केकड़े की नई प्रजाति पैचीचेल्स रविचंद्रानी (Pachycheles ravichandrani) की खोज
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संदर्भ:
हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों ने लक्षद्वीप द्वीप समूह के अगत्ती द्वीप की उथली प्रवाल भित्तियों में ‘पोर्सिलेन केकड़े’ (Porcelain crab) की दुर्लभ और नई प्रजाति पैचीचेल्स रविचंद्रानी (Pachycheles ravichandrani) की खोज की।
पैचीचेल्स रविचंद्रानी (Pachycheles ravichandrani) के बारे में:
- खोज स्थल: यह प्रजाति अरब सागर में स्थित केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के अगत्ती द्वीप (Agatti Island) के पथरीले तटों और उथली प्रवाल भित्तियों में खोजी गई है। यह समुद्र की सतह से 1 मीटर से भी कम गहराई पर पाई गई।
- खोजकर्ता: इसकी खोज आईसीएआर-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (ICAR-NBFGR), लखनऊ के कोच्चि क्षेत्रीय केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा की गई है।
- वर्गीकरण: यह जीव संघ आर्थ्रोपोडा (Arthropoda) के क्रस्टेशिया (Crustacea) वर्ग और डेकापोडा (Decapoda) गण के अंतर्गत पोर्सिलेनिडी (Porcellanidae) परिवार से संबंधित है।
- यद्यपि ये दिखने में सच्चे केकड़ों (True Crabs) जैसे होते हैं, लेकिन विकासात्मक रूप से ये स्क्वाट लॉबस्टर (Squat Lobsters) के अधिक निकट होते हैं।
- इनका शरीर चीनी मिट्टी (Porcelain) की तरह नाजुक होता है और शिकारियों से बचने के लिए ये आसानी से अपने अंग गिरा देते हैं।
- नामकरण: इस प्रजाति का नाम भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन के सम्मान में रखा गया है। उन्होंने देश के ‘डीप ओशन मिशन’ (Deep Ocean Mission) और समुद्री अनुसंधान (Ocean Research) में असाधारण नेतृत्व प्रदान किया है।
- शारीरिक बनावट:
- अति सूक्ष्म आकार: यह केकड़ा आकार में बेहद छोटा है, जिसकी कुल चौड़ाई महज 3 मिलीमीटर के आसपास है।
- विशिष्ट रंग रूप: प्राकृतिक आवास में इसका खोल (Carapace) गहरे लाल रंग (Carmine Red) का होता है।
- इसकी पीठ पर एक सफेद धब्बा और पंजों पर सफेद निशान होते हैं, जबकि चलने वाले पैरों पर क्षैतिज धारियाँ होती हैं।
- संरचना: इसका खोल लगभग गोलाकार (Sub-circular) होता है, जिसके किनारों पर बाल जैसी महीन संरचनाएं (Setae) पाई जाती हैं। इसके छोटे पंजे की उंगलियों के बीच एक स्पष्ट अंतर (Gap) और एक अनूठा कटा हुआ काटने वाला किनारा (Truncate Cutting Edge) होता है।
- आनुवंशिक विशिष्टता: इसके माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए (Mitochondrial DNA) के परीक्षण से पता चला है कि यह अपने ही वंश (Genus) की अन्य प्रजातियों से 12.6% से 21.7% तक आनुवंशिक भिन्नता (Genetic Divergence) प्रदर्शित करता है।
- पारिस्थितिकी भूमिका: यह जीव प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र (Coral Reef Ecosystem) में पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण (Nutrient Recycling) और समुद्र की खाद्य श्रृंखला को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- संरक्षण स्थिति: नव-खोजे जाने के कारण अभी तक आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में इसका मूल्यांकन नहीं हुआ है, लेकिन प्रवाल भित्तियों के क्षरण और जलवायु परिवर्तन के कारण इसके आवास को खतरा है।
भारत में केकड़ों की प्रजातियाँ (Crab Biodiversity India):
- विविधता: भारत के तटीय जल और मीठे पानी के स्रोतों में केकड़ों की 1000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- प्रमुख विशेष प्रजातियाँ और उनकी खासियत:
- मैंग्रोव केकड़ा (Mud Crab/Scylla serrata): यह सुंदरवन (पश्चिम बंगाल) और चिलिका झील (ओडिशा) के मैंग्रोव क्षेत्रों में बहुतायत में पाया जाता है। यह आकार में बड़ा होता है और इसका वाणिज्यिक महत्व अत्यधिक है।
- फिड्लर केकड़ा (Fiddler Crab): भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों के कीचड़दार इलाकों में मिलता है। इसके नर केकड़े का एक पंजा बहुत बड़ा होता है, जिसका उपयोग वह संवाद और क्षेत्र रक्षा के लिए करता है।
- घोस्ट केकड़ा (Ghost Crab): ओडिशा और तमिलनाडु के रेतीले समुद्र तटों पर रात में सक्रिय रहने वाला केकड़ा है, जो अपनी तेज गति और रेत के रंग में घुलमिल जाने की क्षमता के लिए जाना जाता है।
- मीठे पानी के केकड़े (Ghatiana Species): हाल के वर्षों में पश्चिमी घाट (महाराष्ट्र और कर्नाटक) में ‘घाटियाना’ वंश के चमकीले और रंग-बिरंगे मीठे पानी के केकड़ों की कई नई प्रजातियाँ खोजी गई हैं।
- वितरण वाले प्रमुख राज्य: भारत में केकड़ों की सर्वाधिक विविधता पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, अंडमान-निकोबार और गुजरात के तटीय क्षेत्रों में केंद्रित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: पैचीचेल्स रविचंद्रानी क्या है?
उत्तर: यह भारत में खोजी गई ‘पोर्सिलेन केकड़े’ (Porcelain Crab) की एक नई, अत्यंत सूक्ष्म और गहरे लाल रंग की समुद्री प्रजाति है।
प्रश्न 2: केकड़े की नई प्रजाति कहाँ खोजी गई?
उत्तर: यह नई प्रजाति केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के अगत्ती द्वीप की उथली प्रवाल भित्तियों और पथरीले तटों पर खोजी गई है।
प्रश्न 3: इस नई प्रजाति का नाम पैचीचेल्स रविचंद्रानी क्यों रखा गया?
उत्तर: यह नाम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन के समुद्री जैव विविधता और डीप ओशन मिशन में योगदान के सम्मान में रखा गया है।
प्रश्न 4: इस खोज का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
उत्तर: यह खोज आणविक और शारीरिक रूप से पोर्सिलेन केकड़ों के विकासक्रम को समझने और समुद्री जीवों के आनुवंशिक वर्गीकरण (Taxonomy) को समृद्ध करने में सहायक है।
प्रश्न 5: भारत की समुद्री जैव विविधता के लिए यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह दर्शाता है कि भारत के उथले तटीय पारिस्थितिकी तंत्र में कई अज्ञात जीव मौजूद हैं, जो भविष्य के महासागर अनुसंधान और संरक्षण नीतियों के लिए आवश्यक हैं।
