UP के Parichha Dam को मिली विश्व धरोहर सिंचाई संरचना मान्यता
संदर्भ:
हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय सिंचाई एवं जल निकासी आयोग (ICID) द्वारा उत्तर प्रदेश स्थित ऐतिहासिक पारीछा बांध (Parichha Dam) को ‘विश्व धरोहर सिंचाई संरचना’ (World Heritage Irrigation Structure) के रूप में मान्यता देने की घोषणा की गई ।
पारीछा बांध (Parichha Dam) के बारे में:
- स्थिति: पारीछा बांध उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के झांसी जिले में झांसी-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पारीछा कस्बे के पास स्थित है।
- यह उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी (Betwa River) पर निर्मित एक बहुउद्देशीय ऐतिहासिक जल भंडारण संरचना है।
- बेतवा नदी यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है।
- भौगोलिक क्षेत्र: यह पूरी तरह से भारत के शुष्क और अर्ध-शुष्क बुंदेली पठार (Bundelkhand Region) के अंतर्गत आता है, जो ऐतिहासिक रूप से जल संकट के लिए जाना जाता है।
- निर्माण: इस बांध की परिकल्पना 1870 के दशक में बुंदेलखंड में पड़े भीषण अकालों के बाद की गई थी। इसका निर्माण कार्य ब्रिटिश काल के दौरान शुरू हुआ और वर्ष 1881 से 1886 के बीच पूरा किया गया।
- इसका निर्माण ब्रिटिश सैन्य इंजीनियरों और स्थानीय कारीगरों के समन्वय से सिंचाई विभाग द्वारा कराया गया था।
- प्रकृति: यह एक ‘मेसनरी वियर’ (Masonary Weir) यानी पत्थरों और गारे से निर्मित बांध है। इसकी कुल लंबाई लगभग 1,175 मीटर है और इसकी जलाशय भंडारण क्षमता बुंदेलखंड के सबसे बड़े मानव-निर्मित जल निकायों में से एक है।
- महत्व:
- कृषि का आधार: इस ऐतिहासिक परियोजना (Parichha Irrigation Project) से निकली नहरों के तंत्र द्वारा झांसी, जालौन और हमीरपुर जिलों की लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को बारहमासी सिंचाई की सुविधा मिलती है।
- बिजली उत्पादन: यह जलाशय कृषि के साथ-साथ पारीछा थर्मल पावर प्लांट (Parichha Thermal Power Station) को निरंतर शीतलन जल (Cooling Water) की आपूर्ति करता है, जो उत्तर प्रदेश के बिजली ग्रिड का एक मुख्य हिस्सा है।
- पेयजल आपूर्ति: यह झांसी शहर और उसके आस-पास के दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्राथमिक पेयजल स्रोत (Drinking Water Source) है।
- वैश्विक मान्यता: इसे World Heritage Irrigation Structure की प्रतिष्ठित मान्यता अंतर्राष्ट्रीय सिंचाई एवं जल निकासी आयोग (International Commission on Irrigation and Drainage – ICID) द्वारा प्रदान की गई।
- आईसीआईडी (ICID) उन सिंचाई संरचनाओं को यह दर्जा देता है जो 100 वर्ष से अधिक पुरानी हों, जिनका ऐतिहासिक महत्व हो और जो आज भी पूरी तरह क्रियाशील रहते हुए स्थानीय समुदायों की सेवा कर रही हों।
- पारीछा बांध पिछले 140 वर्षों से बिना किसी बड़ी विफलता के लगातार सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण का कार्य कर रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय मान्यता का महत्व:
- इस वैश्विक तमगे से इस प्राचीन इंजीनियरिंग ढांचे के संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और तकनीकी सहायता मिल सकेगी।
- बेतवा नदी का यह विहंगम दृश्य और ऐतिहासिक बांध अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर ‘इको-टूरिज्म’ और हेरिटेज टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा।
- जल संकट से जूझने वाले बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए यह मान्यता साबित करती है कि पारंपरिक जल संचयन (Water Conservation) और ऐतिहासिक सिंचाई प्रणालियां (Historical Irrigation Structures India) आज भी प्रासंगिक हैं।
- दुनिया भर के जल संसाधन विशेषज्ञों और सिविल इंजीनियरों के लिए यह बांध टिकाऊ इंजीनियरिंग और दीर्घकालिक सामग्री के उपयोग पर शोध का एक प्रमुख केस स्टडी बनेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: पारीछा बांध को विश्व धरोहर सिंचाई संरचना की मान्यता क्यों मिली?
उत्तर: यह बांध 140 वर्ष से अधिक पुराना है और बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए आज भी कृषि, बिजली और पेयजल आपूर्ति के लिए पूरी तरह क्रियाशील है।
प्रश्न 2: पारीछा बांध उत्तर प्रदेश में कहां स्थित है?
उत्तर: यह ऐतिहासिक बांध उत्तर प्रदेश के झांसी जिले (Jhansi District) में बेतवा नदी के तट पर स्थित है।
प्रश्न 3: पारीछा बांध का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
उत्तर: इसका निर्माण 1881-1886 के बीच ब्रिटिश काल में बुंदेलखंड को भीषण सूखे और अकालों से बचाने के उद्देश्य से किया गया था।
प्रश्न 4: विश्व धरोहर सिंचाई संरचना का दर्जा क्या होता है?
उत्तर: यह ICID द्वारा दिया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय सम्मान है, जो 100 वर्ष से पुरानी और वर्तमान में सक्रिय ऐतिहासिक जल संरचनाओं को संरक्षित करता है।
प्रश्न 5: पारीछा बांध का निर्माण कब हुआ था?
उत्तर: पारीछा बांध (Parichha Dam History) का निर्माण कार्य वर्ष 1881 में शुरू होकर वर्ष 1886 में पूरी तरह संपन्न हुआ था।
प्रश्न 6: पारीछा बांध से किन क्षेत्रों को सिंचाई की सुविधा मिलती है?
उत्तर: इससे मुख्य रूप से बुंदेलखंड के झांसी, जालौन, हमीरपुर और उनके आस-पास के कृषि प्रधान ग्रामीण क्षेत्रों को सिंचाई जल मिलता है।
प्रश्न 7: पारीछा बांध को यह मान्यता किस संस्था ने दी?
उत्तर: यह वैश्विक मान्यता फ्रांस स्थित अंतर्राष्ट्रीय सिंचाई एवं जल निकासी आयोग (ICID) द्वारा आधिकारिक तौर पर प्रदान की गई है।
प्रश्न 8: पारीछा बांध का बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए क्या महत्व है?
उत्तर: यह शुष्क बुंदेलखंड की जीवन रेखा है, जो कृषि सिंचाई (Bihar Irrigation की तर्ज पर यूपी में), पेयजल सुरक्षा और पावर प्लांट को जल प्रदान करता है।
