सुपर अल नीनो 2026-27 | Super El Niño 2026-27

संदर्भ:
हाल ही में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2026-27 में दुनिया एक ‘सुपर अल नीनो’ (Super El Niño) का सामना कर सकती है। वर्तमान में ला नीना (La Niña) की स्थिति कमजोर हो रही है और मध्य-2026 तक अल नीनो के उभरने की 62% संभावना है।
‘सुपर अल नीनो’ क्या है?
सामान्य अल नीनो में समुद्र की सतह का तापमान (SST) औसत से 0.5°C अधिक होता है। जब यह विसंगति 2°C या उससे अधिक हो जाती है, तो इसे ‘सुपर अल नीनो’ (या अनौपचारिक रूप से ‘गॉडज़िला’ अल नीनो) कहा जाता है।
- प्रक्रिया: दक्षिण प्रशांत महासागर में व्यापारिक हवाएं (Trade Winds) कमजोर हो जाती हैं, जिससे गर्म पानी दक्षिण अमेरिका के तट की ओर (पूर्व दिशा में) बहने लगता है।
- वॉकर सर्कुलेशन (Walker Circulation): अल नीनो के दौरान यह वायुमंडलीय परिसंचरण कमजोर हो जाता है, जिससे बारिश का पैटर्न पूरी तरह बदल जाता है।
भारत पर प्रभाव:
- मानसून में कमी: प्रशांत महासागर की गर्मी भारतीय उपमहाद्वीप की ओर नमी लाने वाली हवाओं को कमजोर कर देती है, जिससे औसत से कम वर्षा (Deficit Rainfall) होती है।
- सूखा और गर्मी: 2026-27 में मध्य और उत्तर-पश्चिमी भारत में गंभीर सूखे की स्थिति बन सकती है। साथ ही, प्री-मानसून महीनों में भीषण लू (Heatwaves) का प्रकोप बढ़ सकता है।
- कृषि संकट: खरीफ फसलों (चावल, दालें, सोयाबीन) की बुआई प्रभावित होगी, जिससे खाद्य उत्पादन में कमी और खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ सकती है।
वैश्विक प्रभाव:
- तापमान रिकॉर्ड: वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं कि 2027 अब तक का सबसे गर्म वर्ष हो सकता है, जो पेरिस समझौते के 1.5°C की सीमा को पार कर सकता है।
- प्राकृतिक आपदाएं: जहाँ ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में वनाग्नि (Wildfires) का खतरा बढ़ेगा, वहीं दक्षिण अमेरिका के तटीय देशों में भारी बाढ़ आ सकती है। [3, 7, 10, 15]
निवारण और रणनीतिक कदम:
- जलवायु लचीली कृषि (Climate Resilient Agriculture): कम पानी वाली फसलों और सूक्ष्म सिंचाई (Drip Irrigation) को बढ़ावा देना।
- जल प्रबंधन: जलाशयों में जल स्तर की रियल-टाइम निगरानी और जल संरक्षण अभियानों को तेज करना।
- अर्ली वार्निंग सिस्टम: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा जिला स्तर पर सटीक मौसम पूर्वानुमान और ‘हीट एक्शन प्लान’ का प्रभावी कार्यान्वयन।
- वित्तीय सुरक्षा: किसानों के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ का विस्तार ताकि सूखे से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके।