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UNICEF चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026

UNICEF चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026

UNICEF Children Climate Risk Report 2026

संदर्भ:

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने हाल ही में वैश्विक रिपोर्ट ‘Children’s Climate Risk Report 2026’ जारी की। 

UNICEF Climate Risk Report 2026 के मुख्य बिंदु: 

  • वैश्विक जोखिम का स्तर: दुनिया के लगभग आधी आबादी के बच्चे यानी 1.1 बिलियन (110 करोड़) बच्चे एक साथ कम से कम तीन परस्पर जुड़े जलवायु खतरों का सामना कर रहे हैं।
  • मल्टीपल हजार्ड्स का प्रभाव: रिपोर्ट के अनुसार, 4 मिलियन से अधिक बच्चे ऐसे भौगोलिक क्षेत्रों में रह रहे हैं जहाँ उन्हें छह अलग-अलग ‘Environmental Challenges’ का सामना एक साथ करना पड़ रहा है।
  • जटिल अंतर्संबंध: सूखा, अत्यधिक गर्मी (Extreme Heat) और बार-बार आने वाली लू (Heatwaves) का संयोजन दुनिया का सबसे आम त्रिपक्षीय जलवायु संकट बन चुका है। सूखे के कारण फसलें नष्ट होती हैं, जिससे भोजन की कमी होती है, और सूखी वनस्पतियों के कारण दावानल (Wildfires) भड़कती है जो वायु प्रदूषण को बढ़ाती है।
  • अत्यधिक गर्मी का प्रकोप: भारत में रहने वाले 392 मिलियन बच्चे (लगभग 92%) गंभीर ‘Extreme Heat’ की चपेट में हैं। इसके अतिरिक्त, 89 मिलियन बच्चे लगातार आने वाली विनाशकारी हीटवेव का सामना कर रहे हैं।
  • उच्च जोखिम स्कोर: भारत का समग्र पर्यावरण जोखिम स्कोर 10 में से 9.21 आंका गया है, जो वैश्विक स्तर पर बच्चों के लिए सबसे असुरक्षित देशों की श्रेणी में आता है। दक्षिण एशिया में केवल पाकिस्तान (9.44) और बांग्लादेश (9.38) ही भारत से अधिक प्रभावित हैं। 
  • विशिष्ट संकेतक: भारत को अत्यधिक गर्मी के मामले में 10/10 का अधिकतम जोखिम स्कोर मिला है, जबकि वायु प्रदूषण में 9.94 और सूखे के जोखिम में 8.84 स्कोर प्राप्त हुआ हैं।
    • यह सूचकांक मुख्य रूप से दो प्रमुख घटकों को मिलाकर तैयार किया गया है— जलवायु व पर्यावरणीय खतरों का स्तर और बच्चों की अपनी संवेदनशीलता (Child Climate Vulnerability)।
  • सामाजिक सेवाओं में कमी: सूचकांक दर्शाता है कि जिन क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य, स्वच्छ जल (WASH), पोषण और शिक्षा जैसी सामाजिक सेवाओं का बुनियादी ढांचा कमजोर है, वहाँ बच्चों की सहनक्षमता (Adaptive Capacity) न्यूनतम हो जाती है, जिससे वे अंतहीन दुष्चक्र (Vicious Cycle) में फंस जाते हैं।
  • शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य: बच्चों के विकासशील अंग वयस्कों की तुलना में उच्च तापमान और वायु प्रदूषण को झेलने में असमर्थ होते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक और कुपोषण की दर बढ़ रही है।
  • शिक्षा में व्यवधान: अकेले वर्ष 2024-2025 में जलवायु जनित आपदाओं और अत्यधिक गर्मी के कारण वैश्विक स्तर पर 242 मिलियन छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई या स्कूल बंद करने पड़े।
  • विस्थापन का संकट: बाढ़ और चक्रवातों के कारण बड़े पैमाने पर परिवारों का विस्थापन हो रहा है, जिससे बच्चों के खिलाफ हिंसा, बाल श्रम और तस्करी जैसे ‘Child Protection’ के गंभीर मुद्दे सामने आ रहे हैं। 
  • उत्सर्जन में कमी: वैश्विक तापमान को 1.5°C के भीतर सीमित करने के लिए जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की गति तेज की जाए।
  • बाल-केंद्रित अनुकूलन (Child-Centric Adaptation): राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाओं (NAPs) में स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनवाड़ियों को जलवायु-लचीला (Climate-Resilient) बनाने के लिए विशेष वित्तीय आवंटन किया जाए।
  • हीट एक्शन प्लान में सुधार: भारत जैसे देशों को अपने हीट एक्शन प्लान में रात के समय के बढ़ते तापमान के प्रबंधन और बच्चों की आयु-विशिष्ट सुरक्षा को शामिल करना चाहिए। 

यूनिसेफ (UNICEF) के बारे में:

  • स्थापना और पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की स्थापना 11 दिसंबर 1946 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध से प्रभावित बच्चों को भोजन और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी।
    • इसका मुख्यालय न्यूयार्क, संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित है।
  • जनादेश और कार्य: यूनिसेफ दुनिया के 190 से अधिक देशों और क्षेत्रों में बच्चों के जीवन को बचाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और बचपन से लेकर किशोरावस्था तक उनकी क्षमता को पूरा करने में मदद करने के लिए काम करता है।
  • प्रमुख क्षेत्र: इसके मुख्य कार्यों में बाल विकास, बुनियादी शिक्षा, लैंगिक समानता, टीकाकरण, पोषण, स्वच्छ जल और स्वच्छता (WASH) और आपातकालीन आपदाओं में मानवीय सहायता शामिल हैं।
  • शासी संरचना व वित्तपोषण: यूनिसेफ का संचालन एक 36 सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड द्वारा किया जाता है, जो नीतियों की रूपरेखा तैयार करता है।
    • यह पूरी तरह से सरकारों और निजी दाताओं के स्वैच्छिक योगदान पर निर्भर है; इसे संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट से कोई फंड नहीं मिलता है। 

FAQs:

Q1. UNICEF चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026 क्या है?

Ans: यह यूनिसेफ द्वारा जारी एक वैश्विक रिपोर्ट है जो बच्चों पर जलवायु खतरों और उनकी सामाजिक संवेदनशीलता के प्रभाव का सूक्ष्म डेटा प्रस्तुत करती है।

Q2. रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं?

Ans: दुनिया के 1.1 बिलियन बच्चे तीन या अधिक ओवरलैपिंग जलवायु खतरों का सामना कर रहे हैं, और भारत के 92% बच्चे अत्यधिक गर्मी से प्रभावित हैं। 

Q3. Children’s Climate Risk Index क्या है?

Ans: यह एक ऐसा सूचकांक है जो पर्यावरण खतरों के जोखिम और बुनियादी सामाजिक सेवाओं तक बच्चों की पहुंच की कमी के आधार पर बाल संवेदनशीलता मापता है। 

Q4. बच्चों पर जलवायु परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ता है?

Ans: इससे बच्चों का स्वास्थ्य बिगड़ता है, स्कूल बंद होने से शिक्षा बाधित होती है और आपदाओं के कारण विस्थापन व शोषण का खतरा बढ़ता है। 

Q5. यह रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण है?

Ans: यह सरकारों को बाल-केंद्रित नीतियां बनाने, डेटा-आधारित जलवायु अनुकूलन रणनीतियां तैयार करने और कमजोर क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए सटीक मार्गदर्शिका देती है। प्रतीक है।

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