Operation Urja Suraksha
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ (Operation Urja Suraksha) की शुरुआत की है, जिसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास भारत की ऊर्जा जीवनरेखा को सुरक्षित करना है।
ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के बारे में
- उद्देश्य: पश्चिम एशिया (विशेषकर ईरान-इजरायल संघर्ष) में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ओर आने वाले कच्चे तेल (Crude Oil), LNG, और LPG जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना।
- तैनाती: भारतीय नौसेना ने इस मिशन के लिए 5 से अधिक फ्रंटलाइन युद्धपोतों (विध्वंसक और फ्रिगेट) को तैनात किया है।
- कार्यप्रणाली: यह एक गैर-लड़ाकू (non-combat) मिशन है जो ‘डिटेरेंस’ (निवारण) और ‘रिस्क रिडक्शन’ पर केंद्रित है। नौसेना जहाजों को भौतिक एस्कॉर्ट (physical escort), रीयल-टाइम नेविगेशन सहायता और इलेक्ट्रॉनिक-वारफेयर सुरक्षा प्रदान कर रही है।
- प्रमुख सफलताएं: नौसेना ने सफलतापूर्वक LPG टैंकरों जैसे Pine Gas, Jag Vasant, Shivalik, Nanda Devi, और कच्चे तेल के टैंकर Jag Laadki को सुरक्षित पार कराया है।
महत्व:
- होर्मुज जलडमरूमध्य: यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। जहां से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% (एक-पांचवां हिस्सा) इसी संकरे मार्ग से गुजरता है।
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। इस मार्ग में बाधा भारत की अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति को सीधे प्रभावित करती है।
- भारत की समुद्री सिद्धांत (Maritime Doctrine) में बदलाव: यह ऑपरेशन ‘प्रतिक्रियाशील सुरक्षा’ (reactive security) से ‘सक्रिय सुरक्षा’ (proactive protection) की ओर भारत के बढ़ते कदम को दर्शाता है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz):
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