Operation Southern Readiness 26-2: जानिए भारत के लिए इस अभ्यास के महत्व
संदर्भ:
रक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, भारतीय नौसेना 20 से 23 जुलाई 2026 तक कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान (SNC) में बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2’ (Operation Southern Readiness) का आयोजन करेगी।
अभ्यास ‘सदर्न रेडीनेस 26-2’ (Operation Southern Readiness 26-2) के बारे में:
- परिचय: यह संयुक्त समुद्री बलों (CMF) के तत्वावधान में आयोजित होने वाला एक बहुराष्ट्रीय सामरिक अभ्यास (Strategic Exercise) है।
- इसका प्राथमिक लक्ष्य भाग लेने वाले देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल, अंतःक्रियाशीलता (Interoperability) और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना है।
- यह एक गैर-आक्रामक और क्षमता निर्माण उन्मुख सैन्य अभ्यास (Military Exercise) है।
- आयोजन स्थल: इस संस्करण की मेजबानी भारतीय नौसेना द्वारा की जा रही है।
- यह अभ्यास 20 से 23 जुलाई 2026 तक केरल के कोच्चि में स्थित दक्षिणी नौसेना कमान (Southern Naval Command) में आयोजित किया जाएगा।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत नवंबर 2022 में बहरीन स्थित बहुराष्ट्रीय गठबंधन ‘कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेस’ (CMF) का पूर्ण सदस्य बना था।
- भारत की इस सदस्यता के बाद, राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) और पश्चिमी हिंद महासागर में नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से इस श्रृंखला की शुरुआत हुई थी।
- भागीदार देश: इस अभ्यास का नेतृत्व कंबाइंड टास्क फोर्स (CTF 152) और भारतीय नौसेना द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।
- इसमें भारत, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, सेशेल्स, इटली सहित CMF गठबंधन के प्रमुख सदस्य देशों के जहाजों, विमानों और विशेष सैन्य बलों (Special Forces) के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
- प्रमुख विषय और फोकस बिंदु:
- समुद्री डकैती रोधी अभियान (Anti-Piracy Operations): अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर में वाणिज्यिक जहाजों पर बढ़ते ड्रोन और समुद्री डकैती हमलों को विफल करने के लिए लाइव सुरक्षा ड्रिल (Security Drill) की जाएगी।
- दवाएं और तस्करी नियंत्रण (Counter-Narcotics): समुद्र के रास्ते होने वाली अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को सुदृढ़ करना।
- खोज एवं बचाव अभियान (Search and Rescue): आपदा के समय खुले समुद्र में त्वरित चिकित्सा सहायता और मानवीय संकट प्रबंधन का व्यावहारिक सशस्त्र बल प्रशिक्षण (Armed Forces Training) प्रदान करना।
- विज़िट, बोर्ड, सर्च एंड सीज़र (VBSS): संदिग्ध या शत्रुतापूर्ण जहाजों को समुद्र के बीच में रोकने और उनकी तलाशी लेने के लिए सामरिक कौशल का प्रदर्शन करना।
भारत के लिए इसका महत्व:
- समुद्री सुरक्षा प्रदाता की भूमिका (Net Security Provider): यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की वैश्विक छवि को एक विश्वसनीय और सक्षम ‘नेट सिक्योरिटी प्रदाता’ के रूप में मजबूत करता है।
- अंतरराष्ट्रीय नौसेनाओं के साथ अंतःक्रियाशीलता: इसके माध्यम से भारतीय नौसेना को अमेरिकी नौसेना और रॉयल नेवी जैसी आधुनिक सेनाओं के साथ जटिल परिचालन प्रक्रियाओं को एकीकृत करने का अवसर मिलता है।
- ‘सागर’ विज़न की प्राप्ति: यह अभ्यास भारत के ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो क्षेत्र में शांति और सहयोगात्मक सुरक्षा की वकालत करता है।
- रणनीतिक समुद्री चोक पॉइंट्स पर नियंत्रण: मल्लका जलडमरूमध्य से लेकर बाब-अल-मंडेब तक फैले वैश्विक व्यापारिक मार्गों (SLOCs) की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत की निवारक क्षमता बढ़ती है।
- संयुक्त समुद्री बल (CMF) में नेतृत्व: CMF के भीतर इस उच्च स्तरीय अभ्यास की मेजबानी कर भारत इस बहुराष्ट्रीय गठबंधन में अपनी रणनीतिक निर्णय लेने की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
- तकनीकी और सामरिक विनिमय: आधुनिक नौसैनिक तकनीकों, ड्रोन रोधी प्रणालियों और साइबर-सुरक्षा प्रोटोकॉल के आदान-प्रदान से भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता में सुधार होता है।
FAQs:
Q.1. ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 क्या है?
Ans: यह कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेस (CMF) के तहत आयोजित एक बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास है, जिसका उद्देश्य पश्चिमी हिंद महासागर में सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
Q.2. इस अभ्यास का उद्देश्य क्या है?
Ans: इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री डकैती रोकना, नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाना और सदस्य देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल बढ़ाना है।
Q.3. इसमें कौन-कौन शामिल हैं?
Ans: इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में मेजबान देश भारत के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, सेशेल्स और CMF गठबंधन के अन्य मित्र देशों के नौसैनिक बल शामिल हैं।
Q.4. यह अभ्यास कहाँ आयोजित किया गया?
Ans: ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2’ का आयोजन 20 से 23 जुलाई 2026 तक भारत के कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान (SNC) में निर्धारित है।
Q.5. भारत की सुरक्षा के लिए इसका क्या महत्व है?
Ans: यह भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा करता है, समुद्री आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाता है और हिंद महासागर में देश के सामरिक प्रभाव को सुदृढ़ करता है।
