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Son River Water Sharing Agreement, 25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद सुलझा

Son River Water Sharing Agreement, 25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद सुलझा

Son River Water Sharing Agreement

संदर्भ:

हाल ही में 31 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में सोन नदी जल बंटवारा समझौते (Son River Water Sharing Agreement) पर हस्ताक्षर किए गए. इसके साथ ही बिहार और झारखंड के बीच 25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद (25 Year Old Son River Dispute) पूरी तरह सुलझ गया.

सोन नदी (Son River) के बारे में:

  • उद्गम स्थल: सोन नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित अमरकंटक की पहाड़ियों से होता है. यह नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के समीप से ही निकलती है.
  • प्रवाह क्षेत्र: यह नदी भारत के चार प्रमुख राज्यों—मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार से होकर गुजरती है.
  • कुल लंबाई: सोन नदी की कुल लंबाई लगभग 784 किलोमीटर है.
  • सहायक नदियाँ: इसकी प्रमुख सहायक नदियों में रिहंद, उत्तरी कोयल, गोपद और कन्हार शामिल हैं.
  • अंतिम छोर: यह उत्तर-पूर्व दिशा में बहते हुए बिहार के पटना जिले में मनेर के पास गंगा नदी में विलीन हो जाती है. यह गंगा की सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक नदियों में से एक है. 
  • पृष्ठभूमि: ऐतिहासिक रूप से सोन नदी बेसिन (Son River Basin) पूर्वी भारत के कृषि ढांचे की जीवनरेखा रहा है. इसके जल प्रबंधन के लिए ब्रिटिश काल से ही बुनियादी नहर प्रणालियों (Son River Irrigation) का विकास किया गया था.

25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद क्या है? (What is the Son River Water Dispute?)

  • पृष्ठभूमि: इस विवाद की जड़ें 1973 के बाणसागर समझौते से जुड़ी हैं. मध्य प्रदेश में स्थित बाणसागर परियोजना के निर्माण के समय मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अविभाजित बिहार के बीच एक त्रिपक्षीय जल बंटवारा समझौता (Son River Basin Agreement) हुआ था. इसके तहत संयुक्त बिहार के लिए 7.75 मिलियन एकड़ feet (MAF) पानी आवंटित किया गया था.
    • विवाद की वास्तविक शुरुआत नवंबर 2000 में बिहार के विभाजन और नए राज्य के रूप में झारखंड के गठन के बाद हुई. विभाजन के बाद, संयुक्त बिहार को आवंटित 7.75 MAF पानी के आंतरिक हिस्सेदारी का कोई स्पष्ट विधिक फार्मूला नहीं था. 
  • तर्क:
    • झारखंड सरकार का पक्ष: झारखंड का तर्क था कि सोन नदी का एक बहुत बड़ा जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) और इसकी प्रमुख सहायक नदी (उत्तरी कोयल) उसके भौगोलिक क्षेत्र में आती हैं. इसलिए पलामू और गढ़वा जैसे सूखा प्रवण पठारी क्षेत्रों के लिए उन्हें इस जल में से एक बड़ा और परिभाषित हिस्सा मिलना चाहिए.
    • बिहार सरकार का पक्ष: बिहार का तर्क 1973 के मूल बाणसागर समझौते पर आधारित था. बिहार का कहना था कि सोन नहर प्रणाली (Sone Canal System) से दक्षिण बिहार के आठ जिलों की कृषि पूरी तरह इस पानी पर निर्भर है, इसलिए इस कोटे में कटौती नहीं की जानी चाहिए. 
  • समाधान के प्रयास: इस अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद (Inter State River Water Dispute) को सुलझाने के लिए केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission – CWC) की अध्यक्षता में कई तकनीकी समितियों का गठन किया गया. मामला सुप्रीम कोर्ट के विधिक क्षेत्राधिकार के विमर्श में भी रहा.
    • एक बड़ा नीतिगत मोड़ 10 जुलाई 2025 को रांची में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद (Eastern Zonal Council) की बैठक में आया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री ने की थी. इसके बाद जनवरी 2026 में दोनों राज्यों की कैबिनेट ने इस दिशा में मसौदा सहमति पत्रों को अपनी स्वीकृति दी थी.
    • सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में 31 अगस्त 2026 को इस ऐतिहासिक समझौते (Son River Water Sharing Pact) पर अंतिम मुहर लगी:
  • यह समझौता नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की गरिमामयी उपस्थिति और मध्यस्थता में संपन्न हुआ. 
  • इस ऐतिहासिक सहमति पत्र (MoU) पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दोनों राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों ने औपचारिक हस्ताक्षर किए.
  • जल आवंटन के मुख्य प्रावधान (Water Allocation Formula):
    • पूर्ववर्ती अविभाजित बिहार के 7.75 MAF के कुल कोटे को दोनों राज्यों के बीच तर्कसंगत तरीके से विभाजित किया गया है.
    • इस फार्मूले के तहत बिहार को 5.75 MAF पानी प्राप्त होगा.
    • झारखंड को 2.00 MAF पानी का स्थायी हिस्सा आवंटित किया गया है.
  • इस समझौते के सबसे बड़े प्रावधान के तहत रोहतास जिले में स्थित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना (Indrapuri Reservoir Project) के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जो पिछले 53 वर्षों से अंतर-राज्यीय असहमति के कारण लंबित थी.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: सोन नदी जल बंटवारा समझौता क्या है?

उत्तर: यह बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के 7.75 MAF पानी की हिस्सेदारी को तय करने के लिए 31 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में किया गया एक ऐतिहासिक समझौता (Son River Water Sharing Agreement) है. 

प्रश्न 2: 25 साल पुराना Son River Water Dispute कैसे सुलझा?

उत्तर: यह विवाद केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग (CWC) की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच आपसी संवाद और सहकारी संघवाद की नीति से सुलझा है.

प्रश्न 3: सोन नदी का जल किन राज्यों के बीच बांटा जाता है?

उत्तर: मूल रूप से इसका जल मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के बीच साझा होता है, जिसमें वर्तमान विवाद मुख्य रूप से बिहार और झारखंड के बीच था. 

प्रश्न 4: Son River Water Sharing Agreement में क्या तय किया गया है?

उत्तर: समझौते के तहत कुल 7.75 MAF पानी में से बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.00 MAF पानी का हिस्सा आवंटित करने का कानूनी प्रावधान किया गया है.

प्रश्न 5: सोन नदी का पानी किन राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह पानी बिहार के मैदानी कृषि क्षेत्रों (जैसे रोहतास, भोजपुर) और झारखंड के सूखा प्रवण पठारी जिलों (जैसे पलामू, गढ़वा) की सिंचाई तथा पेयजल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. 

प्रश्न 6: सोन नदी विवाद कितने वर्षों से चल रहा था?

उत्तर: यह विवाद वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बनने के समय से यानी लगभग 25 वर्षों से लगातार लंबित चल रहा था.

प्रश्न 7: इस समझौते से Bihar को क्या फायदा होगा?

उत्तर: बिहार के 8 जिलों में सोन नहर प्रणाली को पर्याप्त पानी मिलेगा, कृषि उत्पादन (Agriculture Production) बढ़ेगा और रुकी हुई इंद्रपुरी जलाशय परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा.

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