश्चितता इन संवेदनशील प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट पैदा करती है।
- अवैध व्यापार: दुर्लभ ऑर्किड अक्सर अवैध शिकार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तस्करी का शिकार होते हैं।
नोट: भारत में ऑर्किड की 1,300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।

