Self-reliant scheme
संदर्भ:
लोकसभा में हाल ही में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा “स्वावलंबिनी” (Swavalambini) योजना के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की गई है।
स्वावलंबिनी योजना के बारे में:
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- परिचय: स्वावलंबिनी एक महिला उद्यमिता कार्यक्रम है, जो वर्तमान में एक पायलट प्रोजेक्ट (प्रायोगिक परियोजना) के रूप में संचालित है।
- नोडल मंत्रालय: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE)।
- सहयोग: नीति आयोग के ‘महिला उद्यमिता मंच’ (Women Entrepreneurship Platform – WEP)
- कार्यान्वयन एजेंसियां: राष्ट्रीय उद्यमिता और लघु व्यवसाय विकास संस्थान (NIESBUD), नोएडा और भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी।
- प्रारंभ: इसे फरवरी 2025 में आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया था।
- उद्देश्य: उद्यमी मानसिकता का विकास, कौशल और आत्मविश्वास, व्यवसाय निर्माण में सहायता और उद्योग विशेषज्ञों के साथ जोड़कर मार्गदर्शन (Mentorship) सुनिश्चित करना।
- भौगोलिक कवरेज: पायलट चरण में यह योजना विशेष रूप से निम्नलिखित राज्यों के चुनिंदा उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू है:
- पूर्वोत्तर क्षेत्र: असम, मेघालय और मिजोरम।
- अन्य राज्य: उत्तर प्रदेश और तेलंगाना।
- पात्रता: इन राज्यों के चिन्हित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राएं, विशेषकर अंतिम वर्ष की स्नातक और स्नातकोत्तर छात्राएं।
- बजट: MSDE ने इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 40,46,016 रुपये आवंटित किए हैं। इसमें से 10,11,504 रुपये संस्थानों को जारी किए जा चुके हैं।
योजना के मुख्य घटक:
- उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम (EAP): यह 2-दिवसीय परिचयात्मक सत्र है। पायलट चरण में लगभग 1200 छात्राओं को इसके तहत जागरूक किया गया है।
- महिला उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP): जागरूक छात्राओं में से 600 का चयन कर उन्हें 40 घंटे का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें वित्तीय साक्षरता, बाजार जुड़ाव और कानूनी अनुपालन शामिल हैं।
- मेंटरशिप और हैंडहोल्डिंग: प्रशिक्षण के बाद 21 सप्ताह (लगभग 6 महीने) की निरंतर सहायता प्रदान की जाती है।
- संकाय विकास कार्यक्रम (FDP): विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए 5-दिवसीय प्रशिक्षण ताकि वे कैंपस में ही भविष्य के उद्यमियों को गाइड कर सकें।
- अवार्ड टू रिवॉर्ड (ATR): सफल महिला उद्यमियों को सम्मानित करना ताकि अन्य छात्राएं प्रेरित हों।
महत्व:
यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है, जो शिक्षा के साथ कौशल और उद्यमिता के एकीकरण पर जोर देती है। यह भारत की आर्थिक प्रगति में ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) के दृष्टिकोण को सशक्त बनाती है।

