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Rangpur-Sivasagar Historic Ensemble, UNESCO की विश्व धरोहर स्थल की संभावित सूची में हुआ शामिल

Rangpur-Sivasagar Historic Ensemble, UNESCO की विश्व धरोहर स्थल की संभावित सूची में हुआ शामिल

Rangpur-Sivasagar Historic Ensemble

संदर्भ:

हाल ही में भारत के ‘रंगपुर-शिवसागर ऐतिहासिक समूह (Rangpur-Sivasagar Historic Ensemble)’ को UNESCO विश्व धरोहर केंद्र की भारत की संभावित सूची (Assam UNESCO Tentative List 2026) में शामिल किया गया।

Rangpur-Sivasagar Historic Ensemble के बारे में:

  • परिचय: रंगपुर-शिवसागर ऐतिहासिक समूह ऊपरी ब्रह्मपुत्र घाटी में लगभग 600 वर्षों तक शासन करने वाले अहोम राजवंश के पूर्व-आधुनिक नियोजित स्थापत्य, जल प्रबंधन और सैन्य दुर्गों का एक एकीकृत ऐतिहासिक परिदृश्य है।
  • स्थिति: यह असम (Assam) के शिवसागर जिले (गुवाहाटी से लगभग 360 किमी उत्तर-पूर्व) में स्थित है। यह मुख्यतः रंगपुर (प्राचीन नाम: चे मुआन या ‘मनोरंजन का शहर’) और वर्तमान शिवसागर शहर में विस्तृत है।
  • राजवंश पृष्ठभूमि: अहोम साम्राज्य (Ahom Kingdom) की स्थापना 1228 ई. में म्यांमार से आए चाओलुंग सुकफा ने की थी।
  • निर्माण काल: रंगपुर को 1704 ई. में अहोम राजा स्वर्गदेव रुद्र सिंह द्वारा एक नियोजित राजधानी के रूप में स्थापित किया गया था। इसके बाद के शासकों, विशेषकर स्वर्गदेव प्रमत्त सिंह और राजेश्वर सिंह ने यहाँ भव्य ईंट और पत्थर के स्मारकों का निर्माण कराया।
  • विशेषताएं: इस समूह (Rangpur Sivasagar Heritage Site) में 20 से अधिक ऐतिहासिक स्मारक, भव्य मंदिर और विशाल जलाशय शामिल हैं, जो स्वदेशी ताई-अहोम शैलियों और हिंदू-मुगल वास्तुकला के अनूठे मिश्रण को दर्शाते हैं:
    • रंग घर (Rang Ghar): प्रमत्त सिंह द्वारा निर्मित यह दो-मंजिला शाही मंडप है, जिसे एशिया का सबसे पुराना जीवित एम्फीथिएटर (Amphitheatre) माना जाता है। इसकी छत नाव के आकार की (Boat-shaped roof) है।
    • तलातल घर (Talatal Ghar): यह रुद्र सिंह और राजेश्वर सिंह द्वारा निर्मित एक विशाल बहु-मंजिला महल परिसर और सैन्य अड्डा है, जो अपनी जटिल भूमिगत सुरंगों (Underground Tunnels) के लिए प्रसिद्ध है।
      • उन्नत जल प्रबंधन (Hydrological Systems): यहाँ मानव निर्मित तीन विशाल तालाब—जॉयसगर, गौरीसागर और शिवसागर टैंक स्थित हैं, जो दक्षिण एशिया के सबसे परिष्कृत जल प्रणालियों में से हैं।
    • शिव डोल (Siva Dol): शिवसागर टैंक के तट पर स्थित यह भगवान शिव को समर्पित लगभग 32 मीटर ऊँचा मंदिर है, जो अहोम धार्मिक कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
    • नामदांग पत्थर का पुल (Namdang Stone Bridge): 1703 ई. में एक ही ठोस पत्थर को काटकर बनाया गया यह ऐतिहासिक पुल आज भी आधुनिक यातायात का भार सहने में सक्षम है।
  • UNESCO Tentative List Inclusion: भारत सरकार के स्थायी प्रतिनिधिमंडल द्वारा 19 जून 2026 को इसका डोजियर यूनेस्को को सौंपा गया था। इसे निम्नलिखित दो सांस्कृतिक मानदंडों के तहत स्वीकार किया गया है:
  • मानदंड (iii) – अद्वितीय सांस्कृतिक परंपरा का प्रमाण: यह समूह छह शताब्दियों तक जीवित रही अहोम सभ्यता की प्रशासनिक, सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था का एक अद्वितीय जीवंत प्रमाण प्रस्तुत करता है।
  • मानदंड (iv) – उत्कृष्ट तकनीकी और स्थापत्य प्रतिरूप: यह परिदृश्य पूर्व-आधुनिक काल में वास्तुकला, पवित्र ज्यामिति (Sacred Geometry) और बाढ़-प्रवण ब्रह्मपुत्र घाटी में अत्यधिक लचीली जल-आधारित शहरी योजना (Water-based Urban Planning) का उदाहरण है।
    • यह चराइदेव मोइदाम्स (शाही कब्रगाह, जिसे 2024 में मुख्य धरोहर का दर्जा मिला) के साथ मिलकर अहोम शासन की पूरी गाथा को पूरा करता है।

असम की यूनेस्को धरोहर स्थल एवं संभावित सूची (UNESCO Heritage Sites in Assam)

  • मुख्य विश्व धरोहर सूची में शामिल स्थल (Inscribed World Heritage Sites):
  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park): वर्ष 1985 में ‘प्राकृतिक श्रेणी’ के तहत शामिल। यह एक सींग वाले गैंडों की दुनिया की सबसे बड़ी आबादी का घर है।
  • मानस राष्ट्रीय उद्यान (Manas National Park): वर्ष 1985 में ‘प्राकृतिक श्रेणी’ में शामिल। यह अपनी अनूठी जैव विविधता, प्रोजेक्ट टाइगर और संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है।
  • चराइदेव मोइदाम्स (Charaideo Moidams): 26 जुलाई 2024 को नई दिल्ली सत्र में इसे भारत की 43वीं और असम की पहली सांस्कृतिक धरोहर (Assam’s first cultural property) के रूप में मुख्य सूची में शामिल किया गया। यह अहोम राजाओं के पिरामिड नुमा टीला-दफन प्रणाली (Mound-Burial System) का पवित्र स्थल है।
  • संभावित सूची में शामिल अन्य प्रमुख स्थल (Other Sites on the Tentative List):
    • माजुली द्वीप (Majuli Island): सांस्कृतिक श्रेणी के तहत संभावित सूची में शामिल, जो ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीपों में से एक और नव-वैष्णव संस्कृति का केंद्र है।
    • भैरबकुंडा और असम का सिल्क सिल्क-ग्रोइंग क्षेत्र: बुनाई परंपराओं और मूंगा सिल्क उत्पादन के सांस्कृतिक परिदृश्य के रूप में प्रस्तावित।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Rangpur-Sivasagar Historic Ensemble क्या है?

उत्तर: यह असम के शिवसागर में स्थित अहोम राजवंश के स्मारकों, महलों (जैसे तलातल घर), मंदिरों और विशाल जलाशयों का एक ऐतिहासिक समूह (Rangpur-Sivasagar UNESCO) है।

प्रश्न 2: Rangpur-Sivasagar को UNESCO Tentative List में कब शामिल किया गया?

उत्तर: भारत सरकार द्वारा 19 जून 2026 को प्रस्ताव भेजने के बाद, यूनेस्को ने इसे 4 सितंबर 2026 को अपनी संभावित सूची में शामिल किया।

प्रश्न 3: Rangpur-Sivasagar का Ahom history से क्या संबंध है?

उत्तर: यह अहोम साम्राज्य का प्रमुख राजनीतिक और औपचारिक केंद्र (Seat of Power) था, जहाँ से राजाओं ने 17वीं-18वीं शताब्दी में शासन किया था।

प्रश्न 4: Rangpur-Sivasagar Historic Ensemble में कौन-कौन से heritage sites शामिल हैं?

उत्तर: इसमें एशिया का सबसे पुराना एम्फीथिएटर रंग घर, सैन्य दुर्ग तलातल घर, शिव डोल, नामदांग पुल और जॉयसागर तालाब जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं।

प्रश्न 5: Assam के लिए Rangpur-Sivasagar UNESCO listing क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह असम की समृद्ध अहोम विरासत (Ahom Kingdom UNESCO) को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने, पर्यटन को बढ़ावा देने और ऐतिहासिक स्मारकों के अंतरराष्ट्रीय संरक्षण का मार्ग प्रशस्त करती है।

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