यमुना जल समझौता: अमित शाह की उपस्थिति में हुआ हरियाणा-राजस्थान के बीच MOU
संदर्भ:
हाल ही में हरियाणा और राजस्थान के बीच तीन दशकों से लंबित जल विवाद को सुलझाने हेतु केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) की मौजूदगी में दोनों राज्यों ने मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी के सही उपयोग के लिए यमुना जल समझौते (Yamuna Water Agreement) पर हस्ताक्षर किए।
यमुना जल समझौता (Yamuna Water Agreement) क्या हैं?
- परिचय: यह ऊपरी यमुना बेसिन (Upper Yamuna Basin) के सतही जल को साझा करने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की एक अंतर-राज्यीय जल परियोजना (Yamuna Water Project) है।
- मुख्य उद्देश्य (Objective): मानसून के दौरान बहने वाले अतिरिक्त यमुना जल (Yamuna Water Sharing) को पाइपलाइन से राजस्थान के जल-संकट वाले क्षेत्रों तक पेयजल हेतु पहुँचाना है।
- ऐतिहासिक हस्ताक्षर (Signatures): नई दिल्ली में 29 जून 2026 को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- हस्ताक्षरकर्ता (Signatories): केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इसमें शामिल रहे।
- गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने इस त्रिपक्षीय बैठक की अध्यक्षता कर सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का उदाहरण पेश किया।
- इतिहास (History): मूल रूप से 12 मई 1994 को पांच बेसिन राज्यों के बीच यमुना जल बंटवारा (Interstate Water Agreement) तय हुआ था, लेकिन परिवहन प्रणाली न होने से यह रुका था।
- इस समझौते के तहत हरियाणा को 40.6%, उत्तर प्रदेश को 35.1%, राजस्थान को 10.4%, दिल्ली को 6.3% और हिमाचल प्रदेश को 1.7% यमुना का पानी दिया जाना तय किया गया था।
- जल शक्ति मंत्रालय की पहल (Jal Shakti Ministry): केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय (Jal Shakti Ministry) और केंद्रीय जल आयोग ने दोनों राज्यों के बीच तकनीकी और प्रशासनिक सहमति बनाने में मुख्य भूमिका निभाई।
- मुख्य बिंदु:
- बुनियादी ढांचा (Water Infrastructure): हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज (Hathnikund Barrage) से राजस्थान तक लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली का निर्माण किया जाएगा।
- परियोजना लागत (Project Cost): इस विशाल यमुना जल परियोजना (Yamuna Water Project) की अनुमानित लागत ₹34,102 करोड़ तय की गई है।
- राजस्थान को लाभ (Rajasthan Water): राजस्थान को मानसून महीनों में उसके हिस्से का 1,917 क्यूसेक (लगभग 580 मिलियन cubic मीटर) पानी मिलेगा।
- इसके तहत राजस्थान को उसके हिस्से का यमुना जल (कुल आवंटित हिस्से का 10.4%) उपलब्ध कराया जाना तय हुआ है।
- प्रभावित क्षेत्र (Beneficiary Areas): इससे राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र (चूरू, सीकर, झुंझुनूं) और हरियाणा के भिवानी व फतेहाबाद जिलों में पेयजल संकट दूर होगा।
- जल सुरक्षा (Water Security): व्यर्थ बह जाने वाले मानसून के वर्षा जल को बड़े तालाबों में संचित कर भूजल स्तर (Groundwater Table) को सुधारा जाएगा।
- अंतर-राज्यीय संबंध (Haryana Rajasthan Relations): तीन दशक पुराने इस विवाद (Water Dispute) के सुलझने से दोनों राज्यों के बीच आर्थिक और सामाजिक सहयोग को नई गति मिलेगी।
- विवाद समाधान तंत्र (Dispute Resolution): इस नए समझौते में पानी के आवंटन, परिचालन, रखरखाव और भविष्य के विवादों के निपटारे के लिए पारदर्शी ढांचा बनाया गया है।
FAQs:
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यमुना जल समझौता क्या है?
यह ऊपरी यमुना नदी (Yamuna River) के अतिरिक्त जल को हरियाणा और राजस्थान के बीच साझा करने की एक ऐतिहासिक जल-साझाकरण व्यवस्था (Yamuna Water Sharing) है।
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हरियाणा और राजस्थान के बीच MOU क्यों हुआ?
ताकि वर्ष 1994 से लंबित जल विवाद (Water Dispute) को सुलझाकर मानसून के पानी को भूमिगत पाइपलाइन से पेयजल हेतु स्थानांतरित किया जा सके।
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अमित शाह की इस बैठक में क्या भूमिका रही?
गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए आपसी संवाद द्वारा दोनों राज्यों की सहमति सुनिश्चित कराई।
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इस समझौते से दोनों राज्यों को क्या लाभ होगा?
इससे राजस्थान को पेयजल (Drinking Water) मिलेगा, हरियाणा को पूरा सहयोग मिलेगा और दोनों राज्यों में भूजल स्तर सुधरेगा।
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यमुना जल बंटवारे का महत्व क्या है?
यह राष्ट्रीय जल सुरक्षा (Water Security), कृषि विकास और अंतर-राज्यीय सहयोग (Inter State Cooperation) को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
