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Indigenous Military Combat Parachute System- जानिए DRDO द्वारा विकसित कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम की खासियत 

Indigenous Military Combat Parachute System- जानिए DRDO द्वारा विकसित कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम की खासियत 

Indigenous Military Combat Parachute System

संदर्भ:

हाल ही में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने पूर्वी लद्दाख के अत्यधिक ऊंचे क्षेत्र में स्वदेशी मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (Indigenous Military Combat Parachute System – MCPS) का सफल परीक्षण किया। 

स्वदेशी मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (MCPS) के बारे मे:

  • परिचय: Indigenous Military Combat Parachute System भारतीय सैन्य बलों के विशेष दस्तों (Special Forces) के लिए विकसित एक उन्नत, उच्च-ऊंचाई परिचालन क्षमता वाला लड़ाकू पैराशूट सिस्टम है।
    • यह पैराशूट अत्यधिक विपरीत मौसम और कम वायुमंडलीय दबाव वाले क्षेत्रों में सैनिकों और उनके युद्ध उपकरणों को सुरक्षित हवाई ड्रॉप (Air Drop) करने में सक्षम है।
  • विकासकर्ता: इस प्रणाली को डीआरडीओ की आगरा स्थित प्रयोगशाला एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE) द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
    • इसमें प्रयुक्त जीवन-रक्षक और शारीरिक सहायता उपकरणों का विकास डिफेंस बायोइंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रोमेडिकल लेबोरेटरी (DEBEL), बेंगलुरु द्वारा किया गया है।
  • परीक्षण: 
    • स्थान: यह परीक्षण लद्दाख के लेह जिले में स्थित न्योमा-मुध ड्रॉप जोन (Nyoma-Mudh Drop Zone) में किया गया, जो दुनिया के सबसे ऊंचे ड्रॉप जोन में से एक है।
    • तापमान और ऊंचाई: डीआरडीओ के टेस्ट जंपर्स (जैसे विंग कमांडर राहुल झा) ने औसत समुद्र तल से 22,000 फीट की ऊंचाई से माइनस 15 डिग्री सेल्सियस (-15°C) के अत्यधिक ठंडे तापमान में छलांग लगाई।
  • विशेषताएं: 
    • परिचालन सीमा: यह सिस्टम 32,000 फीट तक की ऊंचाई से ‘कॉम्बैट फ्रीफॉल’ (Combat Freefall) करने में सक्षम है। यह वर्तमान में 25,000 फीट से ऊपर संचालित होने वाला भारतीय सेना का एकमात्र पैराशूट सिस्टम है।
    • पेलोड क्षमता (Payload Capacity): यह पूर्ण युद्ध गियर (Combat Gear) के साथ 200 किलोग्राम तक का अधिकतम भार वहन कर सकता है।
    • स्वदेशी पैरा कंप्यूटर (Para-Computer): यह हवा की गति, दिशा और ऊंचाई का वास्तविक समय (Real-time) में विश्लेषण कर सटीक लैंडिंग में मदद करता है।
    • स्वदेशी ऑक्सीजन प्रणाली (Oxygen System): अत्यधिक ऊंचाई पर पतली हवा के कारण होने वाले हाइपोक्सिया (Hypoxia) से सैनिक को बचाने के लिए उन्नत जीवन रक्षक ऑक्सीजन सुइट।
    • नाविक (NavIC) संगतता: यह प्रणाली भारत के स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन सिस्टम NavIC (Navigation with Indian Constellation) से लैस है। यह विदेशी जीपीएस पर निर्भरता हटाता है और इसे दुश्मन द्वारा जाम (Jam) नहीं किया जा सकता।
    • नियंत्रित अवतरण दर (Slower Descent Rate): इसका विशेष डिजाइन उतरने की गति को धीमा करता है, जिससे पहाड़ी और पथरीली सतह पर लैंडिंग शॉक (Landing Shock) न्यूनतम हो जाता है।

महत्व:

  • अत्यधिक ऊंचाई वाले ऑपरेशन्स में बढ़त (Dominance in High Altitude Military Operations): वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ जारी गतिरोध के बीच, न्योमा में किया गया यह Nyoma Ladakh Parachute Trial भारतीय सेना को सीमा पार त्वरित और गुप्त हवाई घुसपैठ (Tactical Air Insertion) की अभूतपूर्व क्षमता प्रदान करता है।
  • विदेशी निर्भरता की समाप्ति (Ending Foreign Dependence): अब तक भारत को विशेष सैन्य बलों के लिए ऐसे जटिल और जीवन-रक्षक पैराशूट प्रणालियों को विदेशों से महंगे दामों पर आयात करना पड़ता था। इस स्वदेशी मिलिट्री कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम (Military Combat Parachute System) के आने से विदेशी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता खत्म हुई है।
  • ‘आत्मनिर्भर भारत’ को गति (Boosting Atmanirbhar Bharat Defence): यह सफलता रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया (Make in India) और आत्मनिर्भरता के विजन को सुदृढ़ करती है, जो स्वदेशी तकनीकी डिज़ाइन और उत्पादन क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करती है।
  • सामरिक गोपनीयता और अचूक सटीकता: नाविक (NavIC) और स्टीयरिंग नियंत्रण के कारण विशेष कमांडो घने कोहरे या अंधेरे में भी दुश्मन की रडार पकड़ में आए बिना सीधे अपने लक्षित ड्रॉप जोन पर उतर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. Military Combat Parachute System क्या है?

     यह विशेष सैन्य बलों (Special Forces) के लिए विकसित एक उन्नत पैराशूट प्रणाली (MCPS) है, जो अत्यधिक ऊंचाई से हथियारों के साथ सुरक्षित सामरिक लैंडिंग सुनिश्चित करती है।

  2. DRDO ने Combat Parachute System का परीक्षण कहां किया?

    डीआरडीओ (DRDO) की प्रयोगशाला एडीआरडीई (ADRDE) ने इसका सफल परीक्षण पूर्वी लद्दाख के न्योमा में स्थित मुध ड्रॉप जोन (Mudh Drop Zone) में किया है।

  3. लद्दाख में Combat Parachute का परीक्षण कितनी ऊंचाई पर हुआ?

    टेस्ट जंपर्स ने 22,000 फीट की ऊंचाई से समुद्र तल से ऊपर छलांग लगाई, जहां पैराशूट 20,000 फीट पर खुला और 13,700 फीट पर सुरक्षित लैंडिंग हुई।

  4. Indigenous Military Combat Parachute System की खासियत क्या है?

    यह -15°C में काम करने योग्य, 200 किग्रा क्षमता, नाविक (NavIC) नेविगेशन, स्वदेशी पैरा कंप्यूटर और एकीकृत ऑक्सीजन लाइफ-सपोर्ट सिस्टम से लैस है।

  5. इस Parachute System का Indian Army के लिए क्या महत्व है?

    यह भारतीय सेना (Indian Army Combat Parachute) को चीन और पाकिस्तान सीमाओं पर अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में त्वरित, गुप्त और आत्मनिर्भर हवाई ऑपरेशन्स की शक्ति देता है।

  6. High Altitude में Parachute Testing क्यों चुनौतीपूर्ण होती है?

    अत्यधिक ऊंचाई पर हवा का घनत्व (Air Density) बहुत कम होता है जिससे पैराशूट खोलने में कठिनाई होती है, तथा अत्यधिक ठंड (-15°C) और तीव्र हवाएं मानव शरीर एवं उपकरणों को जमा देती हैं।

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