पद्मा बैराज
संदर्भ:
हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने देश के दक्षिण-पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में सूखे की समस्या से निपटने के लिए ऐतिहासिक पद्मा बैराज (Padma Barrage) परियोजना के पहले चरण के निर्माण को आधिकारिक मंजूरी दे दी है.
- यह विशाल जल अवसंरचना परियोजना गंगा नदी के बांग्लादेशी हिस्से, जिसे स्थानीय स्तर पर पद्मा नदी कहा जाता है, उस पर बनाई जाएगी.
पद्मा बैराज परियोजना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुख्य बिंदु:
- परियोजना का स्थान: पद्मा बैराज (Padma Barrage) का निर्माण बांग्लादेश के राजबाड़ी और पाबना जिलों के बीच मुख्य पद्मा नदी चैनल पर किया जाना प्रस्तावित है.
- भौतिक आयाम: संरचनात्मक ब्लूप्रिंट के अनुसार, इस कंक्रीट-एंकर बैराज की कुल लंबाई 2.1 किलोमीटर होगी, जिसमें जल नियंत्रण के लिए 78 स्पिलवे गेट, नेविगेशन लॉक और मछली मार्ग (Fish Passages) बनाए जाएंगे.
- जल भंडारण क्षमता: यह विशाल जलाशय मानसून के दौरान लगभग 2,900 मिलियन घन मीटर (2.9 बिलियन क्युबिक मीटर) मीठे पानी को संचित करने में सक्षम होगा, जिसका उपयोग शुष्क महीनों में किया जाएगा.
- लागत और वित्तीय ढांचा: इस मेगा प्रोजेक्ट के पहले चरण की अनुमानित लागत 34,497.25 करोड़ टका (लगभग 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है.
- बांग्लादेश इस परियोजना को पूरी तरह से अपने आंतरिक राष्ट्रीय कोष (GoB Grant) से वित्तपोषित कर रहा है.
- समयावधि: परियोजना के पहले चरण का कार्यान्वयन जुलाई 2026 से शुरू होकर जून 2033 तक चलने की योजना है, जबकि दूसरा चरण 2028 से 2034 के बीच शुरू होगा.
- पनबिजली उत्पादन: इस Water Infrastructure में एक एम्बेडेड हाइड्रोपावर प्लांट भी शामिल होगा, जिसकी कुल बिजली उत्पादन क्षमता 113 मेगावाट (MW) होगी.
- पर्यावरणीय और कृषि सुधार: इसका मुख्य उद्देश्य हिस्ना-माथाभांगा, गोरई-मधुमती और चंदना-बड़शिया जैसी प्रमुख सहायक नदियों के प्रवाह और नौवहन क्षमता को पुनर्जीवित करना है, जो दशकों से पानी की कमी के कारण सूख रही थीं.
व्यापक क्षेत्रीय लाभ:
- विशाल आबादी को राहत: इस परियोजना से बांग्लादेश के खुल्ना, ढाका, राजशाही और बारीशाल संभागों के अंतर्गत आने वाले 19 जिलों की लगभग 7 करोड़ आबादी को सीधे पेयजल और कृषि सुरक्षा का लाभ मिलेगा.
- सिंचाई क्षमता का विस्तार: बैराज का संचित पानी देश के दक्षिण-पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में लगभग 2.88 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि को निरंतर सिंचाई सुविधाएं प्रदान करेगा. यह बांग्लादेश की महत्वाकांक्षी ‘गंगा-कोबाडक (G-K) सिंचाई परियोजना’ को भी मुख्य सहारा देगी.
- लवणता (Salinity) पर नियंत्रण: बंगाल की खाड़ी से आने वाले खारे पानी के प्रवेश को रोकने में यह बैराज सबसे सुरक्षात्मक विकल्प बनेगा. शुष्क मौसम में मीठे पानी को छोड़ कर सतखीरा, खुल्ना और बागेरहाट जिलों में लवणता को कम किया जाएगा.
- सुंदरवन का संरक्षण: मीठे पानी के निरंतर प्रवाह से सुंदरवन मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के अद्वितीय जैव विविधता संतुलन को बचाया जा सकेगा, जो खारे पानी के बढ़ने से गंभीर खतरे में है.
भारत-बांग्लादेश संबंध:
- फरक्का बैराज का जवाब: बांग्लादेश का आधिकारिक तर्क रहा है कि भारत द्वारा 1970 के दशक में पश्चिम बंगाल में बनाए गए फरक्का बैराज के कारण शुष्क मौसम में पद्मा नदी का जल स्तर बेहद गिर जाता है.
- बांग्लादेश इस नए बैराज को भारत के ऊपरी डायवर्जन के खिलाफ अपनी ‘लोअर-रिपेरियन’ (निचले तटवर्ती देश) जल संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के तौर पर देख रहा है.
- बैराज भारत के पश्चिम बंगाल में स्थित ‘फरक्का बैराज’ से महज 180 किलोमीटर की दूरी पर डाउनस्ट्रीम (निचले प्रवाह क्षेत्र) में स्थित होगा.
- संधि समाप्ति की टाइमिंग: दोनों देशों के बीच 30 वर्षीय गंगा जल साझाकरण संधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है. भारत के साथ नए सिरे से होने वाली वार्ता से ठीक पहले बांग्लादेश द्वारा इस एकतरफा मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी देना संधि की मेज पर उसकी मोलभाव (Bargaining) की शक्ति को प्रभावित कर सकता है.
- तीसरे पक्ष (चीन) का कूटनीतिक जोखिम: हालांकि बांग्लादेश इसे अपने दम पर बनाने का दावा कर रहा है, लेकिन इतने जटिल और बड़े नदी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी और बुनियादी ढांचे के सहयोग के रूप में चीन की एंट्री की संभावना से भारतीय सुरक्षा रणनीतिकार चिंतित हैं. भारत के पड़ोसी देशों की नदियों पर चीनी प्रभाव भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय रहता है.
- जल विज्ञान और गाद (Sediment) की समस्या: विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि गंगा-पद्मा बेसिन में एक और बड़ा अवरोधक कंक्रीट वॉल बनाने से डाउनस्ट्रीम में गाद जमने की दर अनियंत्रित हो जाएगी.
- इससे मानसून के दौरान अचानक और विनाशकारी बाढ़ (Flood Risks) का खतरा दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में बढ़ सकता है.
FAQs:
1. पद्मा बैराज क्या है?
यह बांग्लादेश द्वारा पद्मा नदी पर सूखे से निपटने और मीठे पानी को संचित करने के लिए बनाया जा रहा 2.1 किमी लंबा विशाल जलाशय बैराज है.
2. यह किस नदी पर बनाया जा रहा है?
यह पूरी तरह से बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले में पद्मा नदी पर बनाया जा रहा है, जो भारत की गंगा नदी का ही डाउनस्ट्रीम हिस्सा है.
3. इसका उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य शुष्क मौसम में पानी की कमी को दूर करना, नदियों को पुनर्जीवित करना और तटीय क्षेत्रों में समुद्री लवणता के प्रवेश को रोकना है.
4. इससे किन क्षेत्रों को लाभ होगा?
इससे बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों के 19 जिलों की लगभग 7 करोड़ आबादी और 2.88 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधा लाभ होगा.
5. भारत के लिए इसका क्या महत्व है?
यह भारत-बांग्लादेश सीमा के पास स्थित होने तथा आगामी गंगा जल संधि (दिसंबर 2026) की समाप्ति के कारण दोनों देशों के जल कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित करेगा.
