Shipki La Pass
संदर्भ:
हाल ही में, भारत सरकार ने संसद में सूचित किया कि शिपकी ला (Shipki La) दर्रे को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए एक अतिरिक्त मार्ग के रूप में खोलने हेतु चीन के साथ बातचीत जारी है।
शिपकी ला दर्रे के बारे में:
- स्थान: शिपकी ला हिमालय का एक प्रमुख पहाड़ी दर्रा है जो भारत और तिब्बत (चीन) को जोड़ता है। यह हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित है।
- ऊँचाई: समुद्र तल से इसकी ऊँचाई लगभग 3,930 मीटर (12,894 फीट) है।
- प्रवेश द्वार: यह दर्रा सतलुज नदी का भारत में प्रवेश मार्ग है। तिब्बत में ‘लांगचेन जंगबो’ के नाम से जानी जाने वाली सतलुज इसी दर्रे के पास से होकर भारत में आती है।
- कनेक्टिविटी: यह राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) के माध्यम से शिमला और शेष भारत से जुड़ा है।
- प्राचीन सिल्क रोड: शिपकी ला प्राचीन सिल्क रोड की एक शाखा का हिस्सा था। सदियों से यहाँ से ऊन, खनिज और मसालों का व्यापार होता रहा है।
- व्यापारिक समझौता: 1962 के युद्ध के बाद, इसे 1994 में भारत-चीन सीमा व्यापार के लिए फिर से खोला गया था। यह लिपुलेख और नाथू ला के बाद भारत का तीसरा आधिकारिक सीमा व्यापार पोस्ट है।
- LAC की स्थिति: यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर एक संवेदनशील बिंदु है, जिसकी सुरक्षा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) द्वारा की जाती है।
- साझा विरासत: सीमा के दोनों ओर के समुदायों (जैसे किन्नौरी और तिब्बती) के बीच गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध हैं। यहाँ बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म की परंपराओं का अद्भुत संगम मिलता है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नया मार्ग:
वर्तमान में यात्रा मुख्य रूप से दो मार्गों—लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला (सिक्किम) से संचालित होती है। शिपकी ला को तीसरे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है:
- दूरी और समय: शिपकी ला मार्ग दिल्ली से कैलाश की दूरी को काफी कम कर सकता है। अनुमान है कि यह यात्रा के समय में 10-14 दिनों की कमी ला सकता है।
- सुगम मार्ग: लिपुलेख की तुलना में यह मार्ग कम कठिन माना जाता है, क्योंकि यहाँ तक सड़क मार्ग का विस्तार काफी बेहतर है।
- आर्थिक लाभ: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मार्ग के खुलने से किन्नौर और सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘बॉर्डर टूरिज्म’ को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजित होगा।
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1. लिपुलेख दर्रा (Lipulekh Pass)
2. नाथू ला (Nathu La)
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