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SEBI IT Resilience Index 2026 जारी, साइबर हमलों की सुरक्षा होगी मजबूत

SEBI IT Resilience Index 2026 जारी, साइबर हमलों की सुरक्षा होगी मजबूत

SEBI IT Resilience Index 2026

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भारतीय पूंजी बाजार की तकनीकी सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए बाजार अवसंरचना संस्थानों (MIIs) के लिए SEBI IT Resilience Index 2026 (सूचना प्रौद्योगिकी लचीलापन सूचकांक) ढांचा जारी किया।

SEBI IT Resilience Index क्या है?

  • परिचय: यह पूंजी बाजार में अपनी तरह का पहला मात्रात्मक तकनीकी स्वास्थ्य स्कोरकार्ड (Quantitative Technology Health Scorecard) है। जिस प्रकार बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय सुदृढ़ता मापने के लिए पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) का उपयोग होता है, ठीक उसी तरह सेबी का आईटी रेजिलिएंस इंडेक्स (SEBI IT Resilience Index) बाजार अवसंरचना संस्थानों के डिजिटल स्वास्थ्य, दोष सहिष्णुता (Fault Tolerance) और आपदा-रिकवरी क्षमताओं को मापेगा। 
  • उद्देश्य:
    • यह सुनिश्चित करना कि व्यापार (Trading), क्लीयरिंग (Clearing), सेटलमेंट और डिपॉजिटरी सिस्टम चलाने वाले मुख्य आईटी बुनियादी ढांचे सॉफ्टवेयर गलिच या साइबर हमलों (Cyber Attack Protection Stock Market) के दौरान भी तेजी से उबर सकें। 
    • विभिन्न संस्थानों की परिचालन तैयारियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन और उनके बीच तुलनात्मक विश्लेषण (Comparability) की सुविधा प्रदान करना।
    • संभावित तकनीकी विफलताओं और परिचालन संबंधी झटकों का उनके घटित होने से पहले ही पता लगाना। 
  • घोषणा: यह सर्कुलर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा 24 अगस्त 2026 को जारी किया गया था।
    • यह सूचकांक सेबी की तकनीकी सलाहकार समिति (Technical Advisory Committee) और 25 मार्च 2026 को जारी परामर्श पत्र (Consultation Paper) पर मिले फीडबैक के बाद तैयार किया गया है। 
  • कार्यान्वयन:
    • 30 नवंबर 2026: इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम (ISF) उप-मापदंडों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को अंतिम रूप देगा।
    • 28 फरवरी 2027: सभी लक्षित संस्थानों के लिए इस फ्रेमवर्क, अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) और रीयल-टाइम सेवा निगरानी को पूर्ण रूप से लागू (Operationalize) करने की अंतिम समयसीमा है।
  • रिपोर्टिंग: संस्थानों को हर छह महीने (Half-Yearly) में 60 दिनों के भीतर इस सूचकांक की गणना कर तुलनात्मक विश्लेषण सेबी की ‘स्टैंडिंग कमेटी ऑन टेक्नोलॉजी’ (SCOT) और अपने शासी बोर्ड को सौंपना होगा।
  • लागू: यह भारत के सभी मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) जैसे स्टॉक एक्सचेंजों (BSE, NSE), क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स और डिपॉजिटरीज (CDSL, NSDL) पर लागू होगा।

इंडेक्स की विशेषताएं:

यह सूचकांक पूर्ण रूप से सिस्टम-संचालित और स्वचालित (System-Driven and Automated) है, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप या व्यक्तिगत विवेक की गुंजाइश नहीं है। इस सेबी आईटी रेजिलिएंस फ्रेमवर्क (SEBI IT Resilience Framework) को 100 अंकों के पैमाने (100-point scale) पर 9 प्रमुख मापदंडों में विभाजित किया गया है: 

मापदंड (Parameters)भारांक/अंक (Weightage)प्रशासनिक विवरण (Administrative Focus)
उपलब्धता (Availability)20%प्राथमिक परिचालन सुरक्षा और बिना रुकावट निरंतर सेवा सुनिश्चित करना।
सुरक्षा (Security)20%साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क (SEBI Cybersecurity Framework) के तहत अग्रिम सुरक्षा चक्र।
अखंडता (Integrity)10%वित्तीय डेटा की शुद्धता और छेड़छाड़-मुक्त होना सुनिश्चित करना।
शासन (Governance)10%निदेशक मंडल स्तर पर तकनीकी जोखिम प्रबंधन (SEBI Technology Risk Management) की निगरानी।
विश्वसनीयता और निगरानी (Reliability & Monitoring)10%लाइव सिस्टम की वास्तविक समय (Real-time) में निगरानी।
व्यावसायिक निरंतरता (Business Continuity)10%रिकवरी टाइम ऑब्जेक्टिव (RTO) के तहत आपदा के बाद तुरंत बैकअप चालू करना।
मॉड्यूलरिटी और लचीलापन (Modularity & Flexibility)10%नए तकनीकी बदलावों और अपग्रेड्स को आसानी से स्वीकार करने की क्षमता।
स्केलेबिलिटी (Scalability)05%अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले दिनों में भारी ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को संभालने की क्षमता।
घटना प्रबंधन (Incident Handling)05%साइबर हमलों या गलिच के बाद त्वरित उपचारात्मक और सुधारात्मक कार्रवाई।

शेयर बाजार के लिए इसका महत्व:

  • वित्तीय स्थिरता का संरक्षण (Preserving Financial Stability): भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे तेज T+1 और टी+0 (T+0 Settlement) निपटान चक्रों में से एक का संचालन कर रहा है। ऐसी स्थिति में किसी भी एक्सचेंज में एक मिनट का भी डाउनटाइम पूरे वित्तीय बाजार को झटका लगा सकता है। यह इंडेक्स व्यवस्थागत विफलताओं को रोकने में मदद करेगा।
  • सक्रिय सुरक्षा मॉडल (Proactive Security Model): यह ढांचा केवल पारंपरिक ऑडिटिंग (Static Compliance) पर निर्भर रहने के बजाय वास्तविक समय की परिचालन क्षमता (Live Operational Readiness) का परीक्षण करता है।
  • अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System): इसके साथ अनिवार्य किया गया ईडब्ल्यूएस (EWS) सिस्टम में सुस्ती या लेटेंसी स्पाइक्स (Latency Spikes) का पहले ही पता लगा लेता है, जिससे बड़ी तकनीकी खराबी आने से पहले सुधारात्मक उपाय किए जा सकते हैं।
  • वैश्विक मानक की स्थापना (Setting Global Benchmark): सूचना प्रौद्योगिकी लचीलापन सूचकांक (IT Resilience Index India) को लागू करके भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन रहा है जो आईटी जोखिम को एक विशिष्ट संख्यात्मक स्कोर में बदल रहा है। यह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के बीच भारतीय बाजार के प्रति विश्वास और साइबर लचीलापन (Cyber Resilience India) को अभूतपूर्व बढ़ावा देगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. SEBI IT Resilience Index 2026 क्या है?

    यह सेबी (SEBI) द्वारा जारी किया गया 100 अंकों का एक डिजिटल स्कोरकार्ड है, जो शेयर बाजार के बुनियादी ढांचे की तकनीकी मजबूती और साइबर सुरक्षा का आकलन करता है।

  2. SEBI ने IT Resilience Index क्यों जारी किया है?

    इसका उद्देश्य बाजार की तकनीकी प्रणालियों में आने वाली कमियों या साइबर हमलों (Cyber Security) को शुरुआती चरण में पहचानना और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

  3.  IT Resilience Index से Stock Market की Cyber Security कैसे मजबूत होगी?

    यह सूचकांक सुरक्षा (Security) और उपलब्धता को 20-20% का सर्वाधिक महत्व देता है, जिससे संस्थान अपनी साइबर सुरक्षा प्रणालियों को लगातार मजबूत और अप-टू-डेट रखने के लिए बाध्य होंगे।

  4. किन संस्थानों पर SEBI IT Resilience Index लागू होगा?

    यह भारत के सभी मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) जैसे स्टॉक एक्सचेंजों (BSE, NSE), क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स और डिपॉजिटरीज (CDSL, NSDL) पर लागू होगा।

  5. Market Infrastructure Institutions की IT Resilience कैसे मापी जाएगी?

    इसकी गणना उपलब्धता, सुरक्षा, व्यावसायिक निरंतरता और स्केलेबिलिटी सहित 9 विशिष्ट मापदंडों पर एक पूर्णतः स्वचालित, सिस्टम-संचालित प्रक्रिया द्वारा की जाएगी।

  6. Cyber Attack होने पर IT Resilience Index कैसे मदद करेगा?

    यह संस्थान की रिकवरी टाइम ऑब्जेक्टिव (RTO) और घटना प्रबंधन (Incident Handling) दक्षता को ट्रैक करता है, जिससे हमला होने के बाद प्रणालियाँ न्यूनतम समय में दोबारा चालू हो सकें।

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