Shigellosis outbreak in Kerala
संदर्भ:
हाल ही में केरल के कोझिकोड जिले, विशेष रूप से कुट्टिकट्टूर क्षेत्र में शिगेलोसिस के नए मामलों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इस संक्रमण के कारण एक 3 वर्षीय बच्ची की मृत्यु हो गई है और राज्य भर में लगभग 15 से अधिक पुष्ट मामले सामने आए हैं।
शिगेलोसिस क्या है?
शिगेलोसिस एक अत्यधिक संक्रामक आंतों का संक्रमण है जो शिगेला (Shigella) नामक बैक्टीरिया के समूह के कारण होता है। यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से मनुष्यों को प्रभावित करता है और दुनिया भर में बैक्टीरियल डायरिया (दस्त) के प्रमुख कारणों में से एक है।
मुख्य विशेषताएं:
- रोगज़नक़ (Pathogen): यह ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया है। इसकी प्रमुख प्रजातियां Shigella sonnei, Shigella flexneri, Shigella boydii और Shigella dysenteriae हैं।
- संचरण (Transmission): यह फैकल-ओरल रूट (Fecal-oral route) से फैलता है।
- दूषित भोजन या पानी के सेवन से।
- संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से।
- स्वच्छता की कमी और हाथ न धोने जैसी आदतों के कारण।
- अति संवेदनशील समूह: 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे सबसे अधिक जोखिम में होते हैं क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) विकसित हो रही होती है।
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लक्षण: संक्रमण के लक्षण आमतौर पर बैक्टीरिया के संपर्क में आने के 1-2 दिनों के भीतर शुरू होते हैं:
- दस्त (Diarrhea): अक्सर खूनी दस्त या बलगम युक्त दस्त।
- पेट में ऐंठन और दर्द: पेट में तेज मरोड़ होना।
- बुखार: अचानक तेज बुखार आना।
- गंभीर स्थिति: अनुपचारित रहने पर यह रीएक्टिव आर्थराइटिस, दौरे (Seizures), और किडनी खराब होने (Hemolytic Uremic Syndrome) जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
निवारक उपाय:
- हाथ धोना: विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से हाथ धोने से शिगेला संक्रमण के प्रसार को 70% तक कम किया जा सकता है।
- पानी का शुद्धिकरण: पीने के पानी को उबालना या फिल्टर/आरओ (RO) का उपयोग करना संक्रमण से बचने का प्राथमिक तरीका है।
भारत सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं और कार्यक्रम:
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- एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP): यह कार्यक्रम शिगेलोसिस जैसे महामारी संभावित रोगों के आंकड़ों को एकत्रित करता है और इनके प्रकोप का पता लगाकर समय पर प्रतिक्रिया देने में राज्यों की मदद करता है।
- राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC): यह संस्थान जलजनित रोगों की निगरानी, जांच, प्रयोगशाला परीक्षण और स्वास्थ्य कर्मियों के क्षमता निर्माण (Capacity Building) के लिए राज्यों को तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): इसके तहत जिला स्तर तक के स्वास्थ्य संस्थानों को जलजनित रोगों के प्रबंधन और उपचार के लिए मजबूत किया जाता है।
- नेशनल स्टॉप डायरिया कैंपेन (National STOP Diarrhoea Campaign): जून 2024 में शुरू किए गए इस अभियान का लक्ष्य बच्चों में डायरिया से होने वाली मृत्यु दर को शून्य तक ले जाना है।
- जल जीवन मिशन (JJM): 2019 में शुरू हुए इस मिशन का उद्देश्य 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर को ‘कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन’ (FHTC) के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
- स्वच्छ गाँव, शुद्ध जल- बेहतर कल: जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित जल और स्वच्छता प्रथाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह विशेष अभियान चलाया गया है।
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