Urban Disaster Management Authority
संदर्भ:
भारत में शहरीकरण की तीव्र गति और जलवायु परिवर्तन के कारण शहरों में बढ़ती आपदाओं को देखते हुए, भारत सरकार ने आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत ‘अर्बन डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी’ (UDMA) का गठन किया था।
अर्बन डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (UDMA) के बारे में:
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- परिचय: शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UDMA) एक विशेष वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसे राज्य सरकारों को बड़े शहरी क्षेत्रों के लिए गठित करने की शक्ति दी गई है। यह जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के समानांतर या उसके पूरक के रूप में कार्य करता है।
- संवैधानिक आधार: यह मुख्य रूप से आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में किए गए 2025 के संशोधन पर आधारित है।
- यह 74वें संविधान संशोधन अधिनियम (1992) की भावना को पुष्ट करता है, जो नगर पालिकाओं को स्थानीय शासन और आपदा प्रबंधन की योजना बनाने की शक्ति देता है।
उद्देश्य
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- शहरी विशिष्टता: ग्रामीण और शहरी आपदाओं की प्रकृति अलग होती है। शहरों में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (Urban Heat Island) और ‘फ्लैश फ्लड्स’ (Flash Floods) जैसी विशिष्ट समस्याएं होती हैं।
- त्वरित प्रतिक्रिया: घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आपदा के समय निर्णय लेने की प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करना।
- बुनियादी ढांचे की सुरक्षा: मेट्रो, बहुमंजिला इमारतों और भूमिगत उपयोगिताओं (Underground Utilities) के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करना।
- समन्वय: नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन सेवाओं के बीच एक एकल खिड़की समन्वय केंद्र स्थापित करना।
UDMA की संरचना (Structure)
- अध्यक्ष (Chairperson): संबंधित नगर निगम के महापौर (Mayor) या राज्य सरकार द्वारा नामित कोई वरिष्ठ अधिकारी।
- सह-अध्यक्ष: नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) या जिला मजिस्ट्रेट।
- सदस्य: * शहर के पुलिस आयुक्त।
- मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)।
- शहरी नियोजन विशेषज्ञ और पर्यावरणविद्।
- अग्निशमन सेवा के प्रमुख।
- मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO): एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जो प्रशासनिक कार्यों का नेतृत्व करेगा।
UDMA के प्रमुख कार्य और शक्तियाँ
- शहरी आपदा प्रबंधन योजना (UDMP) तैयार करना: शहर के लिए एक व्यापक योजना बनाना जिसमें जोखिम मानचित्रण (Hazard Mapping) शामिल हो।
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (EWS): सेंसर-आधारित बाढ़ चेतावनी और हीट-वेव अलर्ट के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीक तैनात करना।
- बिल्डिंग बायलॉज का प्रवर्तन: यह सुनिश्चित करना कि शहरी निर्माण ‘भूकंप रोधी’ और ‘अग्नि सुरक्षा’ मानकों के अनुरूप हों।
- क्षमता निर्माण: नागरिक सुरक्षा समूहों (Civil Defence) और स्थानीय स्वयंसेवकों को शहरी खोज और बचाव (USAR) के लिए प्रशिक्षित करना।
- ड्रेनेज और सीवरेज प्रबंधन: मानसून से पहले नालों की सफाई और ड्रेनेज नेटवर्क के आधुनिकीकरण की निगरानी करना ताकि शहरी बाढ़ को रोका जा सके।
- डेटा एकीकरण: UDMA ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ के तहत बने ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ (ICCC) का उपयोग आपदा की वास्तविक समय निगरानी के लिए करेगा।

