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PM-SETU Scheme: 5 ITI क्लस्टरों के लिए ₹1194.92 करोड़ की निवेश योजना को मंजूरी

PM-SETU Scheme: 5 ITI क्लस्टरों के लिए ₹1194.92 करोड़ की निवेश योजना को मंजूरी  

PM-SETU Scheme

संदर्भ:

हाल ही में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) की छठी बैठक में पीएम-सेतु योजना (PM-SETU Scheme) के तहत 5 नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) क्लस्टरों के उन्नयन के लिए ₹1,194.92 करोड़ की रणनीतिक निवेश योजनाओं (SIPs) को मंजूरी दी गई।

स्वीकृत 5 ITI क्लस्टर और कॉर्पोरेट भागीदार (Five ITI Clusters & Partners):

  • कटक (ओडिशा) क्लस्टर: कुल निवेश ₹240.50 करोड़। औद्योगिक भागीदार: टाटा स्टील फाउंडेशन (Tata Steel Foundation)। 
  • पुणे (महाराष्ट्र) क्लस्टर: कुल निवेश ₹241 करोड़। औद्योगिक भागीदार: बीवीजी इंडिया लिमिटेड (BVG India Limited) और बीवीजी फाउंडेशन। 
  • छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) क्लस्टर: कुल निवेश ₹238.01 करोड़। औद्योगिक भागीदार: बेलराइज इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Belrise Industries Limited)। 
  • जम्मू (जम्मू-कश्मीर) क्लस्टर: कुल निवेश ₹240 करोड़। औद्योगिक भागीदार: ईगल इन्फ्रा इंडिया लिमिटेड (Eagle Infra India Limited)। 
  • श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) क्लस्टर: कुल निवेश ₹235.41 करोड़। औद्योगिक भागीदार: इंदरदीप इन्फ्रा इंडिया लिमिटेड (Inderdeep Infra India Limited)। 

PM-SETU योजना क्या है?

  • परिचय: यह एक राष्ट्रीय योजना है जिसका उद्देश्य देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक बनाकर व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप ढालना है।
  • पूरा नाम: प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार क्षमता परिवर्तन योजना (Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs)।
  • लॉन्च: इस योजना को 4 अक्टूबर 2025 को व्यावसायिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण के कायाकल्प के उद्देश्य से शुरू किया गया था।  
  • कुल वित्तीय परिव्यय: योजना का कुल बजट ₹60,000 करोड़ निर्धारित है।
  • फंडिंग का ढांचा (Funding Pattern):
    • केंद्र सरकार: ₹30,000 करोड़ (50%)
    • राज्य सरकारें: ₹20,000 करोड़ (33.3%)
    • उद्योग/निजी भागीदार: ₹10,000 करोड़ (16.7%)
  • नोडल मंत्रालय: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), भारत सरकार। 
  • संगठनात्मक ढांचा: 
    • हब और स्पोक मॉडल (Hub-and-Spoke Structure): यह योजना किसी एक एकल संस्थान के बजाय पूरे क्लस्टर नेटवर्क को मजबूत करती है। पूरे देश में कुल 200 हब ITI संस्थान और उनके सहयोग के लिए 800 स्पोक ITI संस्थान चिन्हित किए गए हैं। हालिया स्वीकृतियों में भी प्रत्येक मुख्य ‘हब’ ITI संस्थान अपने अंतर्गत आने वाले 4 ‘स्पोक’ संस्थानों का मार्गदर्शन और बुनियादी ढांचा साझाकरण सुनिश्चित करेगा। 
    • विशेष प्रयोजन वाहन (SPVs) द्वारा प्रबंधन: पारंपरिक सरकारी प्रबंधन के विपरीत, इन अपग्रेडेड ITI का संचालन Special Purpose Vehicles (SPVs) के माध्यम से किया जाता है। इसमें उद्योग भागीदारों की 51% बहुमत हिस्सेदारी और सरकार की 49% हिस्सेदारी होती है। यह निजी क्षेत्र को पाठ्यक्रम तय करने और प्रबंधन में निर्णय लेने की स्वायत्तता देता है। 
  • उद्देश्य:
    • उद्योग-अनुरूप कौशल विकास (Industry-Aligned Skilling): भारत में कौशल अंतराल (Skill Gap) को समाप्त करना, ताकि ITI से निकलने वाले छात्रों के पास वही हुनर हो जिसकी मांग आधुनिक फैक्ट्रियों और कॉर्पोरेट को है।
    • तकनीकी आधुनिकीकरण (ITI Infrastructure Development): पुरानी वर्कशॉप और मशीनों के स्थान पर उद्योग 4.0 (Industry 4.0) प्रौद्योगिकियों जैसे- रोबोटिक्स, एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), और सीएनसी ऑटोमेशन टूल को स्थापित करना।
    • ग्लोबल बेंचमार्किंग (ISO & WorldSkills): स्वीकृत क्लस्टरों को ISO सर्टिफिकेशन प्राप्त करने तथा कम से कम एक ऐसा ट्रेड विकसित करने के लिए अनिवार्य किया गया है जो WorldSkills प्रतियोगिताओं के मानकों के अनुरूप हो।
    • प्रशिक्षकों का विकास (Training of Trainers – ToT): केवल बुनियादी ढांचा बदलना पर्याप्त नहीं है, शिक्षकों को भी अपग्रेड करना आवश्यक है। अक्टूबर 2026 तक 3,744 से अधिक ट्रेनर्स को राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTIs) के माध्यम से उन्नत प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 

योजना का महत्व:

  • रोजगार क्षमता में वृद्धि (Enhanced Employability): चूंकि पाठ्यक्रम प्रत्यक्ष रूप से टाटा स्टील या बीवीजी जैसी कंपनियों की देखरेख में तैयार हो रहे हैं, छात्रों को सीधे ‘ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग’ और सीधे प्लेसमेंट के अवसर मिलेंगे। 
  • प्रशिक्षुता (Apprenticeship) के बेहतर अवसर: उद्योग भागीदारी के चलते युवाओं को पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक कारखानों में काम करने का मौका मिलेगा, जिससे उनके व्यावहारिक ज्ञान में वृद्धि होगी।
  • क्षेत्रीय असंतुलन का समाधान: जम्मू और श्रीनगर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में लगभग ₹475 करोड़ से अधिक का यह निवेश वहां के युवाओं को उग्रवाद या बेरोजगारी से दूर कर मुख्यधारा के आर्थिक विकास और तकनीकी शिक्षा से जोड़ेगा। 
  • डेमोग्राफिक डिविडेंड (Demographic Dividend) का लाभ उठाना: भारत के पास दुनिया की सबसे युवा आबादी है, लेकिन ‘सस्टेनेबल स्किल्स’ की कमी के कारण वे बेरोजगार हैं। PM-SETU इस जनसांख्यिकीय लाभांश को ‘आर्थिक परिसंपत्ति’ में बदलने का माध्यम है।
  • कौशल भारत मिशन (Skill India Mission) को नई गति: पूर्व की कौशल योजनाएं अक्सर अल्पकालिक (Short-term) प्रशिक्षण पर केंद्रित थीं। PM-SETU संस्थागत दीर्घकालिक (Long-term) व्यावसायिक प्रशिक्षण ढांचे को सुदृढ़ कर रही है।
  • को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म (Cooperative Federalism): केंद्र, राज्यों और कॉर्पोरेट के बीच 50:33.3:16.7 के अनुपात में वित्तीय और प्रशासनिक साझेदारी भारत के सहकारी संघवाद और कूटनीतिक नीति-निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. PM-SETU योजना क्या है?

Ans: यह ₹60,000 करोड़ के बजट वाली एक राष्ट्रीय योजना है जिसका उद्देश्य देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक बनाकर व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप ढालना है।

Q2. इस योजना के तहत हाल ही में ₹1194.92 करोड़ की मंजूरी क्यों दी गई है?

Ans: यह राशि महाराष्ट्र, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर के 5 बड़े ITI क्लस्टरों के बुनियादी ढांचे, आधुनिक लैब्स और तकनीकी प्रशिक्षण को उन्नत करने के लिए स्वीकृत की गई है। 

Q3. इस योजना में निजी कंपनियों (जैसे टाटा स्टील) की क्या भूमिका है?

Ans: निजी कंपनियां औद्योगिक भागीदार के रूप में ITI क्लस्टरों का संचालन करने वाले SPV में 51% हिस्सेदारी रखेंगी और व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा रोजगार लिंकेज सुनिश्चित करेंगी।

Q4. इस योजना से छात्रों को सीधा क्या लाभ होगा?

Ans: छात्रों को विश्वस्तरीय और आधुनिक मशीनों पर प्रशिक्षण मिलेगा, अंतरराष्ट्रीय मानकों (WorldSkills) के ट्रेड सीखने को मिलेंगे और सीधे बड़े ब्रांड्स में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

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