Apni Pathshala

World Bamboo Day 2026: थीम, इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्य 

World Bamboo Day 2026: थीम, इतिहास एवं महत्वपूर्ण तथ्य 

World Bamboo Day 2026

संदर्भ:

हाल ही में 18 सितंबर 2026 को दुनियाभर में विश्व बांस दिवस 2026 (World Bamboo Day 2026) मनाया गया। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण (Bamboo Conservation) और सतत आजीविका के क्षेत्र में बांस के महत्व को रेखांकित किया गया।

विश्व बांस दिवस: परिचय, इतिहास एवं महत्व 

  • परिचय: विश्व बांस दिवस (World Bamboo Day) एक अंतरराष्ट्रीय जागरूकता दिवस है, जो प्रतिवर्ष 18 सितंबर को वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य बांस के पर्यावरणीय, आर्थिक, सांस्कृतिक और सतत विकास संबंधी महत्व (Bamboo Sustainable Development) को बढ़ावा देना है। 
    • इसे इसके बहुआयामी उपयोग के कारण “हरा सोना” (Green Gold) और “गरीबों की लकड़ी” भी कहा जाता है।
      • बांस कोई वृक्ष नहीं है, बल्कि यह पोएसी (Poaceae) कुल के अंतर्गत आने वाली एक विशाल बारहमासी घास (Giant Perennial Grass) है।
  • वैश्विक स्तर पर बांस की 1,500 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। भारत में मुख्य रूप से डेंड्रोकैलमस स्ट्रिक्टस (लाठी बांस) और बम्बुसा बम्बोस जैसी प्रजातियां प्रचुरता में पाई जाती हैं।
  • यह पृथ्वी पर सबसे तेजी से बढ़ने वाला भूमि आधारित पौधा (Fastest-growing land plant) है। कुछ प्रजातियां अनुकूल परिस्थितियों में 24 घंटे में 36 इंच तक बढ़ सकती हैं।
    • यह प्राकृतिक रूप से तापमान को नियंत्रित करता है (Natural Air Conditioner), भारी मात्रा में ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है और इसमें प्राकृतिक जीवाणुरोधी गुण (Antibacterial Qualities) होते हैं।
  • शुरुआत: इस दिवस की आधिकारिक स्थापना वर्ष 2009 में बैंकॉक (थाईलैंड) में आयोजित 8वें विश्व बांस कांग्रेस (World Bamboo Congress) के दौरान की गई थी।
  • संस्थापक: इसकी घोषणा विश्व बांस संगठन (World Bamboo Organization – WBO) के तत्कालीन अध्यक्ष और दक्षिण एशिया बांस फाउंडेशन के संस्थापक, भारत के कामेश सलाम द्वारा की गई थी।
  • बांस की आवश्यकता:
    • जलवायु कार्यवाई (Bamboo Climate Action): बांस अन्य सामान्य वृक्षों की तुलना में 35% अधिक ऑक्सीजन छोड़ता है और प्रति हेक्टेयर 4 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण (Carbon Sequestration) करता है।
  • प्लास्टिक का विकल्प (Eco-friendly Alternative): यह एकल-उपयोग प्लास्टिक (Single-use Plastic) का पूर्णतः जैविक और सड़नशील विकल्प (Biodegradable Option) है। इससे टूथब्रश, स्ट्रॉ, कपड़े (Textiles) और बायोचार बनाए जा रहे हैं। 
  • 2026 का संस्करण (2026 Edition): वर्ष 2026 में 17वां विश्व बांस दिवस मनाया जा रहा है।
    • World Bamboo Day Theme 2026 की आधिकारिक विषय “बांस सीमाओं से परे” (Bamboo Beyond Borders) निर्धारित की गई है।
      • यह थीम विभिन्न क्षेत्रों, संस्कृतियों और उद्योगों में बांस की वैश्विक प्रासंगिकता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को दर्शाती है।

भारत में बांस का उत्पादन, आयात एवं निर्यात:

  • स्थिति: भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांस उत्पादक देश है। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा बांस खेती योग्य क्षेत्र है, जो लगभग 13.96 मिलियन हेक्टेयर (लगभग 14 मिलियन हेक्टेयर) में फैला हुआ है।
  • क्षेत्रीय वितरण: भारत के कुल बांस भंडार का 60% से अधिक हिस्सा उत्तर-पूर्वी राज्यों (जैसे असम, त्रिपुरा, मिजोरम) में पाया जाता है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी घाट भी प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।
    • यहाँ बांस की 136 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • आयात-निर्यात: भारत वैश्विक स्तर पर तैयार बांस उत्पादों (जैसे अगरबत्ती की तीली, हस्तशिल्प और कागज की लुगदी) का एक शुद्ध आयातक रहा है।
    • भारत ने अपनी कुल आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 76% से अधिक कच्चा माल) बाहरी देशों से मंगाया है, क्योंकि यहाँ मूल्य वर्धित (Value-added) प्रसंस्करण इकाइयों की कमी थी।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम (UK), नीदरलैंड और यूएई भारतीय बांस उत्पादों के प्रमुख आयातक देश हैं। वैश्विक बांस व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4% है।
    • हालिया कर सुधारों और आत्मनिर्भर भारत अभियान के बाद भारत का बांस निर्यात धीरे-धीरे बढ़ रहा है, विशेष रूप से खाड़ी देशों और यूरोप को। 

भारत सरकार द्वारा संचालित प्रमुख योजनाएं:

भारत सरकार ने घरेलू बांस उद्योग को मजबूत करने के लिए निम्नलिखित विनियामक और विकासात्मक प्रयास किए हैं:

  • राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission – NBM): इसे केंद्रीय प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) के रूप में पुनर्गठित कर 2018-19 में लॉन्च किया गया था।
    • इसका मुख्य ध्यान रोपण से लेकर प्रसंस्करण, कौशल विकास (Skill Development), मूल्य संवर्धन और बाजार लिंक विकसित करने पर है ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
  • भारतीय वन अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधन (Indian Forest Act Amendment): सरकार ने वर्ष 2017 में भारतीय वन अधिनियम, 1927 में संशोधन करके बांस को गैर-वन क्षेत्रों में ‘वृक्ष’ (Tree) की कानूनी परिभाषा से बाहर कर दिया।
    • इस विधिक बदलाव के बाद अब किसानों को गैर-वन भूमि पर उगाए गए बांस को काटने और उसके अंतर-राज्यीय परिवहन (Transit Permit) के लिए किसी वन विभाग की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, जिससे कृषि अवसंरचना (Agriculture Infrastructure) को भारी बढ़ावा मिला है।
  • आयात शुल्क में वृद्धि: घरेलू बांस उत्पादकों को संरक्षण देने के लिए, सरकार ने बांस के आयात (विशेष रूप से अगरबत्ती बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बांस) पर सीमा शुल्क (Customs Duty) को 10% से बढ़ाकर 25% कर दिया।
  • एमएसएमई (MSME) और ‘स्पूर्ति’ (SFURTI) योजना: पारंपरिक बांस कारीगरों को संगठित करने और उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ‘स्पूर्ति’ (Scheme of Fund for Regeneration of Traditional Industries) योजना के तहत बांस आधारित उद्योगों को वित्तीय सहायता दी जा रही है।
  • खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की पहल: सूखे भूखंडों पर बांस की हरियाली स्थापित करने के लिए ‘बैम्बू ओएसिस ऑन लैंड्स इन ड्रॉट’ (BOLD) परियोजना शुरू की गई, जिसके तहत राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में विशेष बांस प्रजातियों का बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: World Bamboo Day कब मनाया जाता है?

उत्तर: विश्व बांस दिवस प्रतिवर्ष 18 सितंबर को एक निश्चित तिथि (Fixed-date Observance) के रूप में वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है।

प्रश्न 2: World Bamboo Day 2026 की theme क्या है?

उत्तर: वर्ष 2026 के लिए इस अंतरराष्ट्रीय दिवस की आधिकारिक थीम “बांस सीमाओं से परे” (Bamboo Beyond Borders) निर्धारित की गई है।

प्रश्न 3: World Bamboo Day की शुरुआत कब हुई थी?

उत्तर: इस दिवस की आधिकारिक शुरुआत वर्ष 2009 में थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित 8वीं विश्व बांस कांग्रेस के दौरान हुई थी।

प्रश्न 4: World Bamboo Day किस organisation ने स्थापित किया?

उत्तर: इसकी स्थापना विश्व बांस संगठन (World Bamboo Organization – WBO) द्वारा भारतीय मूल के विशेषज्ञ कामेश सलाम की पहल पर की गई थी।

प्रश्न 5: Bamboo climate action और sustainability के लिए क्यों important है?

उत्तर: यह तेजी से बढ़कर भारी मात्रा में कार्बन अवशोषण करता है, मिट्टी के क्षरण को रोकता है और प्लास्टिक का पूर्ण जैव-सड़नशील विकल्प प्रदान करता है।

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top