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भारत में कॉकरोच की कुल 191 प्रजातियां

भारत में कॉकरोच की कुल 191 प्रजातियां

191 species of cockroaches in India

 

संदर्भ:

भारतीय प्राणि सर्वेक्षण (ZSI) के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में कॉकरोच (Blattodea) की 191 प्रजातियां दर्ज हैं। इनमें से 60% से अधिक (119 प्रजातियां) केवल भारत में ही पाई जाने वाली स्थानिक (Endemic) हैं।

ZSI अध्ययन के मुख्य बिंदु:

  • कुल प्रजातियाँ: भारत में वर्तमान में कॉकरोच (गण: ब्लाटोडेआ/Blattodea) की 191 प्रजातियां (74 जेनरा/Genera में विभाजित) मौजूद हैं। यह वैश्विक जैव विविधता का लगभग 3.8% है।
  • स्थानिकता (Endemism): इस खोज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 119 प्रजातियां (60% से अधिक) भारत की स्थानिक (Endemic) हैं। इसका अर्थ है कि ये प्रजातियां दुनिया में भारत के अलावा कहीं और नहीं पाई जाती हैं।
  • गोंडवाना संबंध: वैज्ञानिकों के अनुसार, भारत की इन स्थानिक प्रजातियों का विकासवादी संबंध प्राचीन गोंडवाना महाद्वीप (Gondwana Continent) से जुड़ा हो सकता है, जो महाद्वीपीय विस्थापन (Continental Drift) के इतिहास को समझने में मदद करता है। 
  • बारकोड रेफरेंस लाइब्रेरी: ZSI के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र (पुणे) और दक्षिणी क्षेत्रीय केंद्र (चेन्नई) ने मिलकर भारत की पहली और सबसे बड़ी कॉकरोच डीएनए बारकोड रेफरेंस लाइब्रेरी तैयार की है। जिसके माध्यम से इन प्रजातियां को पहचाना जा सका है।
    • इस तकनीक में 100 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले डीएनए बारकोड शामिल हैं। यह तकनीक ‘सुपरमार्केट स्कैनर’ की तरह काम करती है, जो जीवों के छोटे जेनेटिक अनुक्रम का उपयोग करके सटीक पहचान करती है।
    • मार्च 2026 में पुणे के दक्कन प्रायद्वीप में खोजी गई नई प्रजाति ‘नियोलोबोप्टेरा पेनिनसुलेरिस’ (Neoloboptera peninsularis) भारत में आधुनिक डीएनए तकनीक से पहचानी गई पहली कॉकरोच प्रजाति बनी थी।

पारिस्थितिकी तंत्र में कॉकरोच की भूमिका:

  • अपघटक (Decomposers): ये जंगलों और गुफाओं में कार्बनिक पदार्थों (जैसे सूखी पत्तियां, मृत पौधे) को सड़ने में मदद करते हैं।
  • पोषक तत्व चक्र (Nutrient Recyclers): कार्बनिक पदार्थों को तोड़कर ये मिट्टी में नाइट्रोजन और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को वापस मिलाते हैं।
  • खाद्य जाल का आधार: ये जंगलों में पक्षियों, सरीसृपों और छोटे स्तनधारियों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत हैं।
  • जैव-संकेतक (Bio-indicators): जंगली प्रजातियां पर्यावरणीय अशांति और प्रदूषण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं, जिससे ये पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य की सटीक जानकारी देती हैं।

संरक्षण:

  • संरक्षण स्थिति (Conservation Status): भारतीय कॉकरोच प्रजातियों को वर्तमान में IUCN रेड लिस्ट में मूल्यांकित नहीं किया गया है।
  • कानूनी स्थिति: ये प्रजातियां भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम (WPA), 2022 की किसी भी अनुसूची में सूचीबद्ध नहीं हैं और न ही CITES के परिशिष्टों में शामिल हैं।

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