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Project Cheetah के चार साल हुए पूरे, चीतों की कुल संख्या बढ़कर 52 हुई

Project Cheetah के चार साल हुए पूरे, चीतों की कुल संख्या बढ़कर 52 हुई

Project Cheetah

संदर्भ:

हाल ही में प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) ने 17 सितंबर 2026 को अपने सफल चार साल पूरे (Project Cheetah Four Years) कर लिए हैं. इस अवधि में देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 52 हो गई है.

“प्रोजेक्ट चीता” के बारे में:

  • परिचय: Project Cheetah विश्व में किसी विशाल मांसाहारी प्रजाति का पहला अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण (Transcontinental Translocation) है.
    • इसका मुख्य उद्देश्य अफ्रीकी चीतों (African Cheetahs) के माध्यम से 1952 में भारत से विलुप्त घोषित हो चुके एशियाई चीतों के ऐतिहासिक क्षेत्रों में एक व्यवहार्य मेटापॉपुलेशन (Metapopulation) को स्थापित करना है. 
  • शुरुआत (Launch): इस ऐतिहासिक परियोजना की औपचारिक शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2022 को की गई थी.
  • मंत्रालय: यह केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) के अंतर्गत संचालित है.
  • नोडल एजेंसी: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) इस परियोजना के क्रियान्वयन की मुख्य नोडल संस्था है.
  • तकनीकी सहयोग: भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), मध्य प्रदेश वन विभाग, नामीबिया के ‘चीता संरक्षण कोष’ (CCF) और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रीय जैव विविधता संस्थान (SANBI) इसमें मुख्य तकनीकी सहयोगी हैं.
  • वित्तीय बजट: केंद्र सरकार ने ‘कैम्पा’ (CAMPA) फंड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड के माध्यम से शुरुआती 5 वर्षों के लिए ₹91.65 करोड़ का बजटीय आवंटन किया है.
  • क्रियान्वयन:
    • प्रथम चरण (2022): 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते विमान द्वारा लाए गए.
    • द्वितीय चरण (2023): 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते मंगाए गए.
    • तृतीय चरण (2026): आनुवंशिक विविधता को मजबूत करने के लिए फरवरी 2026 में बोत्सवाना से 9 नए चीते सफलतापूर्वक भारत लाए गए हैं.
  • पारिस्थितिक बहाली: चीता एक शीर्ष शिकारी (Top Predator) है. इसे पुनः लाकर भारत के शुष्क जंगलों, घास के मैदानों और अर्ध-शुष्क पारिस्थितिकी तंत्र (Grassland Ecosystem) को पुनर्जीवित करने की नीति अपनाई गई है.
  • रेडियो कॉलरिंग और ट्रैकिंग: सभी वयस्क चीतों पर उपग्रह-आधारित जीपीएस/वीएचएफ रेडियो कॉलर (Radio Collar) लगाए गए हैं ताकि 24 घंटे उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य की निगरानी की जा सके.
  • शिकार आधार (Prey-base) का प्रबंधन: कूनो में चीतों के भोजन के लिए चीतल, सांभर और चौसिंगा जैसे शाकाहारी जीवों का निरंतर वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाता है.
  • सरकार के प्रयास: प्रोजेक्ट चीता के समेकन चरण (Consolidation Phase) के तहत सरकार ने इसके भौगोलिक विस्तार पर बल दिया है: 
  • कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park): यह मध्य प्रदेश में स्थित पहला मुख्य केंद्र है.
  • गांधी सागर अभयारण्य (Gandhi Sagar Sanctuary): मध्य प्रदेश के इस दूसरे क्षेत्र को चीतों के लिए तैयार किया गया है. हाल ही में यहाँ बाड़े तैयार कर चीतों को स्थानांतरित किया गया है.
  • भविष्य की योजनाएं: गुजरात के बन्नी घास के मैदानों (Banni Grasslands) और राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स को भी नए आवासों (Potential Habitats) के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है.
  • उपलब्धियां:
    • कुल आबादी (Total Population): सितंबर 2026 तक भारत में चीतों की कुल संख्या 52 हो गई है.
      • कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park Cheetahs) में वर्तमान में कुल 49 चीते मौजूद हैं, जिनमें से 17 खुले जंगल में घूम रहे हैं.
    • भारत में जन्मे शावक (India Born Cheetahs): इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता यह है कि देश में 32 शावकों (32 India Born Cheetahs) का सफल जन्म और उत्तरजीविता हुई है.
    • अपेक्षा से कम मृत्यु दर: प्रारंभिक चुनौतियों और संक्रमणों के बावजूद, भारत में चीता शावकों के जीवित रहने की दर (Cub Survival Rate) अफ्रीकी देशों के प्राकृतिक आवासों की तुलना में डेढ़ गुना से भी अधिक दर्ज की गई है.

परियोजना का महत्व:

  • पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण (Ecosystem Umbrella Protection): चीता संरक्षण के माध्यम से भारत के उपेक्षित घास के मैदानों (Grasslands) को कानूनी संरक्षण प्राप्त हुआ है, जिससे वहाँ रहने वाले अन्य लुप्तप्राय जीवों (जैसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को भी अप्रत्यक्ष सुरक्षा मिल रही है.
  • वैश्विक वन्यजीव कूटनीति (Global Wildlife Diplomacy): भारत का यह सफल प्रयास वैश्विक चीता संरक्षण (Global Cheetah Conservation) के लिए एक मील का पत्थर बन गया है. यह साबित करता है कि गंभीर योजना के साथ प्रजातियों का अंतरमहाद्वीपीय पुनर्वास संभव है.
  • स्थानीय समुदाय का आर्थिक विकास (Eco-tourism and Local Economy): कूनो और गांधी सागर के आस-पास पारिस्थितिक पर्यटन (Eco-tourism) बढ़ने से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और ग्रामीण होमस्टे अवसंरचना (Rural Infrastructure) का अभूतपूर्व विकास हुआ है.
  • अग्रणी वैज्ञानिक अनुसंधान (Cutting-edge Scientific Research): भारत के वन्यजीव वैज्ञानिकों ने मांसाहारी प्रजातियों के व्यवहार, महाद्वीपीय रोगों और जलवायु अनुकूलन पर व्यापक डेटाबेस तैयार किया है, जो भविष्य के संरक्षण कार्यक्रमों के लिए अत्यंत मूल्यवान है. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Project Cheetah के चार साल पूरे होने पर India में कितने cheetahs हैं?

उत्तर: प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने पर भारत में 52 चीते (52 Cheetahs in India) मौजूद हैं, जिसमें वयस्क और शावक दोनों शामिल हैं. 

प्रश्न 2: India में कितने cheetah cubs का जन्म हुआ है?

उत्तर: परियोजना के अंतर्गत अब तक भारतीय धरती पर 32 चीता शावकों (32 India Born Cheetahs) का जन्म और सफल पालन-पोषण हुआ है.

प्रश्न 3: Project Cheetah 2026 में Kuno National Park में कितने cheetahs हैं?

उत्तर: कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park Cheetahs) में वर्तमान में कुल 49 चीते मौजूद हैं, जिनमें से 17 खुले जंगल में घूम रहे हैं.

प्रश्न 4: Gandhi Sagar Sanctuary में कितने cheetahs मौजूद हैं?

उत्तर: मध्य प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य (Gandhi Sagar Sanctuary) में वर्तमान चरण में कुल 3 चीते सुरक्षित रूप से रह रहे हैं.

प्रश्न 5: Project Cheetah India में कब शुरू किया गया था?

उत्तर: यह ऐतिहासिक वन्यजीव पुनरुद्धार योजना (Cheetah Reintroduction Project) आधिकारिक रूप से 17 सितंबर 2022 को नामीबियाई चीतों के आगमन के साथ शुरू हुई थी.

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