आपातकालीन एकीकृत हेल्पलाइन नंबर

संदर्भ:
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में देशभर के सभी आपातकालीन नंबरों को आगामी तीन महीनों के भीतर एकल हेल्पलाइन नंबर ‘112’ में एकीकृत करने का आदेश दिया।
- न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदूरकर की पीठ ने ‘सेवलाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ’ (SaveLIFE Foundation vs Union of India) मामले में यह निर्णय सुनाया।
- न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को त्वरित ‘ट्रॉमा केयर’ (आपातकालीन चिकित्सा) मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त ‘जीवन के अधिकार’ का एक अभिन्न हिस्सा है।
न्यायिक निर्णय के प्रमुख बिंदु और निर्देश:
न्यायालय ने देश में दुर्घटना पीड़ितों की सुरक्षा और समय पर चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को निम्नलिखित समयावधि-आधारित निर्देश दिए हैं:
- पूर्ण तकनीकी एकीकरण (3 महीने की समय सीमा): पुलिस (100), फायर (101), स्वास्थ्य/एम्बुलेंस (102, 108), नेशनल हाईवे (1033) और महिला हेल्पलाइन (1091) जैसी सभी मौजूदा हेल्पलाइन को अनिवार्य रूप से ‘112’ के साथ जोड़ा जाएगा।
- बहुभाषी प्रचार अभियान: एक महीने के भीतर केंद्र और राज्यों को देशव्यापी स्तर पर बहुभाषी मास-मीडिया जागरूकता अभियान शुरू करने का निर्देश दिया गया है ताकि जनता इस एकल नंबर से परिचित हो सके।
- ‘गुड समैरिटन’ संरक्षण तंत्र: दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों (नेक मददगारों) के उत्पीड़न को रोकने के लिए राज्यों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 134A के तहत एक कार्यात्मक शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करनी होगी।
- कैशलेस उपचार योजना (PM RAHAT): जिन राज्यों ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए ‘PM RAHAT’ कैशलेस उपचार योजना, 2025 को लागू नहीं किया है, उन्हें इसे तीन महीने के भीतर पूर्ण रूप से संचालित करना होगा।
- ट्रॉमा रजिस्ट्री (Trauma Registry): स्वास्थ्य मंत्रालय 8 सप्ताह में डेटा प्रारूप जारी करेगा और राज्य 4 महीनों के भीतर अपनी ट्रॉमा रजिस्ट्री बनाकर केंद्रीय नेटवर्क से जोड़ेंगे।
आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS – 112):
‘112’ हेल्पलाइन मूल रूप से केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा परिकल्पित आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) का हिस्सा है, जिसे तकनीकी रूप से सी-डैक (C-DAC) द्वारा विकसित किया गया है।
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नोडल एजेंसी |
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) |
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तकनीकी भागीदार |
प्रगत संगणन विकास केंद्र (C-DAC) |
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एकीकृत सेवाएं |
पुलिस, अग्नि शमन, स्वास्थ्य, महिला व बाल सुरक्षा |
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पहुंच के माध्यम |
वॉयस कॉल, SMS, पैनिक बटन, ‘112 India’ मोबाइल ऐप |
महत्व:
- भ्रम की समाप्ति: संकट के समय नागरिकों (विशेषकर ग्रामीण और कम साक्षर आबादी) को अलग-अलग नंबर याद रखने की आवश्यकता नहीं होगी।
- ‘गोल्डन आवर’ (Golden Hour) का अनुकूलन: त्वरित प्रतिक्रिया से दुर्घटना के बाद के पहले एक घंटे (गोल्डन आवर) में त्वरित चिकित्सा प्रदान कर मृत्यु दर में भारी कमी लाई जा सकती है।
- अंतर-विभागीय समन्वय: पुलिस, स्वास्थ्य और अग्निशमन विभागों के बीच रियल-टाइम डेटा साझाकरण से संसाधनों का बेहतर आवंटन होगा।
चुनौतियाँ:
- बुनियादी ढांचे की कमी: कई राज्यों में GPS-सक्षम एम्बुलेंस और उन्नत ‘पब्लिक सेफ्टी आंसरिंग पॉइंट्स’ (PSAP) का अभाव है।
- राज्यों की शिथिलता: स्वास्थ्य और पुलिस राज्य सूची के विषय होने के कारण, केंद्र-राज्य समन्वय और राज्यों द्वारा वित्तीय आवंटन में देरी एक बड़ी बाधा रही है।
- जागरूकता का अभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोग पारंपरिक नंबरों (जैसे 100 या 108) पर ही निर्भर हैं।