NITI आयोग के टायर पायरोलिसिस ऑयल संबंधी नए राष्ट्रीय मानक

संदर्भ:
नीति आयोग (NITI Aayog) ने हाल ही में भारत के कचरा प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) को मजबूत करने के लिए ‘टायर पायरोलिसिस ऑयल’ (Tyre Pyrolysis Oil – TPO) और रिकवर्ड कार्बन ब्लैक के लिए नए राष्ट्रीय मानक प्रस्तावित किए हैं। प्रस्तावित नए राष्ट्रीय मानक:
नीति आयोग की रिपोर्ट “Enhancing Circular Economy of Waste Tyres in India” (जनवरी 2026) में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलावों का सुझाव दिया गया है:
- राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक: TPO के लिए विशिष्ट गुणवत्ता मानक तय करना ताकि इसे फर्नेस ऑयल या डीजल के विकल्प के रूप में सुरक्षित रूप से इस्तेमाल किया जा सके।
- GST में कटौती: रीसायकल किए गए टायर उत्पादों पर GST को 18% से घटाकर 5% करने का प्रस्ताव है, जिससे औपचारिक रीसायकलर्स को प्रोत्साहन मिले।
- पृथक HSN कोड: बेहतर ट्रैकिंग और आयात-निर्यात विनियमन के लिए TPO और रिकवर्ड कार्बन ब्लैक के लिए अलग HSN कोड की मांग की गई है।
- अनिवार्य प्रमाणन: विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) प्रमाणन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और ‘ऑडिटेबल’ बनाने का सुझाव दिया गया है।
तकनीकी और पर्यावरणीय नियम:
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने टायरों के पायरोलिसिस के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को कड़ा किया है:
- Advanced Batch Automated Process (ABAP): अब केवल 60 TPD (टन प्रतिदिन) तक की क्षमता वाली ABAP इकाइयों को ही अनुमति दी जाएगी।
- सतत संयंत्र (Continuous Plants): 60 TPD से अधिक क्षमता के लिए केवल ‘कंटीन्यूअस प्रोसेस’ वाले प्लांट ही मान्य होंगे।
- सुरक्षा मानक: इकाइयों में PLC आधारित नियंत्रण, गैस रिसाव अलार्म, नाइट्रोजन गैस पर्जिंग सिस्टम और ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) का होना अनिवार्य है।
महत्व:
- संसाधन सुरक्षा (Resource Security): भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है। TPO का औद्योगिक ईंधन के रूप में उपयोग आयात निर्भरता को कम कर सकता है।
- पर्यावरण संरक्षण: टायरों को खुले में जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकना और लैंडफिल के बोझ को कम करना।
- आर्थिक क्षमता: नीति आयोग के अनुसार, उचित मानकों के अभाव में वर्तमान में लगभग 7,500 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व हानि हो रही है।
- सर्कुलर इकोनॉमी: यह ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (Waste to Wealth) के सिद्धांत को मजबूती देता है। जो भारत की इकोनॉमी के लिए सकारात्मक प्रयास है।
चुनौतियां:
- असंगठित क्षेत्र: वर्तमान में टायर रीसाइक्लिंग का एक बड़ा हिस्सा अनौपचारिक ऑपरेटरों द्वारा किया जाता है, जहाँ पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी होती है।
- ट्रेसिबिलिटी (Traceability): पुराने टायरों के संग्रह और रीसाइक्लिंग चक्र की निगरानी करना एक कठिन कार्य है।
- प्रदूषण: यदि पायरोलिसिस प्रक्रिया सही तरीके से न हो, तो यह जहरीली गैसें और हानिकारक सूक्ष्म कार्बन कण छोड़ती है।
टायर पायरोलिसिस ऑयल (TPO):
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