इजराइल और लेबनान के बीच अस्थायी संघर्षविराम | Temporary ceasefire between Israel and Lebanon

संदर्भ:
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता के बाद इज़राइल और लेबनान के बीच 10 दिवसीय ऐतिहासिक संघर्षविराम (Ceasefire) 16 अप्रैल 2026 (भारतीय समयानुसार 17 अप्रैल तड़के) से लागू हो गया है।
पृष्ठिभूमि:
- दोनों देशों के बीच संघर्ष फरवरी 2026 में ईरान और इज़राइल-अमरीका के बीच तनाव बढ़ने के बाद तेज़ हुआ था।
- मार्च 2026 से हिज़्बुल्लाह और इज़राइल के बीच सीमा पर भारी गोलाबारी शुरू हुई, जिसमें अब तक लेबनान में 2,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और लगभग 12 लाख लोग विस्थापित हुए हैं।
संघर्षविराम की मुख्य शर्तें:
- अवधि: यह समझौता प्रारंभिक रूप से 10 दिनों के लिए प्रभावी है, जिसे दोनों पक्षों की सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है।
- आत्मरक्षा का अधिकार: इज़राइल ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी आसन्न या जारी हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा में कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
- सैन्य उपस्थिति: इज़राइली सेना (IDF) दक्षिणी लेबनान में अपनी वर्तमान स्थिति बनाए रखेगी और 10 किमी का सुरक्षा क्षेत्र (Security Zone) बरकरार रखेगी।
- लेबनान की जिम्मेदारी: लेबनान सरकार ने प्रतिबद्धता जताई है कि वह हिज़्बुल्लाह और अन्य सशस्त्र समूहों को इज़राइल पर हमले करने से रोकने के लिए सार्थक कदम उठाएगी।
- सीमित सैन्य अभियान: दोनों पक्ष भूमि, वायु और समुद्र के माध्यम से किसी भी आक्रामक सैन्य अभियान को रोकने पर सहमत हुए हैं।
प्रभाव:
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): संघर्षविराम के लागू होने के तुरंत बाद ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस जलमार्ग को व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खोलने की घोषणा की है।
- कूटनीतिक मील का पत्थर: 1993 के बाद पहली बार इज़राइल और लेबनान के बीच वाशिंगटन में प्रत्यक्ष उच्च-स्तरीय वार्ता हुई है। भारत ने इस शांति पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।
|
इज़राइल-लेबनान संघर्ष का इतिहास:
|