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State of the World’s Birds Report 2026 जारी, दुनिया की लगभग आधी प्रवासी पक्षी प्रजातियों की संख्या घटी

State of the World’s Birds Report 2026 जारी, दुनिया की लगभग आधी प्रवासी पक्षी प्रजातियों की संख्या घटी

State of the World's Birds Report 2026

संदर्भ:

हाल ही में बर्डलाइफ इंटरनेशनल (BirdLife International) द्वारा 11 सितंबर 2026 को नैरोबी (केन्या) में आयोजित ग्लोबल फ्लाईवेज समिट (Global Flyways Summit) के दौरान ‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स बर्ड्स रिपोर्ट 2026’ (State of the World’s Birds Report 2026) का छठा संस्करण आधिकारिक तौर पर जारी किया गया है. 

‘स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स बर्ड्स रिपोर्ट 2026’ के मुख्य निष्कर्ष:

  • प्रवासी पक्षियों की आबादी में भारी गिरावट: रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर की कुल 1,843 प्रवासी पक्षी प्रजातियों (Migratory Bird Species) में से 45% की वैश्विक आबादी लगातार घट रही है.
  • स्थिर और बढ़ती प्रजातियाँ: केवल 30% प्रवासी प्रजातियों की आबादी स्थिर (Stable) पाई गई है, जबकि मात्र 14% की आबादी में वृद्धि दर्ज की गई है. शेष 11% प्रजातियों के रुझान अज्ञात हैं.
  • विलुप्ति का बढ़ता जोखिम: रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 11% प्रवासी पक्षी (लगभग 200 प्रजातियां) विलुप्ति के गंभीर कगार पर हैं.
  • गंभीर रूप से संकटग्रस्त: इन संकटग्रस्त प्रजातियों में से 32 को ‘क्रिटिकल एंडेंजर्ड’ (Critically Endangered), 57 को ‘एंडेंजर्ड’ (Endangered), और 111 को ‘वल्नरेबल’ (Vulnerable) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है.
  • ऐतिहासिक विलुप्ति: रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि ‘स्लेंडर-बिल्ड कर्लेव’ (Slender-billed Curlew) पक्षी वर्ष 2025 में पूरी तरह विलुप्त हो गया. यह हाल की शताब्दियों में मुख्य भूमि यूरेशिया और अफ्रीका में पहली वैश्विक पक्षी विलुप्ति दर्ज की गई है.
    • समुद्री आवासों (Marine Habitats), जंगलों और तटीय आर्द्रभूमियों (Coastal Wetlands) पर निर्भर रहने वाले पक्षी सबसे बुरी स्थिति में हैं. इनमें समुद्री पक्षी (Seabirds) और तटवर्ती पक्षी (Shorebirds) सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं.
  • सुरक्षा अंतराल: रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि गैर-प्रवासी पक्षियों की 45% सुरक्षा की तुलना में, प्रवासी पक्षी प्रजातियों में से केवल 9% को ही उनके पूरे जीवन चक्र (Full Migration Route) के दौरान पर्याप्त कानूनी और भौगोलिक संरक्षण प्राप्त है.
  • प्रमुख कारण:
    • आवास का नुकसान (Habitat Loss): कृषि विस्तार, शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण पक्षियों के रुकने के स्थान (Stopover Sites) नष्ट हो रहे हैं.
    • कृषि का आधुनिकीकरण (Agricultural Intensification): कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग और मोनोकल्चर खेती के कारण पक्षियों के लिए भोजन (कीट-पतंगे) समाप्त हो रहे हैं.
    • जलवायु परिवर्तन (Climate Change): बदलते मौसम चक्र के कारण पक्षियों के प्रवास के समय और भोजन की उपलब्धता में असंतुलन पैदा हो रहा है.
    • अवैध शिकार (Unsustainable Hunting): उड़ान मार्गों (Flyways) के दौरान कई देशों में इन पक्षियों का बड़े पैमाने पर अवैध शिकार किया जाता है.
    • आक्रामक प्रजातियाँ (Invasive Species): द्वीप पारिस्थितिकी प्रणालियों में बाहरी जीवों के प्रवेश से पक्षियों के अंडों और घोंसलों को भारी नुकसान पहुँच रहा है.
  • नैरोबी फ्लाईवेज घोषणापत्र: इस संकट से निपटने के लिए ग्लोबल फ्लाईवेज समिट (Global Flyways Summit) में में सरकारों, वैज्ञानिकों और नागरिक समाजों ने सीमा पार से प्रवासी पक्षियों के मार्गों को संरक्षित करने के लिए नैरोबी फ्लाईवेज घोषणापत्र (Nairobi Flyways Declaration) पर हस्ताक्षर किए.
  • वित्तीय सहयोग:
    • $6 बिलियन का वैश्विक फंड: वर्ष 2021 से अब तक विभिन्न विकास बैंकों द्वारा $6 बिलियन (6 अरब डॉलर) से अधिक का संरक्षण वित्त (Conservation Finance) जुटाया जा चुका है.
    • एशियाई विकास बैंक (ADB): यह बैंक अगले दशक में ईस्ट एशियन-ऑस्ट्रेलियाशियन फ्लाईवे (East Asian-Australasian Flyway) के तहत कम से कम 50 प्राथमिकता वाले आर्द्रभूमियों की सुरक्षा के लिए $3 बिलियन का निवेश कर रहा है.

जारीकर्ता संस्था बर्डलाइफ इंटरनेशनल (BirdLife International) के बारे में:

  • परिचय: यह राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों का एक वैश्विक संघ या अंतरराष्ट्रीय साझेदारी (International Partnership) है, जो पक्षियों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए बनाया गया है.
  • स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 1922 में ‘इंटरनेशनल कमेटी फॉर बर्ड प्रिजर्वेशन’ के रूप में हुई थी, जिसे 1993 में बदलकर बर्डलाइफ इंटरनेशनल (BirdLife International) किया गया.
  • मुख्यालय: इसका वैश्विक मुख्यालय कैंब्रिज, यूनाइटेड किंगडम (UK) में स्थित है.
  • आईयूसीएन रेड लिस्ट अथॉरिटी (Red List Authority): यह संगठन आईयूसीएन (IUCN) रेड लिस्ट के तहत दुनिया के सभी पक्षियों के लिए आधिकारिक मूल्यांकनकर्ता (Official Assessor) के रूप में कार्य करता है.
  • महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (IBA): इसके द्वारा दुनिया भर में 13,000 से अधिक ‘महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र’ (Important Bird and Biodiversity Areas – IBAs) की पहचान की गई है.
  • भारत में भागीदार: भारत में इसका आधिकारिक राष्ट्रीय भागीदार बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) है, जिसने भारत में 460 से अधिक IBA स्थलों की मैपिंग की है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: State of the World’s Birds Report 2026 में क्या सामने आया?

उत्तर: रिपोर्ट में सामने आया है कि दुनिया भर की लगभग आधी प्रवासी पक्षी प्रजातियों की आबादी घट रही है और कई विलुप्त होने की कगार पर हैं.

प्रश्न 2: दुनिया में कितनी Migratory Bird Species की संख्या घट रही है?

उत्तर: वैश्विक स्तर पर मूल्यांकित की गई कुल 1,843 प्रवासी प्रजातियों में से 45% (लगभग 830 प्रजातियां) की संख्या में निरंतर गिरावट (Migratory Birds Decline) आ रही है.

प्रश्न 3: Migratory Birds Population Decline के प्रमुख कारण क्या हैं?

उत्तर: इसके प्रमुख कारणों में प्राकृतिक आवासों का विनाश (Habitat Loss), कृषि का औद्योगिकीकरण, जलवायु परिवर्तन, अवैध शिकार और आक्रामक प्रजातियों का प्रसार शामिल हैं.

प्रश्न 4: Bird Population Decline में habitat loss की क्या भूमिका है?

उत्तर: कृषि और शहरी विस्तार के कारण पक्षियों के रुकने, भोजन प्राप्त करने और प्रजनन करने वाले तटीय व आर्द्रभूमि स्थल (Wetlands) पूरी तरह नष्ट हो रहे हैं.

प्रश्न 5: BirdLife International Report के अनुसार कितनी प्रवासी पक्षी प्रजातियां खतरे में हैं?

उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार, 11% (यानी 200 प्रवासी प्रजातियां) वैश्विक स्तर पर विलुप्ति के अत्यधिक जोखिम (Extinction Risk) का सामना कर रही हैं.

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