स्कूल मैनेजमेंट कमेटी गाइडलाइंस 2026

संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) दिशानिर्देश 2026 जारी किए गए। ये दिशानिर्देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने और लगभग 15 लाख स्कूलों में लोकतांत्रिक शासन सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए गए हैं।
स्कूल मैनेजमेंट कमेटी गाइडलाइंस 2026 के मुख्य बिंदु:
- सदस्य संख्या: 100 छात्रों तक के स्कूलों में 12-15 सदस्य, 100-500 छात्रों के लिए 15-20, और 500 से अधिक छात्रों वाले स्कूलों के लिए 20-25 सदस्य होंगे।
- 75% अभिभावक भागीदारी: समिति के 75% सदस्य छात्र-छात्राओं के माता-पिता या अभिभावक होने चाहिए।
- महिला प्रतिनिधित्व: कुल सदस्यों में न्यूनतम 50% महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है।
- अन्य सदस्य (25%): शेष सदस्यों में स्थानीय प्राधिकरण के प्रतिनिधि, स्कूल शिक्षक, शिक्षाविद्, पूर्व छात्र और समुदाय के फ्रंटलाइन कार्यकर्ता (ASHA/आंगनवाड़ी) शामिल होंगे।
- नेतृत्व: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव अनिवार्य रूप से अभिभावक सदस्यों में से किया जाएगा, जबकि प्रधानाचार्य ‘सदस्य सचिव’ की भूमिका निभाएंगे।
- सार्वभौमिक गठन: अब यह नियम बालवाटिका से लेकर कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों पर लागू होगा। यह माध्यमिक स्तर पर पूर्व में संचालित ‘स्कूल प्रबंधन विकास समिति’ (SMDC) का स्थान लेगी।
- 3-वर्षीय स्कूल विकास योजना (SDP): प्रत्येक SMC को स्कूल के बुनियादी ढांचे और अकादमिक सुधार के लिए तीन साल की योजना तैयार करनी होगी, जिसे वार्षिक उप-योजनाओं के साथ अपडेट किया जाएगा।
- वित्तीय अधिकार: पारदर्शिता बढ़ाने के लिए SMC को 30 लाख रुपये तक के सिविल निर्माण कार्यों को स्वयं निष्पादित करने की शक्ति दी गई है।
- सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में कम से कम एक बार सामाजिक अंकेक्षण को प्रोत्साहित किया गया है।
- सीखने के परिणामों पर ध्यान: SMC अब केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं है; यह NIPUN भारत मिशन के तहत बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN) और छात्रों के सीखने के स्तर की निगरानी करेगी।
- सुरक्षा और कल्याण: स्कूलों में ‘सुरक्षा वॉक’ का आयोजन और स्कूल सुरक्षा योजना (School Safety Plan) का निर्माण SMC की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
- डिजिटल गवर्नेंस: स्कूल डेटा को UDISE+ पोर्टल पर प्रबंधित करना और डिजिटल पारदर्शिता सुनिश्चित करना अब SMC की कार्यप्रणाली का हिस्सा है।
- विद्यांजलि एकीकरण: स्थानीय स्वयंसेवकों और CSR के माध्यम से संसाधनों को जुटाने के लिए विद्यांजलि पोर्टल का उपयोग किया जाएगा।
- नियमित बैठकें: महीने में कम से कम एक बार बैठक आयोजित करना और न्यूनतम 50% गणपूर्ति (Quorum) बनाए रखना अनिवार्य है।
- समावेशिता: सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (SEDGs) और दिव्यांग बच्चों (CwSN) के अभिभावकों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
- कार्यकाल: सदस्यों का कार्यकाल 2 वर्ष का होगा, जिसे अधिकतम दो बार तक बढ़ाया जा सकता है।