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राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह

राज्यसभा उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह | Rajya Sabha Deputy Chairman Harivansh Narayan Singh

Rajya Sabha Deputy Chairman Harivansh Narayan Singh

संदर्भ:

हाल ही में हरिवंश नारायण सिंह ने निर्विरोध चुने जाने के बाद राज्यसभा के उपसभापति के रूप में अपना ऐतिहासिक तीसरा कार्यकाल शुरू किया। यह उपलब्धि भारतीय संसदीय इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह 2004 में नजमा हेपतुल्ला के बाद इस पद के लिए तीसरी बार चुने जाने वाले पहले व्यक्ति और पहले गैर-कांग्रेसी सदस्य बन गए हैं।

हरिवंश नारायण सिंह का परिचय: 

  • जन्म तिथि: 30 जून 1956।
  • जन्म स्थान: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का सिताब दियारा गाँव। रोचक तथ्य यह है कि यह गाँव प्रसिद्ध समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण (JP) की भी जन्मस्थली है।
  • शिक्षा: उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से अर्थशास्त्र में एम.ए. (M.A.) किया और पत्रकारिता में डिप्लोमा भी प्राप्त किया।
  • करियर: राजनीति में आने से पहले हरिवंश जी लगभग चार दशकों तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मात्र 500 रुपये प्रति माह की नौकरी से की थी।
  • इस दौरान वह ‘धर्मयुग’, ‘रविवार’ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में) जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों से जुड़े रहे।
  • उन्होंने हिंदी दैनिक ‘प्रभात खबर’ के प्रधान संपादक के रूप में 25 वर्षों से अधिक समय तक कार्य किया। उनके नेतृत्व में यह समाचार पत्र झारखंड और बिहार का एक प्रमुख मीडिया संस्थान बना।
  • 1990-91 में वह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त मीडिया सलाहकार भी रहे। 
  • राजनीतिक यात्रा: 2014 में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने उन्हें बिहार से राज्यसभा के लिए नामित किया। इसके बाद 8 अगस्त 2018 को वह पहली बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए।
    • सितंबर 2020 में दोबारा सदन का सदस्य बनने पर उन्हें पुनः इस पद के लिए चुना गया। अप्रैल 2026 में वह तीसरी बार निर्विरोध चुने गए। उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हुआ था।
    • हरिवंश सिंह अब तक के पहले मनोनीत सदस्य (Nominated Member) हैं जिन्हें उपसभापति चुना गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र से राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था।
  • गैर-कांग्रेसी रिकॉर्ड: वह 40 वर्षों में इस पद पर आसीन होने वाले पहले गैर-कांग्रेसी सदस्य बने।
  • संसदीय निष्पक्षता: उन्हें सदन में जटिल और विवादास्पद मुद्दों (जैसे कृषि कानून बहस) के दौरान भी धैर्य और निष्पक्षता से कार्यवाही संचालित करने के लिए जाना जाता है।
  • सादा जीवन: वह अपनी सादगी और बौद्धिक गहराई के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने स्वयं लिखा है कि 2014 में उन्होंने बिना एक पैसा खर्च किए राज्यसभा का नामांकन फॉर्म भरा था, जो उनकी शुचिता को दर्शाता है। 

राज्यसभा उपसभापति पद के बारे में:

  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 89 के अनुसार राज्यसभा अपने सदस्यों में से एक को उपसभापति चुनेगी।

  • अनुच्छेद 90 उपसभापति के पद की रिक्ति, त्यागपत्र और हटाए जाने की प्रक्रियाओं का विवरण देता है। यदि उपसभापति सदन का सदस्य नहीं रहता, तो उसे अपना पद छोड़ना पड़ता है।
  • अनुच्छेद 91 सभापति (उपराष्ट्रपति) की अनुपस्थिति में उपसभापति सभापति के कर्तव्यों का पालन करता है।
    • निर्वाचन: उपसभापति का चुनाव राज्यसभा के सदस्यों द्वारा साधारण बहुमत से किया जाता है।
    • कार्यकाल: उपसभापति का कार्यकाल उनकी राज्यसभा सदस्यता की अवधि (सामान्यतः 6 वर्ष) तक होता है।
  • शक्तियाँ: उपसभापति सीधे तौर पर राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी होता है, न कि सभापति के प्रति। सदन की कार्यवाही के संचालन में उनकी भूमिका निर्णायक होती है, विशेषकर हंगामे या गतिरोध की स्थिति में।

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