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लद्दाख में दिखी लाल आसमान की दुर्लभ परिघटना (Rare phenomenon of red sky seen in Ladakh) | UPSC Preparation

Rare phenomenon of red sky seen in Ladakh

Rare phenomenon of red sky seen in Ladakh

संदर्भ:

हाल ही में लद्दाख के हानले के आसमान में एक दुर्लभ लाल रंग का प्रकाश देखा गया, जिससे पूरा आसमान लाल हो गया। यह दृश्य एक खगोलीय चमत्कार है, जो सूर्य से उठी एक विनाशकारी सौर विकिरण आंधी की चेतावनी देती है। 

लद्दाख में लाल आसमान: 

  • दिनांक: 19-20 जनवरी 2026।
  • स्थान: हनले डार्क स्काई रिजर्व (Hanle Dark Sky Reserve), लद्दाख।
  • परिघटना: ‘ब्लड-रेड’ ऑरोरा (Blood-Red Aurora)।
  • कारण: सूर्य से निकला X-Class सोलर फ्लेयर और तीव्र कोरोनल मास इजेक्शन (CME)।
  • तीव्रता: यह 2003 के ‘हैलोवीन स्टॉर्म’ के बाद का सबसे शक्तिशाली S4 श्रेणी का सौर विकिरण तूफान था। 

वैज्ञानिक विश्लेषण:

  • X-Class फ्लेयर और CME: 18 जनवरी 2026 को सूर्य के सक्रिय क्षेत्र (Active Region 14341) से एक शक्तिशाली X1.9-श्रेणी का फ्लेयर फटा, जिसने लगभग 1,700 किमी/सेकंड की गति से प्लाज्मा (CME) पृथ्वी की ओर भेजा।
  • G4 जियोमैग्नेटिक तूफान: जब यह CME पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetosphere) से टकराया, तो इसने एक G4 स्तर का गंभीर भू-चुंबकीय तूफान पैदा किया।
  • लाल रंग का रहस्य: आमतौर पर ऑरोरा हरे रंग के होते हैं, जो निचले वायुमंडल में ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया से बनते हैं। लद्दाख जैसे कम अक्षांश (Low Latitude) वाले क्षेत्रों में केवल ऊपरी हिस्से दिखाई देते हैं। 
    • 300 किमी से अधिक ऊंचाई पर जब सौर कण ऑक्सीजन के साथ टकराते हैं, तो वे गहरा लाल रंग (630 nm तरंगदैर्ध्य) उत्पन्न करते हैं। 

चिंताएं:

  • पावर ग्रिड पर खतरा: सौर तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में उतार-चढ़ाव पैदा करते हैं, जिससे ट्रांसफार्मर जल सकते हैं और बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो सकती है।
  • नेविगेशन और संचार: GPS सिग्नल बाधित हो सकते हैं, जिससे विमानन (Aviation), बैंकिंग और इंटरनेट सेवाएं ठप होने का जोखिम रहता है।
  • सैटेलाइट सुरक्षा: तीव्र विकिरण से उपग्रहों के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट खराब हो सकते हैं। हालिया तूफान के दौरान पृथ्वी के चुंबकीय कवच के सिकुड़ने से जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स सीधे सौर हवाओं के संपर्क में आ गए थे।
  • अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जोखिम: ISS (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) पर मौजूद यात्रियों को विकिरण से बचने के लिए सुरक्षित कक्षों में शरण लेनी पड़ी। 

भारत की तैयारी: 

  • आदित्य-L1 (Aditya-L1): इस मिशन ने सूर्य पर हो रही हलचल को 24-48 घंटे पहले ही भांप लिया, जिससे सैटेलाइट ऑपरेटरों को सुरक्षात्मक कदम उठाने का समय मिला।
  • हानले वेधशाला (Hanle Observatory): 4,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह वेधशाला भारत का पहला ‘डार्क स्काई रिजर्व’ है। यहाँ के ‘ऑल-स्काई कैमरों’ ने इस दुर्लभ ऑरोरा को कैद किया, जो वैज्ञानिकों को कम-अक्षांश वाले ऑरोरा के अध्ययन में मदद करता है।
  • सोलर साइकिल 25: सूर्य वर्तमान में अपने 11-वर्षीय चक्र के चरम (Solar Maximum) पर है, जिसका अर्थ है कि 2025-26 के दौरान ऐसी और भी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

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