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विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026

विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026

World Migration Report 2026

संदर्भ:

हाल ही अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) द्वारा ‘विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026’ (World Migration Report 2026) जारी की गई, जिसमें वैश्विक प्रवासन प्रवृत्तियों और मानवीय गतिशीलता का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026 के मुख्य बिंदु:

  • कुल अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी: वर्ष 2024 के मध्य तक विश्व में अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या लगभग 304 मिलियन (30.4 करोड़) तक पहुँच गई है। यह वैश्विक जनसंख्या का 3.7% हिस्सा है।
  • आंतरिक विस्थापन: वर्ष 2024 के अंत तक रिकॉर्ड 83.4 मिलियन लोग अपने ही देशों के भीतर विस्थापित थे, जो संघर्ष और जलवायु आपदाओं के कारण हुआ।
  • प्रवासी मृत्यु दर: रिपोर्ट इसे “सबसे घातक वर्ष” के रूप में चिह्नित करती है, जहाँ 2024 में कम से कम 9,197 प्रवासियों की मृत्यु दर्ज की गई। [5, 6, 7, 8]
  • भारत: रिपोर्ट में भारत को प्रवासन के वैश्विक केंद्र के रूप में दर्शाया गया है:
  • भारत वैश्विक स्तर पर धन प्राप्ति (Remittances) में शीर्ष पर बना हुआ है। वर्ष 2024 में भारत ने $137 बिलियन से अधिक प्राप्त किए, और यह $100 बिलियन का आंकड़ा पार करने वाला एकमात्र देश है।
  • ‘भारत-संयुक्त अरब अमीरात’ (UAE) और ‘भारत-अमेरिका’ दुनिया के शीर्ष प्रवासन मार्गों में शामिल हैं। भारत-UAE मार्ग दुनिया का 5वां और भारत-अमेरिका 6ठा सबसे बड़ा गलियारा है।
  • भारत से होने वाले कुल बाह्य प्रवास में पुरुषों की हिस्सेदारी लगभग 65% है, जो मुख्य रूप से आर्थिक अवसरों और काम के लिए प्रवास करते हैं।
  • प्रमुख कारक: जलवायु गतिशीलता (Climate Mobility) आपदा से संबंधित विस्थापन में 2024 में 29% की वृद्धि हुई।
    • संघर्ष और हिंसा सूडान और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे क्षेत्रों में जारी संकट प्रवासन का प्रमुख कारण है।
    • आर्थिक विषमता श्रम बाजार की मांग और बेहतर जीवन स्तर की तलाश में लगभग 16.8 करोड़ श्रमिक प्रवासी सक्रिय हैं।
  • नियमित मार्ग (Regular Pathways): रिपोर्ट के अनुसार, केवल 20% देशों में नियमित श्रम प्रवासन के लिए प्रभावी कार्यक्रम हैं। अनियमित प्रवासन प्रवासियों को शोषण और मानव तस्करी के जोखिम में डालता है।
  • मस्तिष्क पलायन बनाम लाभ (Brain Drain vs. Gain): उच्च कौशल वाले प्रवासियों (जैसे IT और स्वास्थ्य सेवा) का भारत से पश्चिम की ओर प्रवास एक दोहरी चुनौती पेश करता है।
  • प्रवास और सतत विकास (SDGs): प्रवासन को अब केवल एक समस्या नहीं, बल्कि गरीबी उन्मूलन (SDG 1) और असमानता कम करने (SDG 10) के लिए एक “वैश्विक रणनीतिक संपत्ति” के रूप में देखा जा रहा है। 
  • सुझाव: रिपोर्ट में एक ‘रूट-आधारित दृष्टिकोण’ (Route-based approach) अपनाने पर जोर दिया गया है, जिसमें विखंडित प्रतिक्रियाओं के बजाय संपूर्ण प्रवासन गलियारों में डेटा-आधारित समन्वय की आवश्यकता है।
  • साथ ही, स्थानीय सरकारों की क्षमता निर्माण (Localization) और प्रवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर माइग्रेशन (GCM) के प्रभावी कार्यान्वयन की अपील की गई है।

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